श्रीराममंदिर परिसर में मां चंद्रघंटा की आराधना:भक्तिमय वातावरण में हुई रामलला सहित देवी उपासना

Oct 13, 2026 - 13:01
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श्रीराममंदिर परिसर में मां चंद्रघंटा की आराधना:भक्तिमय वातावरण में हुई रामलला सहित देवी उपासना
शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर में मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप देवी चंद्रघंटा की आराधना श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ की गई। नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व माना जाता है। इस अवसर पर मां भगवती के दिव्य स्वरूप का स्मरण करते हुए सुख, शांति, समृद्धि और लोककल्याण की कामना की गई। प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या में नवरात्रि के दौरान देवी उपासना का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। यहां श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर में मां दुर्गा के स्वरूप की आराधना शक्ति और भक्ति के अद्भुत संगम का संदेश देती है। नवरात्र के दौरान रामलला का दर्शन करने पहुंचने वाले भक्तों का समूह रामलला के दर्शन के बाद राम दरबार और मंदिर के परकोटे में विराजमान दुर्गा की मूर्ति का खास तौर पर दर्शन कर रहे हैं।भव्य सजावट अनुष्ठान के आध्यात्मिक वातावरण में मानों भक्तों के लिए समय ठहर जा रहा हो। दंतधावन कुंड के प्रशासक और रामभक्त कौस्तुभ अचारी के अनुसार जहां एक ओर श्रीराम भक्ति की उपासना में प्रधान देवता माने जाते हैं।वहीं दुर्गा शक्ति की उपासना में प्रधान है।भक्ति और शक्ति का एक ही स्थान पर दर्शन राम मंदिर पहंचने वाले भक्तों को परम आनंद की अनुभूति करा रहा है। बताते चले कि प्रभु श्रीराम की नगरी में मां भगवती की उपासना श्रद्धालुओं के मन में आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक चेतना को और प्रगाढ़ करती है। सनातन धर्म में नवरात्रि को शक्ति की उपासना का विशेष पर्व माना जाता है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी चंद्रघंटा अपने भक्तों को साहस, शक्ति और निर्भयता प्रदान करती हैं। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित होने के कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। भगवती के इस स्वरूप में आराधना अयोध्या के देवी मंदिरों सहित हजारों स्थानों पर हो रही है। वैष्णव अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता महंत गौरीशंकर दास,हनुमानगढ़ी के अनुसार मां चंद्रघंटा का स्वरूप धर्म, साहस और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक माना जाता है। भक्त मानते हैं कि माता की सच्चे मन से आराधना करने से भय और नकारात्मकता दूर होती है तथा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

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