सिपाही पर बंधक बनाकर पीटने में FIR:प्रयागराज में 4 अन्य भी नामजद, महिला बोली- 2 लाख रुपये मांगे, जबरन कबूलनामा भी लिखवाया
प्रयागराज में युवक को बंधक बनाकर दो लाख रुपये मांगने के आरोप में फूलपुर थाने के सिपाही अर्जुन सिंह समेत पांच लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है। सरायइनायत थाने में कोर्ट के आदेश के बाद एफआईआर हुई है। आरोप है कि चारों अन्य नामजद आरोपियों ने पहले बंधक बनाकर पीटते हुए उससे दो लाख रुपये मांगे। नहीं देने पर सिपाही के हवाले कर दिया, जिसने थाने में पिटाई की और जबरन कबूलनामा लिखवाया। दोबारा घर आकर साथ ले गया शिकायतकर्ता फोटो देवी सरायइनायत के बहादुरपुर चौराहा दोदापुर की रहने वाली हैं। उन्होंने पुलिस को बताया, बेटे संजीव की आदर्श कुमार उर्फ टिंकू से जान-पहचान थी। आदर्श जानवरों की खरीद-फरोख्त का काम करता था और बेचे गए जानवरों के पैसे के तकादे के लिए संजीव को अपने साथ ले जाता था।
9 अगस्त 2026 की शाम करीब चार बजे आदर्श कुमार दो-तीन लोगों के साथ मैजिक गाड़ी से आया और संजीव को फूलपुर चलने के लिए अपने साथ ले गया। करीब दो घंटे बाद संजीव वापस घर आ गया।
शाम करीब सात बजे आदर्श कुमार फिर बथुई उर्फ विकास कुमार, चुलबुल डॉक्टर उर्फ लालचंद्र और आशीष कुमार के साथ उसके पास पहुंचा। आरोप है कि सभी ने सहसों चौराहा चलकर पार्टी से पैसा लेने की बात कही। संजीव उनके साथ चला गया, लेकिन तीन-चार घंटे बाद भी घर नहीं लौटा।
मां ने घर जाकर देखा तो बेटा बंधक था
महिला ने बताया, बेटे के वापस नहीं आने पर वह आदर्श कुमार के घर पहुंचीं। वहां देखा कि उसके साथ मारपीट की जा रही थी और दो लाख रुपये लेने की बात कही जा रही थी।
आरोपियों ने उससे भी कहा कि दो लाख रुपये नहीं दिए तो उसके बेटे को जान से मारकर शव गायब कर देंगे। पुलिस को सूचना देने पर पूरे परिवार को जान से मार दिया जाएगा।
मोबाइल छीनकर सिपाही के हवाले किया
महिला के मुताबिक, बाद में बेटे ने बताय कि आरोपी 9 अगस्त से आरोपी उसके साथ मारपीट कर रहे थे और लगातार दो लाख रुपये मांग रहे थे। रुपये देने से मना करने पर उसका मोबाइल छीन लिया गया।
इसके बाद आरोपियों ने फूलपुर थाने के सिपाही अर्जुन सिंह को बुलाकर उनके हवाले कर दिया। इसके बाद थाने में सिपाही अर्जुन सिंह ने भी अन्य आरोपियों की सहमति से मेरी पिटाई की।
जबरन कबूलनामा लिखवाया, वीडियो भी बनाया
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सिपाही ने संजीव पर दबाव बनाकर पैसे के संबंध में उसका जबरन कबूलनामा कराया। इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई गई। इसके अलावा सादे स्टांप पेपर पर उसके हस्ताक्षर कराने का आरोप है।
संजीव का कहना है कि पुलिस ने उस पर इतना दबाव बनाया कि पुलिसकर्मियों ने जैसा कहा, उसने वैसा ही बयान दिया। इसके बाद उसके खिलाफ शांतिभंग के तहत चालानी कार्रवाई कर दी गई।
मेडिकल में चोटों का जिक्र
मामले में संजीव ने 17 अगस्त को बेली अस्पताल, प्रयागराज में अपना मेडिकल कराया था। कोर्ट के आदेश में मेडिकल दस्तावेजों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि इनमें संजीव के शरीर पर चोटें होने की बात सामने आई थी।
पहले पुलिस अधिकारियों से की गई शिकायत
एफआईआर के मुताबिक, घटना के संबंध में संजीव ने 112 नंबर पर सूचना दी थी। 10 अगस्त को पुलिस आयुक्त प्रयागराज को ईमेल और मुख्यमंत्री को आईजीआरएस के जरिए शिकायत भेजी गई। सरायइनायत थाने में भी प्रार्थना पत्र दिया गया, लेकिन कार्रवाई नहीं होने का आरोप है।
इसके बाद 12 अगस्त को पुलिस आयुक्त, मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को भी शिकायत भेजी गई।
अदालत ने माना, संज्ञेय अपराध का मामला
मामले में फोटो देवी ने अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में प्रार्थना पत्र दिया था। कोर्ट ने शिकायत, मेडिकल दस्तावेज और पुलिस की रिपोर्ट देखने के बाद मामले में पहली नजर में संज्ञेय अपराध बनना माना था।
कोर्ट ने सरायइनायत थानाध्यक्ष को एक सप्ताह के भीतर एफआईआर दर्ज करने और मामले की जांच करने का आदेश दिया था। इसी आदेश के बाद अब सिपाही अर्जुन सिंह समेत पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। जांच में साफ होगी सिपाही की भूमिका
अब जांच में सिपाही अर्जुन सिंह की भूमिका भी सामने आएगी। पुलिस यह जांच करेगी कि संजीव को उनके हवाले कैसे किया गया, थाने में उसके साथ मारपीट हुई या नहीं, पैसे के संबंध में उससे जबरन कबूलनामा कराया गया या नहीं और सादे स्टांप पर हस्ताक्षर कराने के आरोप कितने सही हैं। एफआईआर में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
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