शंकराचार्य ने रामपाल को शास्त्रार्थ की दी खुली चुनौती:शिवांश नारायण द्विवेदी बने शंकराचार्य के प्रतिनिधि,‘रामपाल का रसातल गमन’ पुस्तक का किया विमोचन

Oct 19, 2026 - 13:24
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शंकराचार्य ने रामपाल को शास्त्रार्थ की दी खुली चुनौती:शिवांश नारायण द्विवेदी बने शंकराचार्य के प्रतिनिधि,‘रामपाल का रसातल गमन’ पुस्तक का किया विमोचन
सनातन धर्म, वेद-शास्त्रों और हिंदू देवी-देवताओं को लेकर संत रामपाल की ओर से किए जा रहे आपत्तिजनक प्रचार के विरोध में केदारघाट स्थित श्रीविद्यामठ में ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने रामपाल के विचारों पर सवाल उठाते हुए उन्हें शास्त्रार्थ की खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा कि धर्मशास्त्रों के बारे में किसी भी तरह की चर्चा और बहस शास्त्रों के प्रमाणों के आधार पर होनी चाहिए। यदि रामपाल को अपने विचारों और ज्ञान पर भरोसा है तो उन्हें बताना चाहिए कि वह किस शास्त्र के आधार पर अपनी बात रख रहे हैं। उसी शास्त्र को केंद्र में रखकर उनसे चर्चा की जा सकती है। शंकराचार्य ने कहा - यह स्पष्ट नहीं है कि रामपाल स्वयं सनातन धर्म के विरुद्ध इस तरह की बातें कर रहे हैं या कोई अन्य शक्ति उन्हें माध्यम बनाकर ऐसा कर रही है। हालांकि, उनके बयानों, पुस्तकों और वीडियो के माध्यम से धर्मशास्त्रों तथा देवी-देवताओं को लेकर जो बातें सामने आ रही हैं, उनसे सनातन धर्म को मानने वाले लोगों की भावनाएं आहत हो रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि रामपाल की ओर से प्रकाशित पुस्तकों और प्रसारित वीडियो के जरिए हिंदू धर्म की मान्यताओं पर सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि इन दावों का जवाब शास्त्रीय प्रमाणों और तर्कों के आधार पर दिया जाए। शिवांश नारायण द्विवेदी को बनाया प्रतिनिधि शंकराचार्य ने शिवांश नारायण द्विवेदी को इस विषय पर अपना प्रतिनिधि नियुक्त करने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि शिवांश नारायण द्विवेदी ने रामपाल के विचारों और उनके द्वारा धर्मशास्त्रों को लेकर किए जा रहे दावों के जवाब में लिखना शुरू किया है। ऐसे में उनके काम को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने और शास्त्रीय पक्ष समाज के सामने रखने के लिए उन्हें अधिकृत किया गया है। ‘कॉकरोच’ टिप्पणी पर भी बोले शंकराचार्य प्रेसवार्ता के दौरान देश के मुख्य न्यायाधीश की ओर से कथित तौर पर नई पीढ़ी के लिए इस्तेमाल किए गए ‘कॉकरोच’ शब्द से जुड़े सवाल पर भी शंकराचार्य ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जब देश के मुख्य न्यायाधीश की ओर से जनता, विशेषकर नई पीढ़ी के लिए इस तरह की टिप्पणी की गई तो लोगों ने इसे गंभीरता से लिया। इसके बाद युवाओं ने खुलकर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।

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