54 करोड़ जमीन घोटाले में बड़ी कार्रवाई,आईएएस पर गाज
उत्तराखंड में 54 करोड़ रुपये की संदिग्ध भूमि खरीद मामले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। एक IAS अधिकारी की बर्खास्तगी की संस्तुति, दो IAS और एक PCS अधिकारी पर कठोर कार्रवाई तथा कुल 12 अधिकारियों और कर्मचारियों पर निलंबन व मुकदमे की प्रक्रिया शुरू की गई है।
दि राइजिंग न्यूज़ | देहरादून | 21 जून 2026
54 करोड़ की जमीन खरीद में बड़ा खुलासा
उत्तराखंड की नौकरशाही में 54 करोड़ रुपये की संदिग्ध भूमि खरीद मामले ने बड़ा प्रशासनिक तूफान खड़ा कर दिया है। इस मामले में एक IAS अधिकारी की सेवा से बर्खास्तगी की संस्तुति की गई है, जबकि दो अन्य IAS अधिकारियों और एक PCS अधिकारी सहित कुल 12 अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है।
जांच रिपोर्ट के बाद बड़ी कार्रवाई
अप्रैल 2025 में हरिद्वार नगर निगम द्वारा की गई भूमि खरीद में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। जांच में सामने आया कि लगभग 14 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन को करीब 54 करोड़ रुपये में खरीदा गया।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले की जांच के आदेश दिए थे, जिसके बाद सचिव स्तर के अधिकारी रणवीर चौहान ने विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार की।
प्रक्रिया और मूल्यांकन पर गंभीर सवाल
जांच रिपोर्ट में पाया गया कि भूमि खरीद प्रक्रिया में कई स्तरों पर गंभीर लापरवाही बरती गई। रिपोर्ट के अनुसार जमीन का मूल्यांकन कृषि भूमि के आधार पर शुरू हुआ था, लेकिन अंतिम खरीद वाणिज्यिक दरों पर की गई। इसके अलावा आवश्यक भूमि खरीद समिति का गठन नहीं किया गया और कई प्रशासनिक प्रक्रियाओं को या तो नजरअंदाज किया गया या बेहद तेजी से पूरा किया गया।
तेजी से बदले गए नियम और फाइल प्रक्रिया
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि भूमि उपयोग परिवर्तन से जुड़ी प्रक्रिया असामान्य रूप से तेजी से पूरी की गई। सामान्यतः समय लेने वाली यह प्रक्रिया मात्र कुछ दिनों में निपटा दी गई। जांच में यह भी पाया गया कि कई मामलों में फाइलें निचले स्तर पर ही निपटा दी गईं और जरूरी अनुमोदन प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
जमीन चयन पर भी उठे सवाल
जांच रिपोर्ट में भूमि चयन को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं। बताया गया कि जिस जमीन को खरीदा गया वह कूड़े के ढेर के पास स्थित थी और उसकी तत्काल आवश्यकता स्पष्ट नहीं थी। अब यह भी जांच की जा रही है कि क्या अन्य विकल्पों पर विचार किया गया था या नहीं और निर्णय किन आधारों पर लिया गया।
अधिकारियों पर कार्रवाई तेज
जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन नगर आयुक्त और IAS अधिकारी वरुण चौधरी की सेवा समाप्ति की संस्तुति की गई है। वहीं तत्कालीन जिलाधिकारी और अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की गई है। एसडीएम स्तर पर परनिंदा प्रविष्टि, वेतन वृद्धि रोकने और अन्य दंडात्मक कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।
केंद्र सरकार की भूमिका अहम
चूंकि मामला अखिल भारतीय सेवा से जुड़े अधिकारियों का है, इसलिए अंतिम निर्णय केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) द्वारा लिया जाएगा। राज्य सरकार ने आगे की कार्रवाई के लिए प्रस्ताव केंद्र को भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
भ्रष्टाचार पर सख्त संदेश
सरकारी स्तर पर इस कार्रवाई को प्रशासनिक भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का दावा है कि सरकारी धन के उपयोग में किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी, चाहे अधिकारी कितना भी वरिष्ठ क्यों न हो। यह मामला राज्य में प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर एक बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।