श्राद्ध पक्ष के अंतिम दिन झूलेलाल घाट पर पितृ विसर्जन:लखनऊ में बड़ी संख्या में पहुंचे लोग, पूर्वजों के लिए किया तर्पण और पिंडदान
लखनऊ में श्राद्ध पक्ष के अंतिम दिन शनिवार को गोमती नदी के झूलेलाल घाट पर पितृ विसर्जन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। लोगों ने अपने पूर्वजों के निमित्त तर्पण और पिंडदान किया। परिवार की सुख-शांति और पितरों के आशीर्वाद की कामना की। घाट पर सुबह से ही श्राद्ध कर्म कराने वालों की आवाजाही रही। पूर्वजों के प्रति सम्मान और उनके निमित्त कर्म की परंपरा बाबूगंज निवासी गंगा राम ने बताया कि उन्होंने अपने माता-पिता, चाचा और अन्य परिजनों के निमित्त पितृ कर्म किया। उन्होंने कहा कि पूर्वजों का आशीर्वाद पूरे परिवार पर बना रहे, यही उनकी प्रार्थना है। वहीं, लखनऊ निवासी पंकज संतोषी पिछले करीब 20 साल से झूलेलाल घाट पर पितृ विसर्जन करने आ रहे हैं। उन्होंने अपने बाबा और दादा के निमित्त श्राद्ध कर्म किया। पंकज संतोषी ने कहा कि सनातन धर्म में पूर्वजों के प्रति सम्मान और उनके निमित्त कर्म करने की परंपरा है। इसे आगे भी निभाना चाहिए। पितरों की मुक्ति के लिए करते हैं पिंडदान संस्कृत वशिष्ठ आश्रम के व्याकरणाचार्य प्रकाश कुमार तिवारी ने बताया कि आश्विन कृष्ण पक्ष पितरों को समर्पित होता है। पितृपक्ष के अंतिम दिन लोग अपने पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। इसके बाद आश्विन शुक्ल पक्ष की शुरुआत होती है। उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार मनुष्य पर पितृ ऋण, देव ऋण और ऋषि ऋण होते हैं। पितरों के निमित्त तर्पण और पिंडदान करना पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम है। पंचामृत से कराते हैं पिंडों का स्नान अनिल कुमार शास्त्री के अनुसार, पिंडदान में जौ के आटे, खोये या खीर से पिंड बनाए जाते हैं। गाय का दूध, दही, घी, शहद और चीनी से पंचामृत तैयार किया जाता है। धार्मिक विधान के अनुसार पिंडों को पंचामृत से स्नान कराकर पितरों के निमित्त पूजा और तर्पण किया जाता है। श्रद्धालु मानते हैं कि इन कर्मों से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
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