टेस्ला की उड़ने वाली रोडस्टर कार आज लॉन्च होगी:कोल्ड गैस थ्रस्टर्स से पावर मिलेगी; मस्क बोले- यह फिल्मों और कल्पना से भी परे
इलॉन मस्क की कंपनी टेस्ला आज 16 अक्टूबर को अपनी सेकेंड जनरेशन 'रोडस्टर' कार लॉन्च करेगी। इस कार में कोल्ड गैस थ्रस्टर्स दिए जा सकते हैं, जिनकी मदद से यह कार शायद हवा में थोड़ा उड़ भी सकेगी। उड़ने का मतलब यह नहीं कि कार आसमान में प्लेन की तरह यहां-वहां घूम पाए। यह सिर्फ परफॉर्मेंस बूस्ट और शॉर्ट-टर्म लिफ्ट के लिए हो सकता है। मस्क ने अपनी इस कार के लॉन्च से पहले पोस्ट किया कि नई रोड्सटर फिल्मों से परे है, कल्पना से परे है, इंसानी सीमाओं से परे है, फिर भी इसे पृथ्वी पर इंसानों द्वारा ही बनाया गया है। उन्होंने एक अन्य पोस्ट में ये भी कहा कियह अब तक के सबसे बेहतरीन प्रोडक्ट डेमो होगा। 2017 से बार-बार टली टेस्ला रोडस्टर की लॉन्चिंग टेस्ला ने अपनी सेकंड जनरेशन रोडस्टर को पहली बार नवंबर 2017 में पेश किया था। हालांकि, इसके बाद इसकी लॉन्चिंग और प्रोडक्शन की तारीख कई बार टलती रही। शुरुआत में उम्मीद थी कि यह कार 2020 तक सड़कों पर आ जाएगी, लेकिन डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग की चुनौतियों के कारण इसमें करीब 8 साल की देरी हो चुकी है। सैम आल्टमैन और मस्क के बीच बहस हो चुकी कार की लॉन्चिंग में देरी को लेकर बीते साल इलॉन मस्क और ओपनएआई के सीईओ सैम आल्टमैन के बीच सोशल मीडिया पर बहस भी हुई थी। आल्टमैन ने X पर लिखा था कि 50 हजार डॉलर की बुकिंग फीस देने के बाद 7.5 साल का इंतजार बहुत लंबा लगता है। इस पर जवाब देते हुए मस्क ने दावा किया था कि आल्टमैन को उनकी बुकिंग फीस पहले ही रिफंड की जा चुकी है। प्रोडक्शन में 12 से 18 महीने लग सकते हैं भले ही कंपनी आज 16 अक्टूबर को कार का अनवील करने जा रही हो, लेकिन इसे बाजार में उतरने में अभी और वक्त लगेगा। इलॉन मस्क खुद यह कह चुके हैं कि अनवील इवेंट के बाद भी रोडस्टर का प्रोडक्शन शुरू होने में कम से कम 12 से 18 महीने का समय लग सकता है। रोडस्टर टेस्ला की पहली कार टेस्ला की पहली कार 'रोडस्टर' थी, जिसे लोटस कंपनी की कार के ढांचे पर तैयार किया जाना था ताकि लागत कम रहे। लेकिन इलॉन मस्क को यह बेसिक प्लान मंजूर नहीं था। वे चाहते थे कि रोडस्टर इतनी खूबसूरत और पावरफुल हो कि लोग देखते ही रह जाएं। मस्क खुद हर दो हफ्ते में सिलिकन वैली जाकर डिजाइन मीटिंग्स में हिस्सा लेते और बदलाव करवाते। मस्क ने 5 बड़े बदलाव करवाए दरवाजे का डिजाइन: मस्क ने दरवाजे का फ्रेम 3 इंच नीचे करवाया, ताकि चढ़ना-उतरना आसान हो। इससे ₹16 करोड़ से ज्यादा का खर्च आया। चौड़ी सीट्स: लोटस की सीट्स तंग थीं, इसलिए मस्क ने चौड़ी सीट्स लगवाईं ताकि महिलाओं को भी बैठने में आसानी हो। नई हेडलाइट्स: पुरानी हेडलाइट्स पसंद न आने पर कवर वाली नई हेडलाइट्स लगवाईं, जिससे ₹4 करोड़ का खर्च और बढ़ गया। कार्बन फाइबर बॉडी: फाइबरग्लास की जगह मजबूत और हल्का कार्बन फाइबर इस्तेमाल किया, जिससे कार महंगी पर ज्यादा सॉलिड बनी। इलेक्ट्रिक डोर हैंडल: कार को कूल लुक देने के लिए साधारण की जगह टच-सेंसिटिव इलेक्ट्रिक हैंडल लगवाए। 5 बदलावों के कारण रोडस्टर की लागत बढ़ी लागत और समय बढ़ा: इन बदलावों से रोडस्टर का बजट और प्रोडक्शन का समय काफी बढ़ गया। टेस्ला को सैकड़ों नए कलपुर्जों के लिए नए सप्लायर्स खोजने पड़े। सितारों से सजा लॉन्च: जुलाई 2006 में सांता मोनिका एयरपोर्ट पर रोडस्टर का प्रोटोटाइप लॉन्च हुआ। इवेंट में अर्नोल्ड श्वार्जनेगर और जॉर्ज क्लूनी जैसी हस्तियां पहुंचीं। जेबी स्ट्रॉबेल ने अर्नोल्ड को टेस्ट ड्राइव करवाई।
मस्क का मास्टर प्लान: मस्क ने कंपनी की वेबसाइट पर लिखा कि टेस्ला का असली मकसद दुनिया को पेट्रोल-डीजल से हटाकर सोलर-इलेक्ट्रिक पर लाना है। महंगी रोडस्टर से शुरुआत करके कंपनी आगे सस्ती इलेक्ट्रिक कारें बनाएगी। स्पीड और स्टार फैन-फॉलोइंग: यह कार महज 4 सेकंड में 0 से 96 किमी/घंटा (60 मील/घंटा) की रफ्तार पकड़ सकती थी। अर्नोल्ड और क्लूनी ने तुरंत 1 लाख डॉलर एडवांस देकर इसे बुक किया, जबकि स्टीव जॉब्स ने भी इसकी तारीफ की। ----------------------------------------- टेस्ला से जुड़ी ये खबर भी पढ़े… टेस्ला डूबने लगी तो नींद में चिल्लाते थे मस्क:गर्लफ्रेंड बोली- लगता था उन्हें हार्ट अटैक आ जाएगा; आज नंबर-1 इलेक्ट्रिक कार कंपनी साल 2008 की बात है। दुनियाभर की इकोनॉमी संकट में थी। लेहमन ब्रदर्स जैसे बड़े इन्वेस्टमेंट बैंक से लेकर जनरल मोटर्स जैसी कंपनियां डूब रही थीं। इलॉन मस्क की कंपनी टेस्ला शुरुआती दौर में थी। मंदी के कारण हालत इतनी खराब थी कि पहली कार के लिए ग्राहकों से जो बुकिंग अमाउंट लिया था उसे भी खर्च कर दिया। अपने खर्चों को कवर करने के लिए उन्होंने निजी तौर पर रकम उधार ली थी। वे उस समय बेहद तनाव में रहने लगे थे। उनकी गर्लफ्रेंड रही तालुलाह रिले ने इस वाकये को याद करते हुए कहा- 'वह खुद से बात करने लगे थे, अपने हाथों को फैलाकर जोर-जोर से चिल्लाते थे। कई बार नींद में भी चिल्लाते थे और हाथ पटकते थे। लगता था कि उन्हें कभी भी दिल का दौरा पड़ सकता है।’ पूरी खबर पढ़ें…
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)