वाराणसी पहुंचे मनोज तिवारी; किया विपक्ष पर तीखा हमला:CJP प्रोटेस्ट पर बोले- यह प्रोटेस्ट नहीं देश पर अटैक है, भारत को नेपाल-बांग्लादेश बनाना चाहते हैं ये लोग
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद और मशहूर अभिनेता मनोज तिवारी ने विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों पर कड़ा प्रहार किया है। वाराणसी दौरे पर मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने चुनाव आयोग के सीईओ ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और जारी विरोध प्रदर्शनों को लेकर विपक्ष को आड़े हाथों लिया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि देश में जो कुछ भी हो रहा है, वह कोई लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन (प्रोटेस्ट) नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर इस देश की संप्रभुता पर हमला (अटैक) है। मनोज तिवारी ने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें भारत की शांति को भंग कर इसे नेपाल और बांग्लादेश की तरह अस्थिर करना चाहती हैं। उन्होंने बहुत ही जिम्मेदारी के साथ यह बात दोहराई कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे विदेशी साजिश और फंडिंग काम कर रही हैं। एलोन मस्क और ध्रुव राठी पर उठाए सवाल बीजेपी सांसद ने वैश्विक स्तर पर हो रही बयानबाजी और सोशल मीडिया नैरेटिव को लेकर बड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, "मैं बहुत सोच-समझकर और जिम्मेदारी से कह रहा हूं कि ज्ञानेश कुमार (सीईओ, चुनाव आयोग) के वोट से एलोन मस्क का क्या लेना-देना है? ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाने के लिए ध्रुव राठी की क्या जरूरत है? ध्रुव राठी जर्मनी के नागरिक हैं और एलोन मस्क अमेरिका के एक बड़े व्यापारी हैं। जिन्होंने खुद माना है कि उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव के लिए 300 करोड़ रुपये का चंदा दिया। ये लोग बाहर बैठकर भारत की संप्रभुता को चुनौती दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरी साजिश के पीछे इंडी गठबंधन (INDIA Alliance) के वो युवा नेता शामिल हैं। जो भारत में नहीं पढ़े, बल्कि विदेशों में शिक्षा हासिल की है। वे वहां से एक विशेष एजेंडा और साजिश सीखकर आते हैं और उनका एकमात्र मकसद भारत की सड़कों को डिस्टर्ब करना और दंगे भड़काना है। हार की हताशा में ईवीएम और चुनाव आयोग पर मढ़ रहे दोष चुनाव आयोग और ईवीएम (EVM) पर विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर मनोज तिवारी ने आंकड़ों के जरिए पलटवार किया। उन्होंने कहा कि जो लोग आज ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि वे तो 2024-25 के आसपास आए हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 282 सीटें मिली थीं। 2019 में हमें 303 सीटें मिलीं। लेकिन जब 2024 के चुनाव में हमारी सीटें 240 रह गईं। तब विपक्ष कहता है कि चुनाव आयोग के अधिकारियों ने वोट चोरी की है! यह कैसी दलील है? असल बात यह है कि जनता विपक्ष को नकार रही है और अपनी हार की हताशा (फ्रस्ट्रेशन) को छिपाने के लिए ये लोग संवैधानिक संस्थाओं पर कीचड़ उछाल रहे हैं और गंदगी फैला रहे हैं।" गृहमंत्री के हवाले से कांग्रेस को घेरा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बयानों का हवाला देते हुए मनोज तिवारी ने कांग्रेस और राहुल गांधी को सीधे चुनौती दी। उन्होंने वाराणसी की धरती से सवाल पूछते हुए कहा कि तमिलनाडु में पिछले 46 सालों से कांग्रेस की सरकार नहीं आई है। इसके अलावा बिहार में राहुल गांधी की पार्टी पिछले 36 सालों से सत्ता से बाहर है। उन्होंने मीडिया से भी कहा कि जरा पता करिए कि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की सरकार आखिरी बार कब थी? उन्होंने तीखा सवाल दागते हुए कहा, "क्या इन राज्यों में इतने दशकों से वोट चोरी हो रही थी? आज जब ये सारे 'वोट चोर' अपनी जमीन खो चुके हैं, तो इंडी गठबंधन के रूप में एक साथ मिलकर देश को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। राहुल और प्रियंका गांधी पर साधा निशाना विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा का जिक्र करते हुए मनोज तिवारी ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रोटेस्ट करने का अधिकार सबको है, और नीट (NEET) मामले पर जब बच्चों का प्रदर्शन था तो सरकार ने खुद पांच कदम आगे बढ़कर उनसे बात की थी। लेकिन विपक्ष के प्रदर्शनों में हिंसा कहाँ से आ जाती है? उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा राहुल गांधी खुद एक महिला कांस्टेबल को हाथ लगाकर उसे पटक रहे हैं। प्रियंका गांधी एक महिला कांस्टेबल को घूंसे से मार रही हैं। ऐसे में राहुल गांधी और बिहार के उस लड़के में क्या अंतर रह जाता है जो एक छोटी बच्ची को उठाकर ले जा रहा था और पकड़ा गया? इन नेताओं में हताशा का स्तर इतना बढ़ गया है कि ये ऑन-ड्यूटी पुलिसकर्मियों के साथ हिंसा पर उतारू हैं। देश बाबासाहेब के संविधान से चलेगा बीजेपी सांसद ने हाल ही में मीडियाकर्मियों के साथ हुए दुर्व्यवहार और पत्रकारों को डिटेन किए जाने की खबरों पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि कल एक दृश्य देखा गया जहाँ हाथ में माइक लिए एक महिला पत्रकार को कुछ लोग (जिन्होंने केसरिया गमछा ले रखा था) मार रहे थे और उसने बड़ी मुश्किल से गाड़ी का शीशा बंद कर अपनी जान बचाई। बाद में जब कुछ लोगों ने उन्हें पहचान कर पीटा, तो मैं उसका भी समर्थन नहीं करता क्योंकि मैं किसी भी तरह की हिंसा के खिलाफ हूँ। लेकिन विपक्ष जानबूझकर ऐसे लोगों को आरएसएस (RSS) और संघी बताकर बदनाम करने का एजेंडा चला रहा है।
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