वाराणसी में ज्वेलरी एग्जीबीशन का विरोध शुरू:व्यापारियों ने की बैठक, एग्जीबीशन में न शामिल होने की ली शपथ, करेंगे बायकॉट

Oct 13, 2026 - 20:39
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वाराणसी में ज्वेलरी एग्जीबीशन का विरोध शुरू:व्यापारियों ने की बैठक, एग्जीबीशन में न शामिल होने की ली शपथ, करेंगे बायकॉट
वाराणसी में पिछले तीन-चार साल से ओरिजनल ज्वेलरी एग्जीबीशन (प्रदर्शनी) लगाईं जाती है। इस एग्जीबीशन में ज्वेलरी बिकने की बात सामने आने के बाद अब वाराणसी के साथ ही साथ उत्तर प्रदेश स्वर्णकार संघ ने इस मामले में विरोध शुरू कर दिया है। वाराणसी के चौक स्थित अग्रवाल भवन में बैठक कर स्वर्णकारों ने इस ज्वेलरी प्रदर्शनी का बायकॉट करने और इसकी शिकायत संबंधित विभागों में करने की बात तय की। ज्वैलरी प्रदर्शनी का विरोध इस संबंध में उत्तर प्रदेश स्वर्णकार सभा के प्रदेश सत्यनारायण सेठ ने बताया गोल्ड ज्वेलरी एक्जीबिशन हमारे बनारस में विगत तीन-चार वर्षों से लग रहा है। यह हमारा जो बनारस जनपद है। यहां पर पांच प्रदेश के लोग यहां पर व्यापार करने के लिए आते हैं। जो सोने-चांदी के व्यापारी होते हैं। पांचों प्रदेश के लोग यहीं से माल खरीदकर अपने प्रदेश में और अपने जिले में, अपने बाजारों में बिक्री करते थे। एक्जीबिशन अच्छी चीज है। वहां अपने जो भी अपने नए-नए उत्पाद हैं उसको हम लोग देखते हैं। वहां पर प्रचार होता है। उससे लोग जानकारी रखते हैं। चोरी से बेच रहे हैं ज्वेलरी यह गलत सत्यनारायण सेठ ने बताया - लेकिन एग्जीबीशन का दुष्परिणाम सामने आने लगा कि जो लोग अपनी प्रदर्शनी लगाने के लिए आते हैं। वे यहां पर जेवर बेचने लगे। जो की गलत है। इससे वाराणसी के व्यापारियों पर असर आने लगा। बनारस की एक पहचान है। जेवर की नक्काशी जो हमारे यहां है। पूरी दुनिया में कहीं भी ऐसी उत्कृष्ट कला आपको देखने नहीं मिलेगा। उसी तरह कुन्दन की कारोबार है। उसमें खिलौने पूरी दुनिया में एक अलग पहचान बनाए हुए हैं। उसको इन्होंने विलुप्त करने का प्रयास किया। धीरे-धीरे धीरे-धीरे करते-करते ये हमारे व्यवसाय को, बनारस जनपद के जो कारीगर हैं। जो हमारे बाजार के लोग हैं उनको खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है। बर्बाद हो रहा व्यापार और बाजार उन्होंने बताया - ऐसे में हमारे युवा साथियों ने इस पर मंथन किए और यह निर्णय लिया की हमें एक्जीबिशन को रोकना चाहिए। इसमें हम लोगों से सहयोग मांगा गया। तो जो भी बनारस के करीब-करीब सभी संगठन इसमे सहयोग। जो युवा साथी हैं हमारे, उनका सहयोग करने के लिए तत्पर हैं। क्योंकि व्यापार ही नहीं रहेगा तो मेरा बाजार कहां से रहेगा और बाजार और व्यापार नहीं रहेगा तो कारीगर कहां से रहेंगे।

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