सुल्तानपुर में फर्जी अस्पताल के 2 संचालक भेजे गए जेल:पुलिस पर आरोप, भीड़ ने जिस ऑपरेशन करने वाले को पीटा उसे छोड़ा गया
सुल्तानपुर के चांदा में अवैध रूप से चल रहे हॉस्पिटल के विरुद्ध पहली बार स्थानीय पुलिस कार्रवाई की हिम्मत जुटा सकी। साल भर पूर्व दर्ज केस में जो पुलिस कोर्ट में चार्जशीट नहीं भेज सकी थी उसने रविवार को संचालक समेत दो आरोपियों को जेल भेजा दिया। लेकिन यहां भी पुलिस अपनी कार्यशैली से सवालों के घेरे में आ गई है। वो यू कि ऑपरेशन करने वाले जिस वीके शर्मा को पब्लिक ने डायल 112 की गाड़ी में पीटा था वो हिरासत से छोड़ दिया गया। जबकि सीएचसी अधीक्षक की तहरीर पर दर्ज केस में वो तीसरा आरोपी है। दरअसल, चांदा कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत कस्बे में न्यू आयुषी पॉली क्लीनिक में बीते शुक्रवार को इलाज के दौरान लापरवाही बरते जाने से एक नवजात की मौत हो गई थी। वहीं कस्बा निवासी प्रसूता अंजली निषाद की मां राजकुमारी ने बेटी का यूटरस निकालने का आरोप लगाया था। परिजनों ने हंगामा काटा और ऑपरेशन करने आए वीके शुक्ला की जमकर धुनाई किया, जिसका वीडियो-फोटो सोशल मीडिया पर सामने आया। पुलिस जहां इन्हें पहले ही साथ लेकर गई वहीं एडीशनल सीएमओ डॉ. जेसी सरोज के जांच के बाद अस्पताल सील किया गया और आरोपी संचालक डीके यादव व रंजना यादव को पुलिस साथ लेकर गई। शनिवार को प्रसूता की मां व सीएचसी अधीक्षक आरसी यादव की तहरीरों पर दो केस दर्ज हुए। इसके बाद पुलिस ने रविवार को डीके यादव व रंजना यादव को तो कोर्ट में पेश किया लेकिन वीके शुक्ला को चालान की कार्रवाई से बचा लिया। ग्रामीणों व परिजनों ने पुलिस पर मैनेजमेंट का आरोप लगाया है। बीते 30 सितंबर 2025 को भी इसी अस्पताल को जो आयुषी पॉली क्लीनिक के नाम से चल रहा था उसे सील किया गया था। 1 अक्टूबर 2025 को केस दर्ज हुआ और 365 दिन के बाद भी कोर्ट में पुलिस चार्ज शीट नहीं जमा कर सकी। हालांकि सीओ लंभुआ ऋतिक कपूर ने बताया केस दर्ज कर विवेचना प्रचलित है। जल्द ही साक्षय के आधार पर अग्रिम विधिक कार्रवाई की जाएगी।
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