सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में खेल मैदान बदहाल:खिलाड़ी बोले- खुद काटते हैं घास, बाउंड्री वॉल टूटी, आती हैं गाड़ियां
सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय का खेल मैदान इन दिनों बदहाली से जूझ रहा है। मैदान में जगह-जगह गड्ढे हैं, ईंट-पत्थर पड़े हैं और घास व झाड़ियां उगी हुई हैं। खिलाड़ियों के अभ्यास के लिए मैदान को साफ करने और गड्ढे भरने का काम भी खिलाड़ी खुद कर रहे हैं। मैदान की बाउंड्री वॉल कई जगह से टूटी है, जिससे वाहनों की आवाजाही भी मैदान तक हो रही है। खिलाड़ियों का कहना है कि इससे अभ्यास के दौरान परेशानी होती है और चोट लगने का खतरा भी बना रहता है। खुद घास काटते हैं, गड्ढे भी भरते हैं मैदान में अभ्यास करने वाले खिलाड़ियों ने बताया कि विश्वविद्यालय की ओर से मैदान के रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। मैदान का जो हिस्सा थोड़ा साफ दिखाई देता है, उसे भी खिलाड़ी अपने स्तर पर साफ करते हैं। खिलाड़ियों के मुताबिक उन्हें खुद घास काटनी पड़ती है। मैदान में बने गड्ढों को भी फावड़े आदि से मिट्टी डालकर भरते हैं, ताकि वहां अभ्यास किया जा सके। एक खिलाड़ी ने बताया कि वह करीब दो साल से यहां अभ्यास कर रहे हैं। इस दौरान मैदान के रखरखाव के लिए विश्वविद्यालय की ओर से कोई खास व्यवस्था नहीं दिखाई दी। उन्होंने कहा कि पहले मैदान की स्थिति ठीक थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में हालत लगातार खराब हुई है। जून में मैदान की स्थिति और खराब थी तीरंदाजी का अभ्यास करने वाली छात्रा ने बताया कि जून में मैदान की स्थिति अभी से भी ज्यादा खराब थी। खिलाड़ियों ने मिलकर घास काटी, पत्ते हटाए और मैदान में बने गड्ढों को भरकर उसे अभ्यास के लायक बनाया। छात्रा के मुताबिक मैदान में वाहनों की आवाजाही भी होती है, जिससे अभ्यास प्रभावित होता है। उन्होंने बताया कि वाहनों को मैदान में आने से रोकने के लिए खिलाड़ियों ने खुद बांस लगाकर रास्ता बंद किया। खिलाड़ियों का कहना है कि मैदान को व्यवस्थित रखने के लिए उन्हें अपने स्तर पर ही काम करना पड़ रहा है। टूटी बाउंड्री से मैदान में पहुंचती हैं गाड़ियां खेल मैदान के आसपास बनी बाउंड्री वॉल कई जगह से टूटी हुई है। इसके कारण मैदान पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। खिलाड़ियों के अनुसार बाउंड्री टूटी होने से वाहन भी मैदान के अंदर तक पहुंच जाते हैं। अभ्यास के दौरान वाहनों की आवाजाही से खिलाड़ियों का ध्यान भटकता है और मैदान में पर्याप्त जगह भी नहीं मिलती। दर्शकों के बैठने की जगह भी जर्जर मैदान में दर्शकों के बैठने के लिए बनाई गई जगह भी जर्जर हालत में है। यहां बैठने की व्यवस्था खंडहर में तब्दील होती नजर आ रही है। मैदान के आसपास शौचालय की स्थिति भी खराब है। ऐसे में खिलाड़ियों के साथ-साथ प्रतियोगिताएं देखने आने वाले लोगों को भी परेशानी होती है। बाउंड्री वॉल के लिए करोड़ों का प्रावधान, फिर भी मैदान की दीवार टूटी विश्वविद्यालय की बाउंड्री वॉल निर्माण से कुल 8.08 करोड़ रुपए का बजट पास किया गया है। इसमें बाउंड्री वॉल के साथ रिटेनिंग वॉल, गेट और अन्य निर्माण कार्य शामिल हैं। अधिकारियों के मुताबिक बाउंड्री वॉल का काम पूरा हो चुका है। गेटा का निर्माण चल रहा है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)