पाकिस्तान के बाद तुर्किये का भारत पर बदला रुख!

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के समर्थन के बाद तुर्किये अब भारत के साथ संबंध सुधारने की कोशिश करता दिखाई दे रहा है। विदेश मंत्री हाकन फिदान ने कहा कि भारत के साथ कोई द्विपक्षीय समस्या नहीं है और दोनों देशों के बीच सहयोग की काफी संभावनाएं हैं।

Sep 03, 2026 - 11:36
0
पाकिस्तान के बाद तुर्किये का भारत पर बदला रुख!

दि राइजिंग न्यूज़ | तुर्किये | 02 सितंबर 2026

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के समर्थन को लेकर भारत और तुर्किये के रिश्तों में तनाव बढ़ गया था। अब तुर्किये की ओर से भारत के साथ संबंध बेहतर करने के संकेत मिल रहे हैं। तुर्किये के विदेश मंत्री हाकन फिदान ने कहा है कि दोनों देशों के बीच कोई द्विपक्षीय विवाद नहीं है और सहयोग की काफी संभावनाएं मौजूद हैं।

भारत से अच्छे संबंध चाहता है तुर्किये

तुर्किये के विदेश मंत्री हाकन फिदान ने भारत के साथ संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उनका देश भारत के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना चाहता है और दोनों देशों के बीच ऐसा कोई सीमा विवाद नहीं है, जिससे रिश्तों में स्थायी तनाव पैदा हो। उन्होंने दोनों देशों के बीच सकारात्मक मुद्दों पर आगे बढ़ने की आवश्यकता बताई।हाकन फिदान ने कहा कि तुर्किये के रूस, अमेरिका और कुछ यूरोपीय देशों के साथ अलग-अलग मुद्दों पर मतभेद हैं। इसके बावजूद उनका देश नकारात्मक मुद्दों को पीछे छोड़कर सकारात्मक एजेंडे के साथ आगे बढ़ने की कोशिश करता है। उन्होंने कहा कि भारत और तुर्किये के संबंधों में भी इसी दृष्टिकोण को अपनाया जाना चाहिए।

पाकिस्तान के साथ संबंधों पर भारत को दी सफाई

तुर्किये के विदेश मंत्री ने पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को लेकर भी भारत को सफाई दी। उन्होंने कहा कि तुर्किये अकेला ऐसा देश नहीं है, जिसके पाकिस्तान के साथ अच्छे और भाईचारे वाले संबंध हैं। दुनिया में कई अन्य देशों के भी पाकिस्तान के साथ करीबी संबंध हैं और ऐसे संबंधों को अलग नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।फिदान ने कहा कि अगर भारत उन देशों से नाराज होता है, जिनके पाकिस्तान के साथ अच्छे संबंध हैं, तो यह अलग विषय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि द्विपक्षीय स्तर पर भारत और तुर्किये के बीच कोई बड़ी समस्या नहीं है। साथ ही उन्होंने भारत से अपील की कि वह तुर्किये के पाकिस्तान के साथ संबंधों को भारत के खिलाफ कदम के तौर पर न देखे।

पाकिस्तान के समर्थन से भारत हुआ था नाराज

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की थी। इसी दौरान तुर्किये ने भारत की कार्रवाई पर आलोचनात्मक रुख अपनाया था। इसके अलावा पाकिस्तान द्वारा तुर्किये में निर्मित मानवरहित विमानों के इस्तेमाल की खबरों ने भी दोनों देशों के बीच संबंधों को लेकर भारत की चिंताएं बढ़ाई थीं।तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन लंबे समय से कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन करते रहे हैं। यही वजह है कि भारत और तुर्किये के बीच कूटनीतिक संबंधों में कई बार असहजता देखने को मिली है। हालांकि अब तुर्किये की ओर से भारत के साथ संबंधों को बेहतर करने के संकेत दिए जा रहे हैं।

व्यापार और निवेश बढ़ाने पर तुर्किये की नजर

तुर्किये भारत के साथ आर्थिक संबंधों को भी मजबूत करना चाहता है। दोनों देशों के बीच व्यापार में कई क्षेत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका है। तुर्किये भारत को संगमरमर, मशीनरी और कृषि से जुड़ी वस्तुएं उपलब्ध कराता है, जबकि भारत की ओर से रसायन, मशीनरी और वाहन उद्योग से संबंधित वस्तुओं का निर्यात किया जाता है।भारतीय पर्यटक भी तुर्किये की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ऐसे में तुर्किये भारत के साथ व्यापार, निवेश और पर्यटन संबंधों को बढ़ाने में रुचि रखता है। आर्थिक हित दोनों देशों के बीच संबंधों को नए सिरे से मजबूत करने का आधार बन सकते हैं।

चार साल बाद फिर शुरू हुई बातचीत

भारत और तुर्किये के बीच अप्रैल 2026 में विदेश कार्यालय स्तर की बातचीत फिर शुरू हुई। यह बातचीत करीब चार साल के लंबे अंतराल के बाद हुई थी। इससे संकेत मिला कि दोनों देश राजनीतिक मतभेदों के बावजूद संवाद का रास्ता खुला रखना चाहते हैं।हाल के समय में तुर्किये ने अपराधियों के प्रत्यर्पण के मामले में भी भारत के साथ सहयोग किया है। मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े आरोपी सलीम डोला के प्रत्यर्पण में तुर्किये की भूमिका सामने आई थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच अपराधियों के प्रत्यर्पण और सुरक्षा सहयोग को लेकर बातचीत आगे बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

तुर्किये के रुख में क्यों दिख रहा बदलाव

पाकिस्तान के साथ करीबी संबंधों के बावजूद तुर्किये भारत के साथ अपने आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहता। भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और उसका विशाल बाजार तुर्किये के लिए महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि अंकारा अब राजनीतिक मतभेदों को अलग रखते हुए आर्थिक और कूटनीतिक सहयोग बढ़ाने की कोशिश करता दिखाई दे रहा है।भारत की ओर से भी तुर्किये के रुख पर नजर रखी जा रही है। पाकिस्तान के समर्थन और कश्मीर मुद्दे पर तुर्किये की पुरानी नीति के कारण दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी रही है। ऐसे में आने वाले समय में तुर्किये के बयानों के साथ-साथ उसके वास्तविक कूटनीतिक कदम भी महत्वपूर्ण होंगे।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User