वाराणसी में सुबह-शाम बढ़ेगी ठंड,दिन में तेज धूप:11 अक्टूबर से शुष्क होगा मौसम,किसानों को धान और मक्का की कटाई का वैज्ञानिकों ने दिया सलाह
वाराणसी शहर में मौसम का मिजाज धीरे-धीरे बदलने लगा है। शनिवार को वाराणसी में तापमान 27 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हवा की रफ्तार छह किलोमीटर प्रति घंटे रही, जबकि आर्द्रता 76 प्रतिशत दर्ज की गई। वहीं, वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 98 रहा। मौसम वैज्ञानिक मनोज श्रीवास्तव के अनुसार, अगले एक सप्ताह तक वाराणसी में सुबह और शाम के समय तापमान में हल्की गिरावट देखने को मिलेगी। इससे लोगों को ठंड का एहसास होने लगेगा। हालांकि, दिन में तेज धूप निकलने का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। ऐसे में सुबह-शाम हल्की ठंड और दिन में धूप के कारण मौसम में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। 11 अक्टूबर से पूर्वांचल में शुष्क रहने की संभावना मौसम में बदलाव के बीच बारिश की गतिविधियों में कमी आने के संकेत हैं। मौसम पूर्वानुमान के मुताबिक, 11 अक्टूबर से पूर्वी उत्तर प्रदेश में मौसम पूरी तरह शुष्क रहने की प्रबल संभावना है। हालांकि, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की बौछारें पड़ सकती हैं। इसके बाद 12 और 13 अक्टूबर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी मौसम शुष्क होने के आसार हैं। मौसम के शुष्क होने से लोगों को बारिश से राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं, आसमान साफ रहने और धूप निकलने के कारण दिन के तापमान में अधिक गिरावट की संभावना कम रह सकती है। सुबह और शाम के समय तापमान में हल्की कमी के चलते मौसम में ठंडक बढ़ने का एहसास होगा। सुबह-शाम ठंड, दोपहर में धूप का असर वाराणसी में मौसम का बदलता रुख आने वाले दिनों में साफ तौर पर महसूस किया जा सकता है। सुबह घरों से निकलने वाले लोगों को हल्की ठंड का अनुभव हो सकता है, जबकि दोपहर में तेज धूप के कारण गर्मी बनी रह सकती है। दिन और रात के तापमान में अंतर बढ़ने से लोगों को अपने पहनावे और दिनचर्या में भी बदलाव करना पड़ सकता है। मौसम के इस दौर में सुबह और शाम के समय हल्के गर्म कपड़ों की जरूरत महसूस हो सकती है। हालांकि, दिन में धूप तेज रहने के कारण गर्मी का असर बना रहेगा। ऐसे में मौसम के अनुसार सावधानी बरतना जरूरी होगा। किसानों को धान और मक्का की कटाई करने की सलाह मौसम के शुष्क होने की संभावना को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों और मौसम विभाग की ओर से किसानों को फसलों की देखभाल को लेकर सलाह दी गई है। किसानों से कहा गया है कि जिन खेतों में धान और खरीफ मक्का की फसल पककर तैयार हो चुकी है, वहां मौसम का लाभ उठाते हुए कटाई का काम पूरा करें। शुष्क मौसम में फसल की कटाई और खेतों से उपज निकालने में आसानी होगी। इसके साथ ही किसानों को खेतों में जलभराव की स्थिति पर भी ध्यान देने की जरूरत है। जिन खेतों में अब भी पानी जमा है, वहां से अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था करनी चाहिए। खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से फसलों की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। गन्ना, अरहर और उड़द की फसलों पर दें ध्यान कृषि विशेषज्ञों की सलाह है कि किसान गन्ना, अरहर और उड़द की फसलों वाले खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था बनाए रखें। जलभराव के कारण जड़ों के सड़ने और फसल की बढ़वार प्रभावित होने का खतरा रहता है। इसलिए खेतों से अतिरिक्त पानी निकालना जरूरी है। धान और मक्का की तैयार फसल की कटाई के साथ ही किसानों को खेतों की नमी और जल निकासी की स्थिति पर भी नजर रखनी चाहिए। मौसम साफ रहने की संभावना का उपयोग कृषि कार्यों को समय से पूरा करने में किया जा सकता है।
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