उन्नाव में पितृपक्ष के चौथे दिन घाट पर उमड़े श्रद्धालु:गंगा स्नान के बाद तर्पण-पिंडदान; पुरोहित ने बताया तिथियों का महत्व
उन्नाव में पितृपक्ष के दौरान पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और तर्पण का सिलसिला जारी है। बुधवार सुबह से ही गंगा तटों पर श्रद्धालु स्नान कर अपने पितरों को याद करते हुए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान कर रहे हैं। शुक्लागंज के आनंद घाट और बालू घाट पर पितृपक्ष के चौथे दिन भी श्रद्धालुओं की चहल-पहल रही। लोगों ने गंगा स्नान के बाद पुरोहितों के मार्गदर्शन में विधि-विधान से श्राद्ध कर्म किया। घाट पुरोहित पंडित मकर्जध्वज तिवारी ने पितृपक्ष की अलग-अलग तिथियों के अनुसार श्राद्ध करने की परंपरा और इसके महत्व की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिस व्यक्ति के पितर की मृत्यु तिथि ज्ञात होती है, उसका श्राद्ध उसी तिथि के अनुसार किया जाता है। मृत्यु तिथि के अनुसार किया जाता है श्राद्ध पंडित मकर्जध्वज तिवारी के अनुसार पितृपक्ष में चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी समेत अलग-अलग तिथियों का विशेष महत्व माना जाता है। जिस तिथि को पूर्वज का निधन हुआ हो, उसी तिथि में परिवार के लोग श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। यह कर्म गंगा तट या घर पर भी किया जाता है। उन्होंने बताया कि परिवार के लोग अपने पूर्वज की मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध कर्म करते हैं। पितृपक्ष में तिथि का विशेष महत्व होने के कारण जिन लोगों को अपने पितरों की मृत्यु तिथि मालूम होती है, वे उसी तिथि पर श्राद्ध करते हैं। तिथि मालूम न हो तो भी श्राद्ध का विधान पंडित तिवारी ने बताया कि कई बार परिवार के लोगों को अपने पूर्वज की मृत्यु की निश्चित तिथि की जानकारी नहीं होती है। ऐसी स्थिति में पितरों के श्राद्ध के लिए अलग-अलग विधान बताए गए हैं। उन्होंने बताया कि जिन माताओं की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती, उनका श्राद्ध पितृपक्ष की नौमी तिथि को करने की परंपरा है। वहीं जिन पिता या बुजुर्गों की मृत्यु तिथि मालूम नहीं होती, उनके लिए अमावस्या के दिन श्राद्ध करने का विधान बताया गया है। पूर्वजों के स्मरण और श्रद्धा का पर्व पुरोहित के अनुसार पितृपक्ष में श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान का उद्देश्य पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना और उनका स्मरण करना है। जिन लोगों को अपने पितरों की तिथि पता है, वे निर्धारित तिथि पर कर्मकांड करते हैं। तिथि की जानकारी नहीं होने पर परंपरा के अनुसार निर्धारित तिथि में श्राद्ध किया जाता है। घाटों पर सुबह से धार्मिक अनुष्ठान पितृपक्ष के दौरान गंगा तटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए घाटों पर चहल-पहल बनी हुई है। शुक्लागंज के आनंद घाट और बालू घाट पर सुबह से ही श्रद्धालु गंगा स्नान के बाद पुरोहितों के मार्गदर्शन में तर्पण और श्राद्ध कर्म कर रहे हैं। घाटों पर धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला लगातार जारी है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)