संभल हिंसा- आरोपी गुलाम ने गवाह-साक्ष्य देने से मना किया:मुल्ला अफरोज ने बेगुनाही के लिए दी 11 गवाहों की सूची, 16 अक्टूबर को पेश होंगे गवाह
संभल में संभल हिंसा के बिलाल हत्याकांड में आरोपी गुलाम को मंगलवार को जिला न्यायाधीश डॉ. विदुषी सिंह की अदालत में पेश किया गया। उसे मुरादाबाद जेल से लाया गया था। सुनवाई के दौरान गुलाम ने अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए कोई गवाह या साक्ष्य पेश करने से इनकार कर दिया। वहीं, दूसरे आरोपी मुल्ला अफरोज ने बेगुनाही के लिए 11 गवाहों की सूची दी है। अदालत ने गवाहों को पेश करने के लिए 16 अक्टूबर की तारीख तय की है। गुलाम ने साक्ष्य देने से किया इनकार मामला संभल कोतवाली के अपराध संख्या 340/2024 से जुड़ा है। मंगलवार को धारा 351 बीएनएस (313 सीआरपीसी) के तहत सुनवाई पूरी होने के बाद मुल्ला अफरोज ने अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए समय मांगा और 11 गवाहों की सूची अदालत में दी। जिला शासकीय अधिवक्ता राहुल दीक्षित ने शाम 6:30 बजे बताया कि इस मामले में मुल्ला अफरोज और गुलाम आरोपी हैं। उनके मुताबिक, घटना का कथित मास्टरमाइंड शारिक साठा विदेश में छिपा हुआ है। सुनवाई के दौरान गुलाम की ओर से अधिवक्ता कमर हुसैन ने कोई साक्ष्य पेश करने से इनकार किया। अदालत ने गुलाम से भी उसकी बेगुनाही के संबंध में गवाह या साक्ष्य देने के बारे में पूछा, लेकिन उसने भी इनकार कर दिया। 9 अक्टूबर को दोनों ने एक-दूसरे को पहचानने से किया था इनकार बीती 9 अक्टूबर को अदालत में पेशी के दौरान मुल्ला अफरोज और गुलाम ने एक-दूसरे को पहचानने से इनकार किया था। दोनों ने खुद को निर्दोष बताते हुए पुलिस पर झूठा फंसाने का आरोप लगाया था। अदालत ने उस समय दोनों को अपने बचाव में साक्ष्य पेश करने के लिए समय दिया था। मंगलवार को गुलाम ने कोई गवाह या साक्ष्य देने से इनकार कर दिया, जबकि मुल्ला अफरोज ने 11 गवाहों की सूची दी। मुल्ला अफरोज पर NSA रद्द करने का सुप्रीम कोर्ट का आदेश बीती 29 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने मुल्ला अफरोज पर लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) को रद्द कर दिया था। साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया था। अदालत ने आदेश दिया था कि एक महीने के भीतर याचिकाकर्ता को मुआवजे की रकम दी जाए। जामा मस्जिद सर्वे के दौरान भड़की थी हिंसा 19 नवंबर 2024 को हिंदू पक्ष ने संभल की शाही जामा मस्जिद को श्रीहरिहर मंदिर होने का दावा करते हुए सिविल सीनियर डिवीजन कोर्ट, चंदौसी में याचिका दायर की थी। अदालत के आदेश पर उसी दिन शाम को पहले चरण का सर्वे हुआ। दूसरा चरण 24 नवंबर 2024 को किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए और सर्वे के दौरान हिंसा भड़क गई। पुलिस के मुताबिक, पथराव और फायरिंग की घटना में पांच लोगों की मौत हुई थी। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई, एएसपी अनुज चौधरी और डिप्टी कलेक्टर समेत 29 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। हिंसा के मामले में कई लोगों पर दर्ज हुईं FIR संभल कोतवाली और नखासा थाने में कुल 12 एफआईआर दर्ज की गई थीं। इनमें सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क और सपा विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल समेत कई लोगों को नामजद किया गया था। 2,750 से अधिक लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए। चार्जशीट में साक्ष्यों के आधार पर विधायक के बेटे का नाम हटा दिया गया था। जामा मस्जिद के सदर जफर अली एडवोकेट सहित 158 आरोपियों को जेल भेजा गया था। इनमें तीन महिलाएं और शारिक साठा के कथित सहयोगी मुल्ला अफरोज, वारिस और गुलाम भी शामिल हैं। अक्टूबर 2025 में मुल्ला अफरोज पर NSA लगाया गया था। इसके बाद वारिस और गुलाम पर भी इसी कानून के तहत कार्रवाई की गई। पुलिस के मुताबिक, शारिक साठा के खिलाफ रेड कॉर्नर और लुकआउट नोटिस जारी हो चुका है।
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