संभल हिंसा के आरोपी बिलाल हत्याकांड में कोर्ट में पेश:मुल्ला अफरोज और गुलाम ने खुद को बताया बेगुनाह, साक्ष्य पेश करने के लिए मांगा समय
संभल हिंसा से जुड़े बिलाल हत्याकांड मामले में आरोपी मुल्ला अफरोज और गुलाम ने शुक्रवार को जिला न्यायालय में पेश होकर खुद को बेगुनाह बताया। दोनों ने अपने बचाव में साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए कोर्ट से समय मांगा। जिला शासकीय अधिवक्ता राहुल दीक्षित के मुताबिक, अदालत ने दोनों को साक्ष्य पेश करने के लिए समय देते हुए अगली सुनवाई की तारीख 12 अक्टूबर तय की है। शुक्रवार को संभल जिला मुख्यालय से करीब 18 किलोमीटर दूर स्थित जिला न्यायालय में संभल कोतवाली के अपराध संख्या 340/2024 से जुड़े बिलाल हत्याकांड मामले में सुनवाई हुई। जिला न्यायाधीश डॉ. विदुषी सिंह की अदालत में धारा 351 बीएनएस (313 सीआरपीसी) के तहत सुनवाई के दौरान मुल्ला अफरोज घर से पेशी पर पहुंचा, जबकि गुलाम को मुरादाबाद जेल से लाया गया। जिला शासकीय अधिवक्ता राहुल दीक्षित ने बताया कि दोनों आरोपियों ने एक-दूसरे को पहचानने से इनकार किया और पुलिस पर झूठे मुकदमे में फंसाने का आरोप लगाया। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि दोनों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य हैं। गिरफ्तारी की तारीख को लेकर भी अलग-अलग दावे अभियोजन पक्ष के अनुसार, मुल्ला अफरोज ने अपनी गिरफ्तारी की तारीख 17 जनवरी 2025 बताई, जबकि पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक उसे 18 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया गया था। अफरोज ने दावा किया कि पुलिस ने उसे शहबाजपुर मोहल्ले में सादान जनरल स्टोर से गिरफ्तार किया था। जिला शासकीय अधिवक्ता ने कहा कि बिलाल की हत्या के मामले में पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। 12 अक्टूबर को साक्ष्यों के आधार पर आगे की बहस और कार्रवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने मुल्ला अफरोज पर लगा NSA रद्द किया बीती 29 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने मुल्ला अफरोज की याचिका पर सुनवाई करते हुए उस पर लगाया गया राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) रद्द कर दिया था। साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। आदेश के मुताबिक, सरकार को एक महीने के भीतर याचिकाकर्ता को मुआवजे की रकम देनी होगी। मस्जिद सर्वे के दौरान भड़की थी हिंसा 19 नवंबर 2024 को हिंदू पक्ष की ओर से चंदौसी की सिविल सीनियर डिवीजन कोर्ट में संभल की शाही जामा मस्जिद को श्रीहरिहर मंदिर होने का दावा करते हुए याचिका दाखिल की गई थी। कोर्ट के आदेश पर उसी दिन मस्जिद का पहले चरण का सर्वे हुआ। दूसरा सर्वे 24 नवंबर को किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग जुट गए और सर्वे का विरोध करते हुए हिंसा भड़क गई। इस दौरान पुलिस पर पथराव और फायरिंग की घटना हुई, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई, एएसपी अनुज चौधरी और डिप्टी कलेक्टर समेत 29 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। 12 एफआईआर दर्ज, 2750 से अधिक लोगों पर मुकदमा हिंसा के मामले में संभल कोतवाली और नखासा थाने में कुल 12 एफआईआर दर्ज की गईं। इनमें सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क और सपा विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल समेत कई लोगों को नामजद किया गया। 2750 से अधिक लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। बाद में साक्ष्यों के आधार पर चार्जशीट से विधायक के बेटे का नाम निकाल दिया गया। जामा मस्जिद के सदर जफर अली एडवोकेट समेत 158 आरोपियों को जेल भेजा गया था। इनमें तीन महिलाएं और कथित तौर पर फरार गैंगस्टर शारिक साठा के तीन गुर्गे मुल्ला अफरोज, वारिस और गुलाम भी शामिल बताए गए। मुल्ला अफरोज पर अक्टूबर 2025 में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगाया गया था। इसके बाद वारिस और गुलाम पर भी NSA की कार्रवाई की गई। शारिक साठा के खिलाफ रेड कॉर्नर लुकआउट नोटिस जारी होने की जानकारी भी दी गई है। अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी। फिलहाल दोनों आरोपियों को अपने बचाव में साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया है।
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