SIR में गड़बड़ी के आरोपों पर अधिवक्ता संघ का प्रदर्शन:देवरिया में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग, कलेक्ट्रेट में राष्ट्रपति के ज्ञापन सौंपा

Oct 13, 2026 - 15:45
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SIR में गड़बड़ी के आरोपों पर अधिवक्ता संघ का प्रदर्शन:देवरिया में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग, कलेक्ट्रेट में राष्ट्रपति के ज्ञापन सौंपा
देवरिया में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित गड़बड़ियों को लेकर अधिवक्ता संघ ने मंगलवार दोपहर कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। संघ के सदस्यों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरोध में नारेबाजी की। इसके बाद जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफे की मांग की गई। साथ ही जांच में गंभीर कदाचार प्रमाणित होने पर संविधान के अनुसार कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया। ज्ञापन में कहा गया कि भारतीय निर्वाचन आयोग संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत गठित महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था है। लोकतंत्र में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव की अहम भूमिका है। ऐसे में आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर प्रक्रियागत सवाल उठने पर निष्पक्ष और सार्वजनिक जांच कराई जानी चाहिए। अधिवक्ता संघ ने SIR और निर्वाचन आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली से जुड़ी रिपोर्टों में उल्लिखित दस्तावेजों और आरोपों की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। इसके अलावा फॉर्म-6 में किए गए बदलाव, उसके कानूनी आधार और उसे लागू करने के लिए जारी आदेशों व निर्देशों की भी जांच कराने की बात कही। ECINet और ERONet के ऑडिट की मांग ज्ञापन में ECINet और ERONet सहित मतदाता सूची से जुड़े डेटाबेस का तकनीकी और कानूनी ऑडिट कराने की मांग की गई। संघ ने इन डिजिटल प्रणालियों पर अधिकारियों के नियंत्रण और उनकी जिम्मेदारियां स्पष्ट करने का अनुरोध किया। इसके साथ ही गोवा के 97 मतदाताओं से जुड़े मामलों की जांच कराने की मांग भी उठाई गई। ज्ञापन के अनुसार, कुछ मामलों में सॉफ्टवेयर या केंद्रीय व्यवस्था के कारण वैधानिक निर्वाचन अधिकारियों के निर्णय प्रभावी नहीं हो पाए। संघ ने ऐसे मामलों की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की। कदाचार साबित होने पर संवैधानिक कार्रवाई की मांग अधिवक्ता संघ ने ज्ञापन में कहा कि जांच के दौरान गंभीर कदाचार प्रमाणित होने पर संविधान और कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। संघ ने मुख्य चुनाव आयुक्त से स्वैच्छिक इस्तीफे की मांग की। साथ ही कहा कि यदि वह इस्तीफा नहीं देते हैं और जांच में पद से हटाने योग्य आधार सामने आते हैं, तो संसद के समक्ष निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत आवश्यक कदम उठाए जाएं।

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