श्रावस्ती में आज 43 स्थानों पर जलेगा रावण का पुतला:नासिरगंज का मुस्लिम परिवार 40 साल से बना रहा पुतले , सामाजिक सौहार्द का संदेश दिया

Oct 20, 2026 - 11:26
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श्रावस्ती में आज 43 स्थानों पर जलेगा रावण का पुतला:नासिरगंज का मुस्लिम परिवार 40 साल से बना रहा पुतले , सामाजिक सौहार्द का संदेश दिया
श्रावस्ती में बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक विजयादशमी पर्व मंगलवार को उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। भिनगा, इकौना और जमुनहा क्षेत्रों में करीब 43 स्थानों पर रावण के पुतलों का दहन होगा। कहीं सैकड़ों साल पुरानी दशहरे की परंपरा निभाई जाएगी, तो कहीं विशाल पुतलों के दहन के साथ उत्सव मनाया जाएगा। सभी प्रमुख आयोजन स्थलों पर पुतलों को मैदानों में खड़ा कर दिया गया है। दोपहर बाद लोगों की चहल-पहल बढ़ने और शाम को आयोजन स्थलों पर भीड़ जुटने की उम्मीद है। नासिरगंज के मोहम्मद इब्राहिम और उनका परिवार पिछले 40 वर्षों से दशहरे के लिए रावण और मेघनाद के पुतले बनाता आ रहा है। इस बार भी परिवार करीब 20 फीट ऊंचा रावण का पुतला तैयार कर रहा है। दशहरे के दिन मंगलवार सुबह भी परिवार के सदस्य पुतले का बाकी काम पूरा करने में जुटे रहे। इब्राहिम के परिवार की यह चार दशक पुरानी परंपरा त्योहारों की खुशियों और सामाजिक सौहार्द का संदेश दे रही है। परिवार धर्म की सीमाओं से परे मिल-जुलकर त्योहार मनाने और आपसी भाईचारे की मिसाल पेश कर रहा है। भिनगा में सदियों पुरानी परंपरा, इकौना में 30 फीट का रावण भिनगा के रामलीला मैदान में करीब 20 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। यहां सैकड़ों वर्षों से दशहरा मनाने की परंपरा चली आ रही है। वहीं, जमुनहा बाजार के रामलीला मैदान में वर्ष 1985 से करीब 25 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाता है। इकौना क्षेत्र में भी बड़े स्तर पर रावण दहन की तैयारी की गई है। यहां करीब 30 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन होगा। जिले के प्रमुख आयोजन स्थलों पर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और शाम को लोगों के जुटने की संभावना है। सत्य की जीत का संदेश देता है विजयादशमी पर्व विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की जीत का संदेश देता है। रामायण की मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर अधर्म पर विजय प्राप्त की थी। इसी प्रसंग की याद में हर साल रावण के पुतलों का दहन किया जाता है। नासिरगंज में मोहम्मद इब्राहिम के परिवार की चार दशक पुरानी परंपरा दशहरे के उत्सव के साथ आपसी भाईचारे, सामाजिक सौहार्द और मिल-जुलकर त्योहार मनाने का संदेश भी दे रही है।

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