टीचर बनने का सपना छोड़ा, महिलाओं को दिला रहीं न्याय:पति की प्रेरणा से ममता बनीं वकील, 14 साल से पीड़ित महिलाओं के केस मुफ्त लड़ रहीं
हाथरस की ममता कौशिक बचपन में शिक्षिका बनकर बच्चों को पढ़ाने का सपना देखती थीं, लेकिन शादी के बाद उनके जीवन की दिशा बदल गई। पति मुकेश चतुर्वेदी के प्रोत्साहन पर उन्होंने वकालत को अपना पेशा बनाया। आज करीब ममता (40) उन महिलाओं की कानूनी मदद कर रही हैं, जो आर्थिक तंगी के कारण न्याय के लिए संघर्ष करती हैं। वर्ष 2012 से हाथरस की सिविल कोर्ट में प्रैक्टिस कर रहीं ममता तेजाब हमले और घरेलू हिंसा जैसी घटनाओं से पीड़ित महिलाओं के मुकदमे बिना फीस लिए लड़ती हैं। अलीगढ़ जिले के इगलास की रहने वाली ममता ने एमए और एलएलबी की पढ़ाई की है। उनके लिए वकालत केवल पेशा नहीं, बल्कि जरूरतमंद महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने का जरिया भी है। वह कानूनी सहायता देने के साथ पीड़ित महिलाओं को अपने पैरों पर खड़े होने के लिए भी प्रेरित करती हैं। तेजाब हमले की पीड़िता का मुफ्त में लड़ा मुकदमा ममता ने बताया कि उनके पास एक ऐसी महिला आई थी, जिस पर तेजाब से हमला किया गया था। हमले में महिला बुरी तरह झुलस गई थी। पीड़िता की हालत देखकर ममता ने बिना फीस लिए उसका मुकदमा लड़ने का फैसला किया। उनके मुताबिक, कानूनी पैरवी के बाद मामले में दोषियों को सजा मिली। वह इस मामले को अपने वकालत के सफर की अहम उपलब्धियों में गिनती हैं। घरेलू हिंसा झेल रही महिलाओं को दी कानूनी मदद ममता के पास कई ऐसी महिलाएं भी पहुंचीं, जिन्हें उनके पति प्रताड़ित करते थे। उन्होंने बताया कि कुछ महिलाओं के साथ मारपीट की जाती थी और उन्हें खाना तक नहीं दिया जाता था। ममता ने ऐसी महिलाओं को कानूनी सहायता दी और उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करते हुए आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया। टूटते परिवारों को जोड़ने की भी कोशिश ममता ने बताया कि कुछ महिलाएं अपने पति के साथ रहना चाहती थीं, लेकिन पति उन्हें साथ रखने के लिए तैयार नहीं थे। ऐसे मामलों में उन्होंने न्यायालय के माध्यम से दोनों पक्षों को बुलवाकर बातचीत कराई। आपसी सहमति बनने पर कुछ परिवार फिर से साथ रहने को तैयार हुए। ममता का मानना है कि जहां संभव हो, वहां बातचीत और सहमति से रिश्तों को बचाने की कोशिश करनी चाहिए। ममता का कहना है कि वह तेजाब हमले, दुष्कर्म और घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं को निःशुल्क कानूनी सहायता देती हैं। उनका उद्देश्य है कि पैसों की कमी किसी महिला के न्याय पाने के रास्ते में बाधा न बने। उन्होंने कहा कि वह आगे भी जरूरतमंद महिलाओं की मदद करती रहेंगी, ताकि वे अपने अधिकारों के लिए मजबूती से लड़ सकें।
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