टेलीमानस के 4 साल: 1.81 लाख कॉल आए:जेन जी कर रही सबसे ज्यादा कॉल, 60% महिलाएं कर रही है काउंसलिंग
वाराणसी में टेलीमानस ने अपने 4 साल पूरे किए। फरवरी 2023 से अगस्त 2026 तक टेलीमानस के उपलब्ध स्थानीय रिकॉर्ड में 1 लाख 81 हजार 766 कॉल दर्ज हुए। अगस्त 2026 में 21 से 30 साल के आयु वर्ग से सबसे ज्यादा 1,181 कॉल आए थे। काउंसलरों के मुताबिक रिलेशनशिप इश्यू, पढ़ाई-करियर का तनाव, एंग्जायटी और पारिवारिक विवाद प्रमुख परेशानियां सबसे ज्यादा सामने आ रही है। काउंसलरों ने बताया पढ़ाई और नौकरी का दबाव झेल रहे युवाओं से लेकर अकेलेपन से परेशान प्रोफेशनल्स, वैवाहिक रिश्तों में धोखे का सामना करने वाले लोग और बचपन में हुए यौन शोषण को वर्षों बाद समझ पाने वाले लोगों भी हमे कॉल करते है। मानसिक चिकित्सलाय में चल रहे टेलीमानस सेंटर में अभी 10 काउंसलर की टीम है जिसमें 6 महिलाएं है। काउंसलर्स बताते है कि रोजाना 180 से 200 तक कॉल आते है। इस सेवा की शुरुआत 10 अक्टूबर 2022 में हुई थी। रिलेशनशिप इश्यू के पीछे पढ़ाई का तनाव भी टेलीमानस के काउंसलर दीपक कुमार ने बताया कि वह पिछले चार साल से काउंसलिंग कर रहे हैं। उनके पास रिलेशनशिप इश्यू, एडजस्टमेंट की परेशानी और पढ़ाई या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़े तनाव को लेकर कॉल आते हैं। उन्होंने बताया कि कई बार छात्र पढ़ाई में मन नहीं लगने की शिकायत करते हैं, लेकिन बातचीत आगे बढ़ने पर पता चलता है कि उनके रिश्ते में कोई परेशानी चल रही है, जिसका असर पढ़ाई पर पड़ रहा है। कुछ लोग किसी घटना के तुरंत बाद उसे स्वीकार नहीं कर पाते। समय के साथ स्थिति को समझने और स्वीकार करने पर परेशानी से निपटना आसान हो सकता है। टेलीमानस से कई के रिश्ते सुधरे काउंसलर डॉ. रेशमी पाल ने रिलेशनशिप से जुड़े एक मामले का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के महाराजगंज की एक महिला अपने पति के साथ पुणे में रहती थीं। शादी के बाद महिला को पता चला कि पति ने अपने पुराने रिश्तों से जुड़ी कुछ बातें उनसे छिपाई थीं। इस जानकारी के सामने आने के बाद वह बहुत परेशान हो गईं। काउंसलर के मुताबिक, पहली बार कॉल के दौरान महिला लगातार रो रही थीं और उन्हें लग रहा था कि वह जिस व्यक्ति के साथ रह रही हैं, उसे ठीक से जानती ही नहीं हैं। डॉ. रेशमी ने बताया कि शुरुआत में उन्होंने महिला की बात ध्यान से सुनी और रिलैक्सेशन तकनीक की मदद से उन्हें सहज करने की कोशिश की। पहले सेशन में महिला को अपनी बात साझा करने का समय दिया गया। इस केस में काउंसिलंग के बाद दोनों पति पत्नी का वैवाहिक जीनव ठीक हो गया। कई पेशेवर भी करते है कॉल साइकेट्रिक सोशल वर्कर पंकज कुमार यादव ने एक केस साझा किया। उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले नोएडा में रहने वाली एक असिस्टेंट प्रोफेसर ने टेलीमानस पर कॉल किया था। उनकी उम्र करीब 56 साल थी। काउंसलर के मुताबिक, उन्होंने पहले शादी न करने का फैसला लिया था, लेकिन बाद में अकेलेपन और तनाव से परेशान