SIR विवाद: 'रिटायरमेंट के दिन...', जस्टिस भुइयां के बयान से विपक्ष आक्रामक, कांग्रेस की बैठक
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच विवाद लगातार बढ़ रहा है। न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की मताधिकार से जुड़ी टिप्पणी के बाद कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर हमला तेज कर दिया है। कांग्रेस ने वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलाई है, जबकि दिल्ली और मुंबई में विरोध प्रदर्शन जारी हैं।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 5 अक्टूबर 2026
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर देश में सियासी घमासान लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बीच सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की मताधिकार को लेकर की गई टिप्पणी ने विपक्ष को चुनाव आयोग पर हमला तेज करने का नया आधार दे दिया है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठा रहे हैं और उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इसी मुद्दे पर कांग्रेस ने सोमवार शाम अपने महासचिवों, प्रदेश प्रभारियों और प्रदेश अध्यक्षों की बैठक बुलाई है।
मताधिकार से वंचित करना मनमानी : न्यायमूर्ति भुइयां
हैदराबाद स्थित नालसर विधि विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम के दौरान न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां ने मतदाताओं के अधिकार को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर लोगों को मतदान के अधिकार से वंचित करना मनमानी की श्रेणी में आता है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी मतदाता का नाम बिना सूचना और सुनवाई का अवसर दिए मतदाता सूची से नहीं हटाया जाना चाहिए।न्यायमूर्ति भुइयां की इस टिप्पणी को विपक्ष ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जोड़ते हुए बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि पुनरीक्षण की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की आशंका पैदा हुई है। हालांकि चुनाव आयोग लगातार प्रक्रिया को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करता रहा है।
कांग्रेस ने बुलाई अहम बैठक
कांग्रेस ने इस पूरे विवाद को लेकर सोमवार शाम चार बजे पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों की बैठक बुलाई है। बैठक में पार्टी के महासचिव, राज्यों के प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष शामिल होंगे। बैठक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण, चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी अभियान और आगे की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है।विपक्ष की ओर से मंगलवार को चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च निकालने की भी तैयारी है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। विपक्षी दल इस मुद्दे को लोकतांत्रिक अधिकारों और मतदाता अधिकारों से जोड़कर सरकार तथा चुनाव आयोग पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
जयराम रमेश ने साधा मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर निशाना
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की टिप्पणी को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बड़ा आधार बताया। उन्होंने दावा किया कि न्यायमूर्ति भुइयां ने मतदाताओं के अधिकार और मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण बात कही है।जयराम रमेश ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त से इस्तीफा देने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के मौजूदा कामकाज को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने अपने संवैधानिक दायित्वों और संविधान की मूल भावना का पालन नहीं किया है। कांग्रेस नेता ने यह भी दावा किया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त अपने पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार खो चुके हैं।
महुआ मोइत्रा ने न्यायमूर्ति भुइयां की तारीफ की
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति के दिन कोई न्यायाधीश साहस दिखाए, यह आसान हो सकता है, लेकिन किसी मौजूदा न्यायाधीश का सत्ता के सामने सच बोलना अलग तरह की मिसाल कायम करता है।महुआ मोइत्रा ने न्यायमूर्ति भुइयां की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। विपक्षी नेताओं की ओर से लगातार आ रही प्रतिक्रियाओं से साफ है कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण अब केवल चुनावी प्रक्रिया का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है।
दिल्ली में भी विपक्ष का प्रदर्शन
मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में विपक्षी दलों और विभिन्न संगठनों का प्रदर्शन जारी है। भारतीय युवा कांग्रेस ने जंतर-मंतर को फिर से प्रदर्शन स्थल के रूप में बहाल करने की मांग को लेकर मशाल जुलूस निकाला। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में कथित बदलावों को लेकर सवाल उठाए।आम आदमी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी दिल्ली में विरोध प्रदर्शन किया। इंडिया गेट के पास मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। पार्टी की ओर से दावा किया गया कि दिल्ली इकाई के प्रमुख सौरभ भारद्वाज समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।
भाजपा ने विपक्ष पर लगाया माहौल बिगाड़ने का आरोप
विरोध प्रदर्शनों के बीच भारतीय जनता पार्टी ने आम आदमी पार्टी और विपक्ष पर राजनीतिक माहौल खराब करने का आरोप लगाया। भाजपा की ओर से कहा गया कि विपक्षी दलों के प्रदर्शन से दिल्ली की कानून-व्यवस्था प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।दूसरी ओर विपक्षी दलों का कहना है कि उनका आंदोलन मतदाताओं के अधिकारों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की रक्षा के लिए है। योगेंद्र यादव और अन्य संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता भी लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने संकेत दिया है कि यह आंदोलन केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं है और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ उनकी मांग जारी रहेगी।
मुंबई में भी बड़ा विरोध प्रदर्शन
महाराष्ट्र में भी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्षी दलों ने विरोध प्रदर्शन किया। शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने भी राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को रद्द करने की मांग की।मुंबई में ठाकरे बंधुओं के नेतृत्व में निकाले गए विरोध मार्च में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। मार्च बाद में एक बड़ी रैली में बदल गया। इसमें कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शरद पवार गुट के कई वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए। विपक्षी दलों ने महाराष्ट्र में मतदाता सूची की प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां दोहराईं।
सर्वोच्च न्यायालय में भी सुनवाई
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली को लेकर उठे विवाद पर सर्वोच्च न्यायालय में भी सुनवाई होनी है। विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग की बैठकों का विवरण सार्वजनिक करने और पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग की गई है।इसके अलावा मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उनके पद से संबंधित कुछ कार्यों से अलग रखने की मांग भी सामने आई है। ऐसे में न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की टिप्पणी, विपक्ष के लगातार प्रदर्शन और सर्वोच्च न्यायालय में होने वाली सुनवाई के कारण यह पूरा विवाद आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक तथा कानूनी महत्व हासिल कर सकता है।
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