ठेकेदार संघ ने उठाए बाढ़ बचाव के इंतजामों पर सवाल:तटबंध टूटने पर बोले- बाढ़ से पहले सिर्फ कागजों पर, मौके पर नहीं दिखी
कुशीनगर के तमकुहीराज तहसील में सोमवार देर रात अहिरौलिदान-पिपरासी तटबंध टूटने के बाद सिंचाई विभाग के बाढ़ खंड की तैयारियों पर सवाल उठने लगे हैं। बाढ़ खंड से जुड़े ठेकेदारों ने अधिशासी अभियंता महेश कुमार सिंह के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए स्थानीय ठेकेदारों को काम नहीं देने का आरोप लगाया है। ठेकेदार संघ के महामंत्री विजय तिवारी ने दैनिक भास्कर को बताया कि हर साल बाढ़ से बचाव के लिए बजट आता है, लेकिन मौके पर बचाव सामग्री नजर नहीं आ रही। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए टेंडर से लेकर मौके पर उपलब्ध संसाधनों तक की जांच कराने की बात कही। ग्रामीणों ने भी इसी तरह के सवाल उठाए हैं। विजय तिवारी का आरोप है कि अधिशासी अभियंता ने स्थानीय ठेकेदारों को नजरअंदाज किया और बाहरी लोगों को काम सौंपा गया। ठेकेदार संघ का कहना है कि जिन कामों का दावा कागजों पर किया गया, उनका असर मौके पर नजर नहीं आया। हालांकि इन आरोपों पर विभाग की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हर साल बजट, फिर भी मौके पर नहीं दिखे संसाधन तिवारी ने कहा कि बाढ़ बचाव के लिए हर साल बजट आता है। इसके बावजूद बांधों और गोदामों में बोल्डर, जाल और जियो टैग बैग जैसी जरूरी सामग्री दिखाई नहीं दे रही है। उनका सवाल है कि बाढ़ से पहले बचाव के लिए वास्तव में कितनी सामग्री खरीदी गई और उसका इस्तेमाल कहां हुआ।
टेंडर से खरीद तक जांच कराने की मांग ठेकेदार संघ ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। विजय तिवारी ने कहा कि जांच में यह देखा जाना चाहिए कि बाढ़ से पहले किन कामों के टेंडर हुए, क्या-क्या सामग्री खरीदी गई और तटबंध पर वास्तव में कितने संसाधन उपलब्ध थे। इससे बचाव कार्यों की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी। ग्रामीण भी बोले- संसाधन होते तो शायद नहीं टूटता बांध तटबंध टूटने के बाद ग्रामीणों ने भी विभाग की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अगर समय रहते पर्याप्त बचाव सामग्री और संसाधन मौजूद होते तो तटबंध को टूटने से बचाया जा सकता था। फिलहाल तटबंध टूटने के बाद लगाए जा रहे आरोपों और विभागीय तैयारियों की स्थिति जांच का विषय बनी हुई है।
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