सुप्रीम-कोर्ट ने 3IPS अधिकारियों के खिलाफ जांच के दिए आदेश:मऊ में 10 साल से लापता सचिन मौर्य के मामले में लापरवाही का आरोप
मऊ के सरायलखंसी थाना क्षेत्र के बुढ़ावे गांव से वर्ष 2017 में कोचिंग जाने के लिए घर से निकला किशोर सचिन मौर्य आज तक लापता है। करीब एक दशक बीतने के बाद भी उसका पता नहीं चलने से परिवार परेशान है। परिजनों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने मामले में जिले में तैनात रह चुके तीन आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। इनमें अविनाश पांडे और इलमारन जी. के नाम बताए गए हैं। वहीं, कुछ दिन पहले जिले के एसपी रह चुके कमलेश बहादुर भी अदालत के सामने पेश हुए थे। कोचिंग जाने के लिए निकला था सचिन, फिर नहीं लौटा सचिन के पिता वीरेंद्र मौर्य ने बताया कि साल 2017 में उनका बेटा पहसा स्थित कोचिंग सेंटर जाने के लिए घर से निकला था। निर्धारित समय तक घर नहीं लौटने पर परिजनों को चिंता हुई। इसके बाद परिवार के लोग कोचिंग सेंटर पहुंचे और सचिन के बारे में जानकारी की। वहां पता चला कि वह कोचिंग पहुंचा ही नहीं था। इसके बाद परिजनों ने अपहरण की आशंका जताते हुए पुलिस को सूचना दी और प्राथमिकी दर्ज कराई। परिवार को उम्मीद थी कि पुलिस जल्द ही सचिन का पता लगा लेगी, लेकिन काफी समय बीतने के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं मिला। पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर उठाए सवाल वीरेंद्र मौर्य का आरोप है कि मामले की शुरुआती जांच के दौरान पुलिस ने उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया। उनका कहना है कि बेटे के लापता होने के बाद से ही उन्हें अपहरण की आशंका थी, लेकिन जांच में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई गई। बेटे की तलाश और न्याय की मांग को लेकर उन्होंने पहले हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। पिता के अनुसार, मामले में 54 गवाहों की गवाही से जुड़ा मुद्दा भी सामने आया। उनका कहना है कि जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और गवाही से जुड़े पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। परिजनों के मुताबिक, मामले में पूर्व में जिले में तैनात रहे आईपीएस अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे हैं और सुप्रीम कोर्ट ने जांच के आदेश दिए हैं। पिता बोले- हमें मुकदमा और जेल नहीं, अपना बच्चा चाहिए वर्षों से बेटे की तलाश कर रहे वीरेंद्र मौर्य का कहना है कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण सचिन की बरामदगी है। उन्होंने कहा कि आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी हो सकती है, लेकिन परिवार की पहली प्राथमिकता बेटे का पता लगाना है। उन्होंने कहा, "हमें सिर्फ मुकदमा और जेल नहीं चाहिए, हमें हमारा बच्चा चाहिए।" पिता का कहना है कि वह लगातार अपने बेटे की तलाश में न्याय के लिए प्रयास कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई से उन्हें उम्मीद जगी है कि मामले में उठे सवालों की जांच होगी और सचिन का पता लगाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। पुरानी रंजिश की भी जताई आशंका वीरेंद्र मौर्य ने गांव में पहले से चली आ रही रंजिश का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में एक अन्य मामले में उन्हें जेल जाना पड़ा था। उनका आरोप है कि पुरानी रंजिश के बाद उनके परिवार के साथ तनाव और घटनाक्रम बढ़े। हालांकि, पुरानी रंजिश और सचिन के लापता होने के बीच किसी संबंध की पुष्टि जांच से जुड़े तथ्यों के आधार पर ही की जा सकती है। आज भी बेटे के लौटने का इंतजार सचिन के लापता होने के करीब 10 वर्ष बाद भी परिवार को उसके लौटने की उम्मीद है। वीरेंद्र मौर्य का कहना है कि उन्हें अब तक ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है, जिसके आधार पर वह बेटे के जीवित होने की उम्मीद छोड़ दें। वह चाहते हैं कि पुलिस मामले की गंभीरता से जांच करे और सचिन का पता लगाने के लिए ठोस प्रयास किए जाएं। पिता के लिए यह केवल कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि अपने बेटे को वापस पाने की वर्षों पुरानी उम्मीद है। न्यायिक कार्रवाई से उन्हें राहत की आस जरूर बंधी है, लेकिन परिवार की प्रतीक्षा तब तक खत्म नहीं होगी, जब तक सचिन का पता नहीं चल जाता।
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