तेजस्विनी के लिए शामली की प्रीति बनी आत्मनिर्भर:राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर घर पर ही शुरू किया काम, परिवार को मिला सहारा

Oct 18, 2026 - 07:56
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तेजस्विनी के लिए शामली की प्रीति बनी आत्मनिर्भर:राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर घर पर ही शुरू किया काम, परिवार को मिला सहारा
शामली में कभी घर की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली सिल्वर गांव निवासी प्रीति तरार आज अपने हुनर के दम पर आत्मनिर्भर बन रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद उन्होंने घर पर ही हैंडलूम बैग बनाने का काम शुरू किया। अब वह अलग-अलग तरह के बैग और किट तैयार कर अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं। उनके इस काम से परिवार को आर्थिक सहारा मिल रहा है और उन्हें अपनी पहचान बनाने का अवसर भी मिला है। प्रीति बताती हैं कि करीब दो साल पहले वह शामली ब्लॉक के स्वयं सहायता समूह से जुड़ी थीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें सरकारी योजना के माध्यम से सहायता मिली। इससे उन्हें घर पर ही रोजगार शुरू करने की प्रेरणा मिली। इसके बाद उन्होंने हैंडलूम बैग बनाने का काम शुरू किया। धीरे-धीरे उन्होंने इस काम को आगे बढ़ाया और विभिन्न प्रकार के बैग तैयार करने लगीं। वह अपनी जरूरत और मांग के अनुसार अलग-अलग डिजाइन के बैग और किट बनाती हैं। घर की जिम्मेदारियों के साथ रोजगार प्रीति का कहना है कि घर की जिम्मेदारियों के बीच ऐसा काम शुरू करना चाहती थीं, जिससे परिवार की आमदनी में भी योगदान दे सकें। घर पर ही काम करने की सुविधा मिलने से वह घरेलू जिम्मेदारियों के साथ अपने रोजगार को आगे बढ़ा पा रही हैं। इस काम से होने वाली आय से घर के खर्च में मदद मिलती है। उनके पति खेती-बाड़ी करते हैं। परिवार में दो बच्चे हैं, जो पढ़ाई पूरी करने के बाद विदेश में नौकरी कर रहे हैं। बच्चों के बाहर नौकरी करने के बावजूद प्रीति ने खुद भी अपने हुनर के दम पर काम करने का रास्ता चुना। अब हैंडलूम बैग बनाना उनके लिए केवल आमदनी का साधन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ाया गया कदम भी है। समूह से मिला आगे बढ़ने का अवसर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़ने का माध्यम बन रहे हैं। प्रीति की कहानी भी इसी बदलाव की एक मिसाल है। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें घर से काम शुरू करने का अवसर मिला। अपने हुनर और मेहनत से वह परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में योगदान दे रही हैं। प्रीति का प्रयास बताता है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर महिलाएं घर की जिम्मेदारियां निभाते हुए भी स्वरोजगार की राह चुन सकती हैं। उनका यह सफर दूसरी महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन सकता है, जो अपने हुनर को रोजगार में बदलकर आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं।

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