वंदे भारत के यात्रियों पर मधुमक्खियों का हमला, बारह घायल:झांसी में रेलवे बोर्ड के हस्तक्षेप के बाद पहुंची मदद, महिला की हालत बिगड़ी

Oct 11, 2026 - 21:42
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वंदे भारत के यात्रियों पर मधुमक्खियों का हमला, बारह घायल:झांसी में रेलवे बोर्ड के हस्तक्षेप के बाद पहुंची मदद, महिला की हालत बिगड़ी
झांसी मंडल के खजुराहो रेलवे स्टेशन पर खड़ी वंदे भारत एक्सप्रेस में रविवार दोपहर मधुमक्खियों के झुंड ने यात्रियों पर हमला कर दिया। बचने के लिए यात्री कोच के अंदर भागे, लेकिन मधुमक्खियां वहां भी घुस आईं। कुछ यात्रियों ने टॉयलेट में छिपकर जान बचाने की कोशिश की, लेकिन वे वहां भी नहीं बच सके। हमले में करीब 12 यात्रियों को 50-50 डंक लगने की बात सामने आई है। यात्रियों का आरोप है कि दर्द से तड़पने के बावजूद ट्रेन के टीटीई और कैटरिंग स्टाफ ने उनकी मदद नहीं की। एक बुजुर्ग महिला की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें करीब 20 बार उल्टियां हुईं। आखिरकार रेलवे बोर्ड के एक अधिकारी के हस्तक्षेप के बाद झांसी स्टेशन पर मदद पहुंची। यहां से दो डॉक्टर यात्रियों के इलाज के लिए ट्रेन में सवार हुए और ग्वालियर तक साथ गए। घटना रविवार दोपहर करीब 3 बजे की है। हजरत निजामुद्दीन से खजुराहो पहुंची वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन नंबर 22469 की स्टेशन पर नियमित साफ-सफाई चल रही थी। इसी दौरान खजुराहो से हजरत निजामुद्दीन जाने वाले यात्री कोच के बाहर खड़े थे। ट्रेन के एग्जीक्यूटिव क्लास E-2 के बाहर भी कई यात्री मौजूद थे। इसी बीच प्लेटफॉर्म पर चल रहे निर्माण कार्य के दौरान पास में लगे मधुमक्खियों के छत्ते को तोड़ दिया गया। इसके बाद मधुमक्खियों के झुंड ने यात्रियों पर हमला कर दिया। कोच के अंदर भागे, टॉयलेट में छिपे फिर भी नहीं बचे वंदे भारत के E-2 कोच में सफर कर रहे ब्रिगेडियर बृजेश पांडेय ने दैनिक भास्कर को बताया कि प्लेटफॉर्म पर निर्माण कार्य चल रहा था। वहां काम कर रहे कुछ लोगों ने यात्रियों की सुरक्षा का ध्यान रखे बिना पास में लगे मधुमक्खियों के छत्ते को तोड़ दिया। इससे पहले कि यात्री कुछ समझ पाते, मधुमक्खियों ने हमला कर दिया। अचानक हुए हमले से बचने के लिए यात्री कोच के अंदर भागे, लेकिन मधुमक्खियां उनके पीछे कोच में घुस आईं। हर तरफ अफरा-तफरी मच गई। यात्री खुद को बचाने के लिए इधर-उधर भागते रहे। ब्रिगेडियर पांडेय के मुताबिक, मधुमक्खियों का झुंड इतना बड़ा था कि करीब 12 यात्रियों को 50-50 डंक लगे। इसी कोच में सफर कर रहे लोकेश शर्मा ने बताया कि मधुमक्खियों से बचने के लिए वह टॉयलेट में बंद हो गए, लेकिन वहां भी मधुमक्खियां घुस आईं। एक मधुमक्खी उनके कान में भी चली गई। उन्होंने किसी तरह खुद को बचाया। दर्द से तड़पते रहे यात्री, मदद के लिए लगाते रहे गुहार ब्रिगेडियर बृजेश पांडेय ने आरोप लगाया कि हमले के बाद कई यात्री दर्द