सरयू नदी खतरा बिंदु से 30 सेमी ऊपर बह रही:24 घंटे में 25 सेमी घटा जलस्तर, तटवर्ती गांवों में घुसा बाढ़ का पानी
सरयू नदी का जलस्तर अब घटने के बाद भी बाढ़ के पानी को लेकर जन जीवन प्रभावित होने लगा है। बीते 24 घंटे में 25 सेमी की कमी दर्ज की गई, फिर भी जलस्तर खतरा बिंदु 69.90 मीटर से 30 सेमी ऊपर बह रहा है। क्षेत्र के पतनई, गौरीडीह, बहादुरपुर सहित दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है और सड़कों पर पानी बहने के साथ-साथ संबंधित गांवों की सिवान की फसल जलमग्न हो गई है। वहीं दोहरीघाट नगर पंचायत के तीन वार्डो में बाढ़ का पानी घुस गया है। जिससे नागरिकों को दुश्वारियां झेलनी पड़ रही है। जलस्तर घटने के बावजूद बाढ़ से जुड़ी दुश्वारियां कम नहीं हुई हैं। कहीं लोग जलभराव से परेशान हैं तो कहीं संपर्क मार्गों पर पानी जमा होने से आवागमन प्रभावित है। निचले खेतों में पानी भरा होने से फसलों के सड़ने और पशुओं के चारे की समस्या भी बनी हुई है। सरयू नदी के जलस्तर पर नजर डालें तो गौरीशंकर घाट पर शुक्रवार को 70.45 मीटर पर स्थिर थी। जो शनिवार को घटकर 70.20 मीटर पर पहुंच गया। हालांकि जलस्तर बढ़ने से सरयू नदी काफी चौड़ी दिखाई पड़ने लगी है और किनारे के क्षेत्रों में पानी का फैलाव बढ़ गया है। दोहरीघाट क्षेत्र में नदी के किनारे स्थित धान की फसलें पानी में काफी डूबी हुई दिखाई दे रही हैं। हजारों एकड़ फसल प्रभावित होने का अनुमान वहीं फैलते बाढ़ के पानी से तटवर्ती गांव चारों तरफ से घिरते जा रहे है और पानी गौरीडीह, पतनई, बहादूरपुर समेत अन्य गांवों के आबादी के काफी नजदीक पहुंच गया है। इससे ग्रामीणों में चिंता बढ़ी है। ग्रामीण बाढ़ को देखते हुए विशेष सावधानी बरत रहे हैं। वहीं प्रशासन की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। सबसे विकराल स्थिति पतनई गांव में हो गई है। गांव बाढ़ के पानी से घिर गया है और सड़कों पर घुटनो तक पानी चढ़ गया है। जिससे ग्रामीणों को आने जाने में भारी दिक्कतें हो रहीं है। बाढ़ से सबसे अधिक नुकसान किसानों को उठाना पड़ रहा है। खेतों में खड़ी धान, मक्का, गन्ना, केला और सब्जियों की फसलें पानी में डूब गई हैं। हजारों एकड़ फसल प्रभावित होने का अनुमान है। पानी लंबे समय तक खेतों में जमा रहने से फसल के सड़ने की आशंका भी बढ़ गई है। बाढ़ का पानी रिहायशी इलाकों तक पहुंचने से बड़ी संख्या में परिवारों को घर छोड़ना पड़ा है। कई परिवार ऊंचे स्थानों और रिश्तेदारों के यहां शरण लिए हुए हैं। जिन इलाकों में पानी अभी घरों में बना हुआ है। वहां लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह प्रभावित हो गई है। वहीं बाढ़ में इंसानों के साथ पशुधन पर भी संकट है। चारा उपलब्ध नहीं होने और लंबे समय तक पानी में रहने से मवेशियों के बीमार पड़ने का खतरा बढ़ गया है। पशुपालक सूखा भूसा और हरे चारे के लिए परेशान हैं।
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