EC को ममता बनर्जी ने रात में ही दे दिया जवाब, TMC के लिए नाम भी सौंपे
चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के बाद ममता बनर्जी ने गुरुवार रात ही जवाब भेजकर तृणमूल कांग्रेस के लिए तीन पसंदीदा नाम और चुनाव चिह्न सौंपे। आयोग ने दोनों गुटों को नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव में मौजूदा पार्टी नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न इस्तेमाल करने से रोक दिया है।
दि राइजिंग न्यूज | पश्चिम बंगाल | 18 सितंबर 2026
उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश से पार्टी में विवाद बढ़ गया है। आयोग के निर्देश के बाद ममता बनर्जी ने गुरुवार देर रात ही अपना जवाब भेज दिया। उन्होंने पार्टी के लिए अपनी पसंद के तीन नाम और चुनाव चिह्न आयोग को सौंपे हैं।चुनाव आयोग ने नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव में दोनों गुटों को तृणमूल कांग्रेस के मौजूदा नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल से रोक दिया है। दोनों पक्षों से अलग नाम और चुनाव चिह्न देने को कहा गया है। अब इस मामले में चुनाव आयोग के अगले फैसले पर सभी की नजरें टिकी हैं।
चुनाव आयोग के आदेश के बाद ममता ने रात में ही भेजा जवाब
तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के बाद पार्टी संस्थापक ममता बनर्जी ने गुरुवार रात ही अपना जवाब भेज दिया। रिपोर्ट के अनुसार, ममता बनर्जी की ओर से रात 11 बजकर 36 मिनट पर आयोग को जवाब दिया गया। इसमें उन्होंने पार्टी के लिए तीन पसंदीदा नाम और चुनाव चिह्न बताए हैं।चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा क्षेत्रों में होने वाले उपचुनाव को लेकर यह अंतरिम व्यवस्था लागू की है। आयोग ने दोनों गुटों को मौजूदा पार्टी नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न का इस्तेमाल नहीं करने का निर्देश दिया है। दोनों पक्षों से अपनी पसंद के अलग नाम और चुनाव चिह्न बताने को कहा गया था।
टीएमसी के नाम और चुनाव चिह्न पर रोक
चुनाव आयोग ने अपने अंतरिम आदेश में कहा है कि फिलहाल ममता बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले दोनों गुट तृणमूल कांग्रेस के नाम का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। इसी तरह पार्टी के लिए आरक्षित ‘फूल और घास’ वाले चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई गई है।आयोग के मुताबिक दोनों गुटों के बीच पार्टी के नाम, संगठन और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद है। दोनों पक्ष खुद को असली तृणमूल कांग्रेस बताते हैं। इसी कारण आयोग ने अंतिम निर्णय होने तक उपचुनाव के लिए अंतरिम व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है।
दोनों गुटों को अलग नाम और अलग चुनाव चिह्न मिलेगा
चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को अपनी पसंद के नाम और चुनाव चिह्न बताने का अवसर दिया है। आयोग की ओर से कहा गया है कि दोनों पक्ष उपचुनाव के लिए अलग नाम चुन सकते हैं और आयोग की ओर से अधिसूचित मुक्त चुनाव चिह्नों में से अपनी पसंद का चिह्न मांग सकते हैं।इस व्यवस्था का उद्देश्य दोनों गुटों को उपचुनाव में अलग पहचान देना है, ताकि मतपत्र पर पार्टी के नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न को लेकर भ्रम की स्थिति न बने। यह व्यवस्था फिलहाल संबंधित उपचुनावों तक अंतरिम रूप में लागू रहेगी।
बागी गुट ने आयोग के फैसले का किया स्वागत
चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश का बागी गुट ने स्वागत किया है। इस गुट की ओर से कहा गया है कि वह आयोग के निर्देशों का पालन करेगा और अलग नाम तथा चुनाव चिह्न के साथ उपचुनाव में उतरेगा।बागी पक्ष की ओर से यह भी दावा किया गया है कि पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर अंतिम फैसला चुनाव आयोग को करना है। दोनों गुटों के बीच संगठन पर नियंत्रण और असली तृणमूल कांग्रेस होने का दावा पहले से ही विवाद का विषय बना हुआ है।
1998 से टीएमसी की पहचान रहा है चुनाव चिह्न
तृणमूल कांग्रेस के लिए उसका पारंपरिक चुनाव चिह्न लंबे समय से पार्टी की पहचान का हिस्सा रहा है। वर्ष 1998 में पार्टी की स्थापना के बाद से ही यह चिह्न चुनावों में तृणमूल कांग्रेस के साथ जुड़ा रहा है।ऐसे में उपचुनाव के दौरान दोनों गुटों को इस आरक्षित चुनाव चिह्न का इस्तेमाल नहीं करने का आयोग का निर्देश पार्टी के भीतर चल रहे विवाद को और महत्वपूर्ण बना देता है। फिलहाल दोनों पक्षों को अलग पहचान के साथ चुनाव मैदान में उतरना होगा।
आयोग ने कहा- मामले पर लेना होगा ठोस फैसला
चुनाव आयोग ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड और दोनों पक्षों के दावों पर विचार करने के बाद उसे तृणमूल कांग्रेस में दो विरोधी गुट दिखाई दे रहे हैं। एक गुट का नेतृत्व ममता बनर्जी कर रही हैं, जबकि दूसरे गुट का नेतृत्व अरूप रॉय से जुड़ा बताया गया है।आयोग ने यह भी कहा कि जब दोनों पक्ष खुद को असली तृणमूल कांग्रेस बता रहे हैं, तब पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर ठोस निर्णय लेना जरूरी है। इस मामले में चुनाव चिह्न आवंटन संबंधी वर्ष 1968 के प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
विधानसभा चुनाव के बाद बढ़ा पार्टी के भीतर विवाद
तृणमूल कांग्रेस में यह विवाद पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद सामने आया। पार्टी के भीतर सांसदों और विधायकों के एक वर्ग ने अलग रुख अपनाया और संगठन पर नियंत्रण को लेकर विवाद बढ़ गया। इसके बाद दोनों पक्षों ने पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अपना दावा पेश किया।ममता बनर्जी के गुट की ओर से बागी विधायकों के खिलाफ विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष अयोग्यता संबंधी कार्रवाई की मांग की गई है। इस मामले से जुड़े विवाद को लेकर न्यायिक स्तर पर भी मामला चल रहा है। दूसरी ओर, बागी गुट बहुमत के आधार पर अपने दावे को मजबूत बताता रहा है।
नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव से पहले बड़ा फैसला
चुनाव आयोग का यह अंतरिम आदेश ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर छह अक्टूबर को उपचुनाव होना है। दोनों गुटों ने इन चुनावों के लिए अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं और पार्टी की पहचान को लेकर दावा किया है।अब आयोग के निर्देश के बाद दोनों पक्षों को अलग नाम और अलग चुनाव चिह्न के साथ चुनाव प्रक्रिया में आगे बढ़ना होगा। पार्टी के मूल नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न पर अंतिम फैसला बाद की प्रक्रिया में होने की संभावना है।
आगे क्या होगा
फिलहाल चुनाव आयोग का आदेश अंतरिम है और यह संबंधित उपचुनावों के उद्देश्य से लागू किया गया है। दोनों गुटों से पसंदीदा नाम और चुनाव चिह्न मांगे गए हैं, जिसके बाद आयोग चुनाव प्रक्रिया के लिए अलग पहचान आवंटित करेगा।पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अंतिम अधिकार किस गुट को मिलेगा, यह अलग प्रक्रिया में तय किया जाना है। इसलिए उपचुनाव से पहले टीएमसी के भीतर चल रहा यह विवाद अब चुनाव आयोग के अंतिम निर्णय की दिशा में आगे बढ़ेगा।
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