संभल हिंसा के बिलाल हत्याकांड में सुनवाई:मुल्ला अफरोज ने दी 11 गवाहों की सूची, गुलाम की ओर से पेश नहीं हुए साक्ष्य

Oct 12, 2026 - 20:02
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संभल हिंसा के बिलाल हत्याकांड में सुनवाई:मुल्ला अफरोज ने दी 11 गवाहों की सूची, गुलाम की ओर से पेश नहीं हुए साक्ष्य
संभल हिंसा के दौरान हुए बिलाल हत्याकांड मामले में आरोपी मुल्ला अफरोज की ओर से सोमवार को जिला न्यायालय में बचाव पक्ष के 11 गवाहों की सूची दाखिल की गई। वहीं, मुरादाबाद जिला कारागार में बंद दूसरे आरोपी गुलाम को कोर्ट में पेश नहीं किया गया। गुलाम की ओर से भी बचाव में गवाहों की सूची या साक्ष्य दाखिल नहीं किए गए। मामले में अगली सुनवाई मंगलवार, 13 अक्टूबर को होगी। जिला न्यायाधीश डॉ. विदुषी सिंह की अदालत में संभल कोतवाली के अपराध संख्या 340/2024 से जुड़े बिलाल हत्याकांड की सुनवाई हुई। मामले में मुल्ला अफरोज और गुलाम आरोपी हैं। सुनवाई के दौरान मुल्ला अफरोज के अधिवक्ता आसिफ अख्तर ने बचाव पक्ष की ओर से गवाहों की सूची और कुछ दस्तावेज दाखिल किए। उन्होंने अदालत से आगे की तैयारी के लिए समय भी मांगा। जिला शासकीय अधिवक्ता राहुल दीक्षित ने बताया कि मुल्ला अफरोज की ओर से 11 गवाहों की सूची दाखिल की गई है। हालांकि, मुल्ला अफरोज खुद सोमवार को अदालत में पेश नहीं हुआ। गुलाम की ओर से नहीं दिए गए साक्ष्य सुनवाई के दौरान गुलाम को मुरादाबाद जिला कारागार से अदालत नहीं लाया गया। जिला शासकीय अधिवक्ता के मुताबिक, गुलाम की ओर से कोई अधिवक्ता भी पेश नहीं हुआ और न ही बचाव पक्ष के गवाहों या साक्ष्यों की सूची दाखिल की गई। अदालत ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 13 अक्टूबर की तारीख तय की है। पिछली सुनवाई में दोनों ने आरोपों से किया था इनकार बीती 9 अक्टूबर को अदालत में पेशी के दौरान मुल्ला अफरोज और गुलाम ने एक-दूसरे को पहचानने से इनकार किया था। दोनों ने खुद को निर्दोष बताते हुए पुलिस पर झूठा फंसाने का आरोप लगाया था। इसके बाद अदालत ने बचाव पक्ष को अपने साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए सोमवार की तारीख दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने मुल्ला अफरोज पर लगा NSA रद्द किया 29 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने मुल्ला अफरोज पर लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) को रद्द कर दिया था। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया और आदेश के एक महीने के भीतर याचिकाकर्ता को मुआवजे की रकम देने का निर्देश दिया था। नवंबर 2024 की हिंसा में पांच लोगों की हुई थी मौत 19 नवंबर 2024 को संभल की शाही जामा मस्जिद को श्रीहरिहर मंदिर होने का दावा करते हुए चंदौसी की सिविल सीनियर डिवीजन अदालत में याचिका दाखिल की गई थी। अदालत के आदेश पर उसी दिन मस्जिद परिसर का पहला सर्वे हुआ, जबकि दूसरा सर्वे 24 नवंबर को किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए और हिंसा भड़क गई। पथराव और गोलीबारी की घटनाओं में पांच लोगों की मौत हुई थी। पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई, एएसपी अनुज चौधरी और डिप्टी कलेक्टर समेत 29 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। घटना के बाद संभल कोतवाली और नखासा थाने में कुल 12 एफआईआर दर्ज की गई थीं। पुलिस ने कई लोगों को नामजद करते हुए 2,750 से अधिक लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए थे। मामले में गिरफ्तार आरोपियों में जामा मस्जिद के सदर जफर अली और अन्य लोग भी शामिल रहे हैं।

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