उन्नाव में गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन:आखिरी दिन 'गणपति बप्पा मोरया' के जयकारों से गूंजा माहौल, पुलिस गोताखोर तैनात
उन्नाव में गणेश महोत्सव के समापन पर शुक्रवार को गंगाघाट कोतवाली क्षेत्र की गजनीखेड़ा झील में गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। आखिरी दिन सुबह से ही अलग-अलग जगहों से श्रद्धालु गणेश प्रतिमाएं लेकर झील पहुंचे। ढोल-नगाड़ों और भक्ति गीतों के बीच श्रद्धालुओं ने गणपति बप्पा को विदाई दी। दोपहर तक दो दर्जन से ज्यादा प्रतिमाओं का विसर्जन हो चुका था। विसर्जन के लिए प्रशासन और पुलिस ने पहले से ही पूरी तैयारी कर ली थी। जिलाधिकारी घनश्याम मीणा और एसपी जयप्रकाश सिंह ने पहले ही गजनीखेड़ा झील पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया था। अधिकारियों ने विसर्जन स्थल पर सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और बाकी व्यवस्थाओं को लेकर संबंधित अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए थे। इसके बाद पुलिस और प्रशासन की टीम ने विसर्जन के दौरान व्यवस्थाओं पर नजर रखी। सुबह से ही गजनीखेड़ा झील की ओर गणेश प्रतिमाएं लेकर श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। छोटी-बड़ी गाड़ियों से प्रतिमाओं को विसर्जन स्थल तक लाया गया। कई जगहों से लोग समूह में पहुंचे और पूजा-अर्चना के बाद प्रतिमाओं का विसर्जन किया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने 'गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया... अगले बरस तू जल्दी आ' के जयकारे लगाए। विसर्जन यात्रा के दौरान भक्ति गीतों और जयकारों से पूरा माहौल भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालु ढोल की थाप पर नाचते-झूमते हुए प्रतिमाओं को लेकर झील तक पहुंचे। गणेश प्रतिमा के विसर्जन से पहले श्रद्धालुओं ने आरती और पूजा-अर्चना की। इसके बाद विधि-विधान से प्रतिमा को झील में विसर्जित किया गया। कई श्रद्धालु भावुक भी दिखे और अगले साल फिर से गणपति के आने की कामना की। प्रशासन ने गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन में किसी तरह की गड़बड़ी न हो, इसके लिए पहले से ही तैयारियां की थीं। डीएम घनश्याम मीणा और एसपी जयप्रकाश सिंह ने निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया था। अधिकारियों ने पुलिस और प्रशासनिक टीम को भीड़ और यातायात व्यवस्था के साथ सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने के निर्देश दिए थे। आखिरी दिन होने के कारण झील पर प्रतिमाओं के विसर्जन का काम लगातार चलता रहा।
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