UPI पर MDR के विरोध में सड़कों पर उतरे व्यापारी:बारकोड की जलाई होली, मनाया ‘No UPI Day’

Oct 02, 2026 - 13:21
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UPI पर MDR के विरोध में सड़कों पर उतरे व्यापारी:बारकोड की जलाई होली, मनाया ‘No UPI Day’
गांधी जयंती (2 अक्टूबर) के अवसर पर उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के आह्वान पर व्यापारियों ने डिजिटल पेमेंट (UPI) पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। शहर में शाहदाना चौराहे से लेकर श्यामगंज मार्केट तक एक विशाल जन आक्रोश शांति मार्च निकाला गया। इस दौरान व्यापारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर जमकर नारेबाजी की और सड़क पर बारकोड व यूपीआई क्यूआर कोड की होली जलाकर अपना गहरा विरोध दर्ज कराया। 'नो यूपीआई डे' मनाकर सिर्फ नकद भुगतान लेने की अपील प्रदर्शनकारी व्यापारियों ने 2 अक्टूबर को पूरे देश में सांकेतिक रूप से ‘No UPI Day’ घोषित किया। व्यापारियों ने साथी दुकानदारों और ग्राहकों से अपील की कि आज कोई भी यूपीआई से भुगतान न करे और केवल नकद (कैश) में ही लेन-देन किया जाए। व्यापारियों की प्रमुख आपत्तियां और बयान: राजेश जसोरिया (महानगर महामंत्री, व्यापार मंडल): उन्होंने कहा कि व्यापारी पहले से ही 18% जीएसटी नियमित रूप से सरकार को दे रहे हैं। अब ₹2000 से ऊपर के यूपीआई लेनदेन और सेटलमेंट पर 0.4% एमडीआर थोपा जा रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। अगर सरकार ने यह फैसला वापस नहीं लिया, तो व्यापारी स्थायी रूप से डिजिटल पेमेंट बंद कर नकद कारोबार की राह पकड़ेंगे, जिसका सीधा नुकसान सरकार को आगामी चुनावों में देखने को मिलेगा। दुर्गेश खटवानी (अध्यक्ष, केमिस्ट एसोसिएशन): उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि ऑनलाइन कंपनियों और ई-कॉमर्स की वजह से स्थानीय दुकानदारों का मार्जिन पहले ही नाममात्र (आधे से एक फीसदी) रह गया है। सरकार कह रही है कि यह शुल्क ग्राहकों से न लेकर दुकानदार अपनी जेब से दें। ₹2000 कोई बड़ी रकम नहीं होती; ऐसे में यदि 0.4% चार्ज कटने लगा, तो छोटा व्यापारी पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा। मुकेश खटवानी व अन्य व्यापारी नेता: व्यापारियों ने आशंका जताई कि सरकार ने पहले जनता और व्यापारियों को डिजिटल लेन-देन की आदत डलवाई और अब उस पर टैक्स का बोझ डाल रही है। व्यापारियों का कहना था कि थोक व्यापार में जहां 2000–3000 के सामान पर ₹10–15 का मुनाफा होता है, वहां यदि ₹12 टैक्स कट जाएगा, तो व्यापारी खाएगा क्या? इससे लोग दोबारा केवल कैश लेन-देन और ब्लैक मनी की तरफ लौटने को मजबूर होंगे। व्यापारियों ने सरकार को दो-टूक चेतावनी दी है कि यूपीआई पर लगाए जाने वाले किसी भी अतिरिक्त शुल्क को तुरंत वापस लिया जाए, अन्यथा व्यापारी समाज आंदोलन को और अधिक उग्र करेगा।

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