सीएम डैशबोर्ड में रामपुर पुलिस पूरे प्रदेश में नंबर-1:सितंबर में 86.70% अंक मिले; जुलाई 2024 से अब तक 26 बार हासिल कर चुकी है पहला स्थान
रामपुर में सीएम डैशबोर्ड की सितंबर 2026 की रैंकिंग में रामपुर पुलिस ने पूरे प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और शिकायतों के निस्तारण समेत विभिन्न बिंदुओं पर किए गए कार्यों के आधार पर जिले को 86.70 प्रतिशत अंक मिले हैं। पुलिस विभाग के अनुसार, जुलाई 2024 से अब तक रामपुर पुलिस 26 बार प्रदेश की रैंकिंग में प्रथम स्थान हासिल कर चुकी है। हालांकि, जून 2025 में जिला दूसरे स्थान पर रहा था। पुलिस अधीक्षक अनिल सिसौदिया ने शनिवार रात 10 बजे बताया कि उनके और अपर पुलिस अधीक्षक अनुराग सिंह के पर्यवेक्षण में यह उपलब्धि हासिल हुई है। उन्होंने बताया कि अपर पुलिस महानिदेशक बरेली जोन रमित शर्मा और पुलिस उपमहानिरीक्षक मुरादाबाद परिक्षेत्र मुनिराज के निर्देशन में पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली की निगरानी की जा रही है। 50 बिंदुओं पर तय होती है जिलों की रैंकिंग सीएम डैशबोर्ड पर जिलों की रैंकिंग 50 बिंदुओं पर की गई कार्रवाई के आधार पर निर्धारित होती है। इसमें अपराध नियंत्रण, विवेचनाओं का निस्तारण, गिरफ्तारी और शिकायतों पर कार्रवाई शामिल है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति के खिलाफ अपराध, महिलाओं के प्रति अपराध, हत्या, दुष्कर्म, दहेज मृत्यु और पॉक्सो अधिनियम से जुड़े मामलों में पुलिस की कार्रवाई की समीक्षा भी की जाती है। इसके अलावा आबकारी अधिनियम, एनडीपीएस अधिनियम, गैंगस्टर अधिनियम, गुंडा अधिनियम और गोवध निवारण अधिनियम के तहत की गई कार्रवाई को भी रैंकिंग में शामिल किया जाता है। जघन्य अपराधों की लंबित विवेचनाओं, वांछित और इनामी अभियुक्तों के खिलाफ कार्रवाई तथा गिरफ्तारी और आत्मसमर्पण के आंकड़ों का भी मूल्यांकन किया जाता है। जनसुनवाई से लेकर डायल 112 के रिस्पांस टाइम तक की समीक्षा रैंकिंग में आईजीआरएस जनसुनवाई, पंजीकृत शिकायतों के निस्तारण, सीसीटीएनएस से संबंधित शिकायतों और डायल 112 की कॉलर संतुष्टि को भी महत्व दिया जाता है। डायल 112 का रिस्पांस टाइम, अग्नि सुरक्षा एनओसी, कर्मचारियों और किरायेदारों का सत्यापन, चरित्र प्रमाण पत्र जारी करने तथा जुलूस और विरोध-प्रदर्शन की अनुमति जैसे बिंदुओं की भी समीक्षा होती है। अदालतों में पैरवी और सजा के आंकड़े भी शामिल सीएम डैशबोर्ड की रैंकिंग में अधीनस्थ और सत्र न्यायालयों में गवाहों के विवरण, गैंगस्टर और एससी-एसटी अधिनियम के तहत निर्णित मामलों तथा गंभीर अपराधों में सजा से संबंधित आंकड़ों को भी शामिल किया जाता है। इन सभी बिंदुओं पर जिले के प्रदर्शन के आधार पर रैंकिंग तय की जाती है।
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