उन्नाव में गंगा का जलस्तर 18 सेमी कम हुआ:बाढ़ प्रभावित इलाकों में अब भी मुसीबत बरकरार, चेतावनी बिंदु से 79 सेमी ऊपर पानी
उन्नाव। गंगा के जलस्तर में लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई है। रविवार शाम छह बजे जलस्तर 112.97 मीटर था, जो सोमवार सुबह आठ बजे केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार घटकर 112.79 मीटर रह गया। यानी पिछले 12 घंटे में जलस्तर 18 सेंटीमीटर कम हुआ है। इससे पहले शनिवार को गंगा का जलस्तर 113.08 मीटर तक पहुंच गया था। गंगा का जलस्तर शुक्रवार रात करीब 10 बजे 113.02 मीटर पहुंचकर खतरे के निशान 113 मीटर को पार कर गया था। शनिवार को यह बढ़कर 113.08 मीटर पर पहुंचा और कुछ समय तक स्थिर रहा। रविवार सुबह से जलस्तर में गिरावट शुरू हुई। हालांकि सोमवार सुबह भी पानी चेतावनी बिंदु 112 मीटर से 79 सेंटीमीटर ऊपर है। ऐसे में जलस्तर घटने के बावजूद बाढ़ प्रभावित निचले इलाकों में लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। तटीय इलाकों में रास्ते पानी से घिरे गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने के बाद शुक्लागंज और आसपास के तटीय इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई थी। गोताखोर, कर्बला, हुसैन नगर, तेजीपुरवा और सैय्यद कंपाउंड समेत कई इलाकों में पानी पहुंच गया। घरों और रास्तों के आसपास पानी भरने से लोगों को आवागमन में परेशानी हुई। शहर के रविदास नगर, मालवीय नगर, श्रीनगर और इंद्रानगर में भी बाढ़ का पानी पहुंचा है। कई संपर्क मार्गों पर पानी भरा होने से लोगों को दूसरे रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है। जलस्तर घटने के बाद लोगों को जल्द हालात सामान्य होने की उम्मीद है, लेकिन निचले इलाकों से पानी निकलने में अभी समय लग सकता है। गांवों में भी बाढ़ का असर गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने का असर ग्रामीण क्षेत्रों में भी पड़ा। गगनीखेड़ा और फत्तेखेड़ा समेत कई गांवों में बाढ़ का पानी दोबारा पहुंच गया। गांवों को जोड़ने वाले रास्तों पर पानी भरने से ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी हो रही है। नेतुआ स्थित कान्हा गौशाला में भी बाढ़ का पानी फिर प्रवेश कर गया है। त्रिभुवनखेड़ा पावर हाउस के पास भी पानी पहुंचने के बाद स्थिति पर नजर रखी जा रही है। चेतावनी बिंदु से अभी 79 सेमी ऊपर सोमवार सुबह जलस्तर 112.79 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 113 मीटर से 21 सेंटीमीटर नीचे है। केंद्रीय जल आयोग ने जलस्तर में और कमी आने की संभावना जताई है। हालांकि जब तक पानी चेतावनी बिंदु के आसपास नहीं पहुंचता, तब तक निचले इलाकों के लोगों को पूरी राहत मिलने की उम्मीद कम है। प्रशासन और संबंधित विभाग जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
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