13 साल इंतजार के बाद तन्वी की मौत, एम्स ने सर्जरी न करने की बताई वजह

कोटा की 16 वर्षीय तन्वी की 13 वर्षों तक सर्जरी का इंतजार करने के बाद मौत हो गई। एम्स ने बताया कि चिकित्सकीय जांच में उसकी जटिल हृदय बीमारी के कारण सर्जरी संभव नहीं मानी गई थी। मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है।

Sep 03, 2026 - 11:49
Updated: 1 month ago
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13 साल इंतजार के बाद तन्वी की मौत, एम्स ने सर्जरी न करने की बताई वजह

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 03 सितंबर 2026

कोटा की 16 वर्षीय तन्वी की मौत के बाद दिल्ली स्थित एम्स पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। तन्वी जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित थी और करीब 13 वर्षों से इलाज तथा सर्जरी की उम्मीद में अस्पताल के संपर्क में थी। अब एम्स ने पूरे मामले पर सफाई देते हुए बताया है कि चिकित्सकीय जांच के बाद उसकी सर्जरी को संभव नहीं माना गया था।

13 साल तक इलाज की उम्मीद में अस्पताल के चक्कर

राजस्थान के कोटा की रहने वाली तन्वी को जन्म से ही दिल से जुड़ी गंभीर बीमारी थी। परिवार के अनुसार, वह वर्ष 2012 से उपचार के लिए दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के संपर्क में थी। परिजन लगातार उसकी सर्जरी की उम्मीद लगाए रहे, लेकिन समय के साथ उसकी स्थिति जटिल होती चली गई।परिवार का आरोप है कि तन्वी की सर्जरी बार-बार टलती रही और इस दौरान उन्होंने कई बार अस्पताल के चक्कर लगाए। परिजनों ने स्वास्थ्य मंत्रालय से भी मदद की गुहार लगाई थी। आखिरकार 1 सितंबर 2026 को तन्वी ने दम तोड़ दिया, जिसके बाद परिवार ने पूरे मामले की जांच और जिम्मेदार चिकित्सकों पर कार्रवाई की मांग की है।

तन्वी को थी जन्मजात हृदय की गंभीर बीमारी

एम्स के आधिकारिक बयान के मुताबिक, तन्वी पहली बार 10 अक्टूबर 2012 को हृदय रोग विभाग की बाह्य रोगी सेवा में पहुंची थी। जांच के दौरान उसके दिल में छेद यानी वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट और फेफड़ों तक रक्त पहुंचने के मार्ग से जुड़ी गंभीर समस्या का पता चला था।इसके बाद चिकित्सकों ने उसकी बीमारी की प्रकृति और हृदय की बनावट को समझने के लिए कई जटिल जांच कराईं। वर्ष 2013 में संगणकीय टोमोग्राफी आधारित रक्तवाहिका जांच, पारंपरिक रक्तवाहिका जांच और हृदय कैथेटर जांच जैसी प्रक्रियाओं के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की गई कि उसके लिए शल्य चिकित्सा कितनी सुरक्षित और संभव हो सकती है।

2017 में सर्जरी को क्यों माना गया असंभव

एम्स के अनुसार, विस्तृत चिकित्सकीय जांच के बाद वर्ष 2017 में तन्वी के हृदय की बनावट और बीमारी की गंभीरता का आकलन किया गया। चिकित्सकों ने निष्कर्ष निकाला कि उस समय उसकी सर्जरी संभव नहीं थी। परिवार को नियमित जांच और दवाओं के माध्यम से उपचार जारी रखने की सलाह दी गई।इसके बाद भी तन्वी एम्स के संपर्क में रही और समय-समय पर उसकी चिकित्सकीय निगरानी होती रही। इसी वर्ष 24 अगस्त को उसे हृदय और फेफड़े के प्रत्यारोपण की संभावना का आकलन करने के लिए अस्पताल में भर्ती भी किया गया था।

परिवार ने दूसरी चिकित्सकीय राय भी ली

तन्वी के परिवार ने उसकी सर्जरी की संभावना को लेकर अन्य विशेषज्ञों से भी सलाह ली थी। एम्स के बयान के अनुसार, पिछले वर्ष परिवार ने हृदय और वक्षीय रक्तवाहिका शल्य चिकित्सा विभाग के प्रमुख से इस संबंध में राय ली थी। वहां से भी दवाओं के माध्यम से उपचार जारी रखने की सलाह दी गई।इसके बाद परिवार ने एक अन्य वरिष्ठ हृदय एवं वक्षीय शल्य चिकित्सक से भी राय ली। वहां से भी तन्वी के लिए दवाओं के माध्यम से उपचार जारी रखने की सलाह दी गई थी। इसके बावजूद परिवार लगातार उसकी स्थिति को लेकर चिंतित रहा और सर्जरी की संभावना तलाशता रहा।

अगस्त 2026 में फिर बिगड़ी तन्वी की हालत

तन्वी की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे अगस्त 2026 में दोबारा एम्स लाया गया। 24 अगस्त को उसे अस्पताल में भर्ती कर उसकी विस्तृत चिकित्सकीय जांच की गई। इस दौरान उसकी बीमारी की गंभीरता को देखते हुए हृदय और फेफड़े के प्रत्यारोपण की संभावनाओं का भी आकलन किया गया।हालांकि, चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद तन्वी की हालत में सुधार नहीं हो सका। करीब 13 वर्षों तक उपचार की उम्मीद में रहने वाली 16 वर्षीय तन्वी ने 1 सितंबर की सुबह दम तोड़ दिया। उसकी मौत के बाद परिवार ने अस्पताल की कार्यप्रणाली और उपचार संबंधी फैसलों पर सवाल उठाए हैं।

मामले की जांच के लिए एम्स ने बनाई उच्चस्तरीय समिति

मामला सामने आने के बाद एम्स प्रशासन ने तन्वी की मौत की परिस्थितियों की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच चिकित्सकीय तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।एम्स ने अपने बयान में मरीजों की सुरक्षा, उपचार में पारदर्शिता और चिकित्सकीय निर्णयों में जवाबदेही के प्रति प्रतिबद्धता जताई है। अस्पताल के मुताबिक, शव परीक्षण के बाद सामने आने वाले तथ्यों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

पिता ने मांगा न्याय

तन्वी के पिता मुकेश कुमार ने अपनी बेटी की मौत के बाद न्याय की मांग की है। उनका कहना है कि परिवार लंबे समय से बेटी के इलाज के लिए प्रयास कर रहा था और इस दौरान कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत भी की गई। पिता ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।परिवार का कहना है कि उन्हें केवल औपचारिक जांच या आश्वासन नहीं चाहिए, बल्कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि तन्वी के इलाज में क्या हुआ और उसकी सर्जरी क्यों नहीं हो सकी। अब उच्चस्तरीय समिति की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पूरे मामले में चिकित्सकीय फैसले उचित थे या कहीं लापरवाही हुई।

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