से तड़प रहे थे। उन्होंने ट्रेन में मौजूद टिकट चेकिंग स्टाफ के एक सदस्य के माध्यम से मदद मांगने और रेलवे को सूचना देने की कोशिश की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनके मुताबिक, टीटीई ने यह तक कह दिया कि वह कुछ नहीं कर सकते। उन्होंने कैटरिंग स्टाफ से भी मदद मांगी। पांडेय ने बताया कि उन्होंने कर्मचारियों से कहा कि यदि वे कुछ और नहीं कर सकते तो कम से कम बर्फ ही लाकर दे दें, ताकि डंक लगने से हो रहे दर्द में कुछ राहत मिल सके। लेकिन उनके मुताबिक, किसी ने उनकी बात नहीं सुनी। ऐसे में यात्रियों ने एक-दूसरे की मदद की। कुछ यात्रियों ने डंक निकालने की कोशिश की, जबकि एक यात्री से चूना लेकर प्रभावित जगह पर लगाया गया। यात्रियों का आरोप है कि ट्रेन के कर्मचारियों से लगातार मदद मांगने के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिली। बुजुर्ग महिला को करीब 20 बार हुई उल्टी ब्रिगेडियर पांडेय के मुताबिक, ट्रेन में मौजूद कुछ वरिष्ठ नागरिकों की हालत लगातार बिगड़ रही थी। एक बुजुर्ग महिला यात्री को दर्द और घबराहट के चलते करीब 20 बार उल्टियां हुईं। यात्रियों को आशंका होने लगी कि समय पर इलाज नहीं मिला तो किसी की हालत और गंभीर हो सकती है। उन्होंने बताया कि ट्रेन में मौजूद स्टाफ से मदद मांगने के साथ ही कई फोन भी किए गए, लेकिन तत्काल प्रभावी मदद नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने रेलवे बोर्ड में सदस्य अपने एक मित्र को फोन कर घटना की जानकारी दी और सहायता मांगी। रेलवे बोर्ड के अधिकारी के हस्तक्षेप के बाद झांसी में मिले डॉक्टर ब्रिगेडियर पांडेय के मुताबिक, रेलवे बोर्ड के अधिकारी से संपर्क होने के बाद झांसी मंडल के डीआरएम ने उन्हें फोन कर यात्रियों का हाल जाना। इसके बाद ललितपुर स्टेशन पर मदद भेजी गई, लेकिन ट्रेन के कम समय रुकने के कारण यात्रियों को ज्यादा राहत नहीं मिल सकी। बाद में ट्रेन के झांसी स्टेशन पहुंचने पर रेलवे की ओर से दो डॉक्टर भेजे गए। डॉक्टर ट्रेन में सवार हुए और प्रभावित यात्रियों का इलाज करते हुए ग्वालियर तक गए। यात्रियों ने घटना के दौरान रेलवे स्टाफ की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ट्रेन में मौजूद कर्मचारियों को आपात स्थिति में तत्काल मदद करनी चाहिए थी। यात्रियों ने यह भी आरोप लगाया कि यदि समय रहते चिकित्सा सहायता मिल जाती तो उन्हें इतनी देर तक परेशानी नहीं झेलनी पड़ती। रेलवे ने कहा-मामले की जांच कराएंगे पूरे मामले को लेकर मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि खजुराहो सेक्शन में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। ललितपुर और फिर झांसी यात्रियों को मदद पहुंचाई गई है। टीटीई दिल्ली मंडल का कर्मी है। यदि कहीं कुछ गलत हुआ है तो उसकी जांच कराई जाएगी। खजुराहो स्टेशन पर घटना किस कारण हुई इसकी भी जांच कराई जाएगी।

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