स्वतंत्र भारद्वाज को मिली अंतरिम जमानत, कब आएगा जेल से बाहर
जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान संजय कुमार पर हमला करने के आरोप में गिरफ्तार स्वतंत्र भारद्वाज को पटियाला हाउस कोर्ट ने तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत दी है। अदालत ने 14 सितंबर को सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा था।
दि राइजिंग न्यूज | नई दिल्ली | 15 सितंबर 2026
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान संजय कुमार पर हमला करने के आरोप में गिरफ्तार स्वतंत्र भारद्वाज को पटियाला हाउस कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालर की अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद उन्हें तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत देने का आदेश दिया। स्वतंत्र भारद्वाज ने अदालत में नियमित जमानत के लिए याचिका दाखिल की थी, लेकिन फिलहाल अदालत ने सीमित अवधि के लिए राहत दी है।
अदालत ने तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत दी
पटियाला हाउस कोर्ट ने स्वतंत्र भारद्वाज की जमानत याचिका पर 14 सितंबर को सुनवाई की थी। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब अदालत ने उन्हें तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत देने का फैसला सुनाया है। हालांकि, जेल से उनकी वास्तविक रिहाई जमानत की शर्तें पूरी होने और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
संजय कुमार पर हमला करने का आरोप
स्वतंत्र भारद्वाज पर आरोप है कि उन्होंने विरोध प्रदर्शन के दौरान संजय कुमार पर कड़े से हमला किया था। बाद में एक बातचीत कार्यक्रम में स्वतंत्र भारद्वाज ने कथित तौर पर खुद हमला करने की बात कही थी। उन्होंने दावा किया था कि हमले में संजय कुमार के सिर पर गंभीर चोट आई और उन्हें कई टांके लगाए गए। इसी मामले में पुलिस ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी।
भारद्वाज ने राजनीतिक साजिश का लगाया आरोप
जमानत की सुनवाई के दौरान स्वतंत्र भारद्वाज की ओर से अदालत में कई दलीलें रखी गईं। उनके पक्ष ने दावा किया कि उनके खिलाफ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कानून तथा बच्चों से संबंधित यौन अपराधों से संरक्षण कानून की धाराएं जोड़ना और बाद में गिरफ्तारी करना राजनीतिक कारणों से प्रभावित है। बचाव पक्ष ने गिरफ्तारी और मामले में लगाई गई गंभीर धाराओं पर भी सवाल उठाए।
पांच सितंबर को बुलंदशहर से हुई थी गिरफ्तारी
दिल्ली पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से पांच सितंबर को गिरफ्तार किया था। इससे पहले उनके द्वारा कथित तौर पर दिए गए बयान से जुड़ा बातचीत कार्यक्रम सामाजिक माध्यमों पर तेजी से प्रसारित हुआ था। इसके बाद संजय कुमार की बेटी ने एक वीडियो जारी कर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मदद की अपील की थी।
राजनीतिक नेताओं ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की थी
मामला सामने आने के बाद कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ कई राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि संसद मार्ग थाने पहुंचे थे। इस दौरान पुलिस से स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में गंभीर धाराएं जोड़ने की मांग की गई थी। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कानून तथा बच्चों से संबंधित यौन अपराधों से संरक्षण कानून के तहत कार्रवाई की मांग भी उठाई गई थी।
पहली प्राथमिकी में कौन सी धाराएं लगी थीं
संजय कुमार पर हमले के मामले में दर्ज शुरुआती प्राथमिकी में स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 115(2) और 126(2) के तहत मामला दर्ज किया गया था। बाद में कथित वीडियो और सामने आए अन्य तथ्यों के आधार पर पुलिस ने मामले में अतिरिक्त गंभीर धाराएं जोड़ीं। पुलिस ने यह भी कहा था कि संजय कुमार की दोबारा हुई चिकित्सकीय जांच के आधार पर यह तय किया जाएगा कि मामले में हत्या के प्रयास की धारा जोड़ी जानी है या नहीं।
गिरफ्तारी के खिलाफ उच्च न्यायालय भी पहुंचे थे
स्वतंत्र भारद्वाज के वकील ने उनकी गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की थी। अदालत ने इस याचिका पर सुनवाई के बाद उसे खारिज कर दिया था। इसके बाद स्वतंत्र भारद्वाज न्यायिक हिरासत में रहे। अब पटियाला हाउस कोर्ट से तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत मिलने के बाद उन्हें अस्थायी राहत मिली है।
कब जेल से बाहर आएंगे स्वतंत्र भारद्वाज
अदालत से अंतरिम जमानत मिलने का अर्थ यह है कि स्वतंत्र भारद्वाज को तीन सप्ताह के लिए हिरासत से बाहर आने की अनुमति मिल सकती है। हालांकि इसके लिए अदालत द्वारा तय जमानत की शर्तों और अन्य आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करना होगा। इसलिए आदेश के तुरंत बाद रिहाई होना जरूरी नहीं है। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही जेल प्रशासन उनकी रिहाई की कार्रवाई करेगा।
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