रहने लगीं। उन्हें चिड़चिड़ापन होने लगा था और पढ़ाने में भी परेशानी महसूस हो रही थी। बातचीत के दौरान उन्होंने निराशा और आत्महत्या के विचार आने की बात भी बताई। पंकज यादव ने कहा कि मानसिक परेशानी केवल छात्रों या नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं तक सीमित नहीं है। कामकाजी और पेशेवर जिम्मेदारियां निभाने वाले लोग भी अकेलेपन और तनाव से जूझ सकते हैं। उन्होंने कहा कि कॉल करने वालों की पहचान कई बार गोपनीय रखनी पड़ती है, इसलिए पेशे के आधार पर यह बताना मुश्किल है कि किस क्षेत्र के लोग सबसे ज्यादा कॉल करते हैं। टेलीमानस की टियर-2 टीम गंभीर मामलों में करती है काम डॉ. रेशमी पाल ने बताया कि कुछ मामलों में लोग बचपन में हुए यौन शोषण को उसी समय समझ नहीं पाते। बाद में किशोरावस्था या युवावस्था में जब वे उस घटना को समझते हैं, तब उन्हें मानसिक परेशानी होने लगती है। ऐसे मामलों में व्यक्ति के अनुभव को गंभीरता से सुनना और उसे उचित मदद से जोड़ना जरूरी होता है। उन्होंने बताया कि बचपन में हुआ यौन शोषण, भावनात्मक उपेक्षा, बुलिंग या माता-पिता से अलगाव जैसे अनुभव किसी व्यक्ति के आगे के रिश्तों और भावनात्मक जीवन पर असर डाल सकते हैं। कभी-कभी पुराने अनुभवों पर काम नहीं हो पाने के कारण नए रिश्तों में असुरक्षा और अलग हो जाने का डर सामने आता है। ऐसे मामलों में काउंसलिंग के जरिए व्यक्ति को अपने अनुभव समझने और उनसे निपटने में मदद दी जाती है। डॉ. रेशमी के मुताबिक, जरूरत पड़ने पर टेलीमानस की टियर-2 टीम और संबंधित सहायता सेवाओं से भी जोड़ा जा सकता है। यौन शोषण से जुड़े मामलों में व्यक्ति की सुरक्षा, गोपनीयता और जरूरत के अनुसार सही सहायता तक पहुंच सुनिश्चित करना जरूरी है। रोज आती है 150 से ज्यादा कॉल पंकज कुमार यादव के मुताबिक, उनके यहां रोजाना करीब 150 से ज्यादा कॉल आते हैं। कभी यह संख्या 200 के करीब पहुंच जाती है और कभी 120 के आसपास रहती है। उन्होंने तनाव, एंग्जायटी, रिलेशनशिप इश्यू और पारिवारिक विवाद को प्रमुख समस्याओं में गिनाया। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के बारे में लोगों की जागरूकता बढ़ रही है। अब लोग यह समझ रहे हैं कि मानसिक परेशानी होने पर काउंसलर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से मदद ली जा सकती है। उनके मुताबिक, काम का दबाव, नौकरी की चिंता, परिवारों में बातचीत की कमी और अकेलापन तनाव बढ़ाने वाले कारण हो सकते हैं। परिवार और भरोसेमंद लोगों से बातचीत जरूरी पंकज यादव ने युवाओं को सलाह दी कि पढ़ाई या नौकरी के दबाव के बीच नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद, शारीरिक गतिविधि और परिवार के साथ समय बिताने पर ध्यान दें। अपनी परेशानी को मन में दबाकर रखने के बजाय किसी भरोसेमंद व्यक्ति से साझा करें। यदि तनाव लंबे समय तक बना रहे या रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें, तो पेशेवर मदद लेने में संकोच न करें।
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