विंध्याचल धाम के अधिकांश घंटों से गायब हैं दोलक:मिर्जापुर में भक्त घंटा बजाकर लगाते हैं हाजिरी, नवरात्रि से पहले व्यवस्था पर सवाल
मिर्जापुर के विंध्याचल धाम में जगह-जगह लगाए गए अधिकांश घंटों से बीच में लटकने वाला दोलक यानी पेंडुलम गायब है। मंदिरों में पहुंचने वाले श्रद्धालु द्वार और मार्ग पर लगे घंटों को बजाकर अपनी हाजिरी लगाते हैं, लेकिन पेंडुलम नहीं होने के कारण कई घंटों में आवाज ही नहीं निकल पाती। इससे आस्था के साथ घंटा बजाने पहुंचे श्रद्धालुओं को निराश होकर लौटना पड़ता है। मां विंध्यवासिनी के धाम में श्रद्धालु अपनी आस्था प्रकट करने के लिए घंटा भी अर्पित करते हैं। मंदिर में घंटा बजाना सनातन धार्मिक परंपरा का हिस्सा माना जाता है। ऐसे में धाम में लगे घंटों का अधूरा या खराब होना श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा विषय बन गया है। विंध्याचल में शारदीय नवरात्रि मेला 11 अक्टूबर से शुरू होने जा रहा है। नवरात्रि के दौरान मां विंध्यवासिनी के दर्शन-पूजन के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसे देखते हुए मंदिर परिसर और आसपास की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की तैयारियां तेज होने का दावा किया जा रहा है। सफाई, सुरक्षा, पेयजल, प्रकाश और भीड़ नियंत्रण समेत कई व्यवस्थाओं को बेहतर करने की बात कही जा रही है। हालांकि, धाम में लगे घंटों की स्थिति इन तैयारियों के बीच अलग तस्वीर पेश कर रही है। नवरात्रि में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने से पहले घंटों की स्थिति सुधारना भी जरूरी बताया जा रहा है। घंटा बजाना आस्था का अहम हिस्सा मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए घंटा बजाना आस्था और पूजा-पद्धति का अहम हिस्सा होता है। श्रद्धालु मंदिर में प्रवेश करते समय घंटा बजाकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के साथ ईश्वर का स्मरण करते हैं। ऐसे में जब घंटा बजाने के लिए हाथ बढ़ाने पर पेंडुलम ही नहीं मिलता तो श्रद्धालुओं को निराशा होती है। धाम में कई स्थानों पर लगे घंटों के बीच का दोलक गायब है। इसके कारण श्रद्धालु घंटा बजाने का प्रयास तो करते हैं, लेकिन आवाज नहीं निकल पाती। नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए इन घंटों को दुरुस्त करने की जरूरत है। तीर्थ पुरोहित बोले- श्रद्धालुओं की भावनाओं से खिलवाड़ तीर्थ पुरोहित तरुण पांडेय ने घंटों से पेंडुलम गायब होने को श्रद्धालुओं की भावनाओं से खिलवाड़ बताया। उन्होंने कहा कि मंदिरों में घंटा बजाने की आध्यात्मिक परंपरा रही है। घंटा बजाने से निकलने वाली ध्वनि को धार्मिक रूप से सकारात्मक ऊर्जा और ‘ओम’ की ध्वनि से जोड़ा जाता है। उन्होंने बताया कि मंदिर में प्रतिदिन चार बार होने वाली आरती के दौरान भी सभी घंटों का उपयोग नहीं हो पाता, क्योंकि कई घंटों से उनका दोलक गायब है। इससे पूजा के दौरान भी घंटों का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है। नवरात्रि में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना तरुण पांडेय ने कहा कि शारदीय नवरात्रि में लाखों श्रद्धालुओं के विंध्याचल पहुंचने की संभावना रहती है। ऐसे में धाम की छोटी-बड़ी सभी व्यवस्थाओं को समय रहते ठीक किया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं को दर्शन-पूजन के दौरान किसी तरह की असुविधा न हो, इसके लिए मंदिर परिसर और आसपास की व्यवस्थाओं के साथ घंटों को भी दुरुस्त कराया जाना चाहिए।
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