सुलतानपुर में दुर्गा पूजा डीजे प्रतियोगिता पर हाईकोर्ट सख्त:ध्वनि प्रदूषण के नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई, अधिकारियों को दिए निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सुलतानपुर में दुर्गा पूजा के दौरान बड़े पैमाने पर आयोजित की जा रही डीजे प्रतियोगिताओं में तेज आवाज में संगीत बजाए जाने की आशंका पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि प्रतियोगिताओं के दौरान ध्वनि प्रदूषण के निर्धारित मानकों का हर हाल में पालन सुनिश्चित कराया जाए। नियमों का उल्लंघन होने पर गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय व न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने राघवेंद्र प्रताप सिंह की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर पारित किया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ प्राधिकरणों की जिम्मेदारी होगी न्यायालय ने कहा कि दुर्गा पूजा समारोह के आयोजन पर किसी को आपत्ति नहीं हो सकती, लेकिन यदि प्रतियोगिता में निर्धारित डेसिबल सीमा से अधिक आवाज में संगीत बजाया जाता है और इसमें दूसरे जिलों के डीजे भी शामिल होते हैं, तो संबंधित अधिकारियों को इस पहलू पर ध्यान देना होगा। इसमें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समेत अन्य संबंधित प्राधिकरणों की भी जिम्मेदारी होगी। डीजे का विवरण जिला प्रशासन को सुरक्षित रखना होगा न्यायालय ने जिला अधिकारी सुल्तानपुर वा सभी विपक्षी पक्षों को निर्देश दिया कि वे सुनिश्चित करें कि डीजे प्रतियोगिताओं में ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 तथा पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत लागू अन्य नियमों के अनुसार ही ध्वनि का स्तर रखा जाए। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी डीजे का विवरण जिला प्रशासन को सुरक्षित रखना होगा। निर्धारित सीमा का उल्लंघन करने वालों की जवाबदेही तय कर उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। न्यायालय ने सुलतानपुर के जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, संबंधित विपक्षी पक्षकारों को अगली सुनवाई से पहले अलग-अलग शपथपत्र दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया है कि आदेश का पालन किस प्रकार सुनिश्चित किया गया। शपथपत्र में संबंधित व्यक्तियों और डीजे संचालकों के अनुपालन का विवरण भी देना होगा। नियमों का उल्लंघन होने पर अधिकारियों की जवाबदेही न्यायालय ने संबंधित थानों के प्रभारियों और उपजिलाधिकारियों को भी नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए जिम्मेदार बनाने का निर्देश दिया है। नियमों का उल्लंघन होने पर उनकी जवाबदेही भी तय की जाएगी। न्यायालय ने सरकारी अधिवक्ता को आदेश संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने को कहा है।
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