अमेरिकी फैसले से नहीं बदलेगी टीसीएस की योजना, पांच साल में 15 हजार भर्तियां
अमेरिकी सरकार की कार्रवाई के बीच टीसीएस ने स्पष्ट किया है कि उसकी भर्ती रणनीति पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। कंपनी अगले पांच वर्षों में अमेरिका में 15 हजार कर्मचारियों की भर्ती करेगी और स्थानीय प्रतिभाओं को प्राथमिकता देगी।
दि राइजिंग न्यूज़ | अमेरिका | 9 अक्टूबर 2026
अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति और स्थायी निवास से जुड़ी नीतियों में सख्ती के बीच टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने अपनी भर्ती योजना को लेकर बड़ा बयान दिया है। कंपनी का कहना है कि अमेरिकी प्रशासन के कदमों से उसकी भर्ती रणनीति प्रभावित नहीं होगी। कंपनी ने अगले पांच वर्षों में 15 हजार लोगों को नौकरी देने की योजना भी दोहराई है। इस बयान से सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में रोजगार और अमेरिकी नीतियों के प्रभाव को लेकर चल रही चर्चा के बीच कंपनी का रुख स्पष्ट हुआ है।
अमेरिकी सरकार ने क्यों लिया यह कदम
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने आठ प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों को स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम से अस्थायी रूप से निलंबित करने का निर्णय लिया है। इस कार्यक्रम के माध्यम से कंपनियां कुछ विदेशी कर्मचारियों के स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया के लिए आवेदन कर सकती हैं। अमेरिकी प्रशासन की कार्रवाई कुशल विदेशी कर्मचारियों के आव्रजन कार्यक्रमों पर सख्ती बढ़ाने की व्यापक नीति का हिस्सा है।
टीसीएस ने क्या कहा
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी सरकार के इस निर्णय से उसकी भर्ती रणनीति और ग्राहकों के साथ कामकाज पर कोई बड़ा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। कंपनी के अनुसार, पिछले दो वर्षों में स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम के तहत उसके आवेदन एकल अंक में रहे हैं। इसी वजह से कंपनी को लगता है कि इस कार्यक्रम पर लगी रोक से उसकी कार्ययोजना प्रभावित नहीं होगी।
पांच वर्षों में 15 हजार लोगों की भर्ती का लक्ष्य
कंपनी ने अमेरिका में अगले पांच वर्षों के दौरान 15 हजार अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती करने की अपनी योजना दोहराई है। इसका उद्देश्य वहां अपने स्थानीय कर्मचारियों की संख्या को और बढ़ाना है। कंपनी ने बताया कि उसकी भर्ती रणनीति स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर देने और विश्वविद्यालयों से नए उम्मीदवारों को नियुक्त करने पर आधारित है।
अमेरिका में 31 कार्यालयों और सेवा केंद्रों का नेटवर्क
टीसीएस ने बताया कि अमेरिका में उसके 31 कार्यालय और सेवा केंद्र हैं, जिनके माध्यम से वह स्थानीय स्तर पर अपना कारोबार संचालित करती है। कंपनी का मानना है कि स्थानीय कर्मचारियों की भर्ती पर जोर देने से विदेशी कर्मचारियों के आव्रजन नियमों में होने वाले बदलावों पर उसकी निर्भरता सीमित रहती है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह अमेरिकी श्रम विभाग के सभी लागू निर्देशों का पालन करेगी।
अन्य भारतीय कंपनियों पर भी अमेरिकी फैसले का असर
अमेरिकी सरकार की कार्रवाई में टीसीएस के अलावा इन्फोसिस, विप्रो, एचसीएलटेक, कॉग्निजेंट और कैपजेमिनी जैसी कंपनियों के नाम भी सामने आए हैं। कुछ अन्य बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियां भी इस कदम से प्रभावित हुई हैं। इस घटनाक्रम के बाद भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति, स्थायी निवास की प्रक्रिया और स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
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