सितंबर-अक्टूबर में क्यों महंगा होता है प्याज? जानिए असली वजह
सितंबर और अक्टूबर में प्याज की कीमतों में तेजी अक्सर देखने को मिलती है। फसल चक्र, मंडियों में कम आवक, पुराने भंडार में कमी और मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियां प्याज के दाम बढ़ने के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 22 सितंबर 2026
प्याज की कीमतों में पिछले कुछ समय से लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। खासकर सितंबर और अक्टूबर के दौरान प्याज के दाम बढ़ने का सिलसिला अक्सर देखने को मिलता है। इस समय कीमतों में अचानक उछाल आने से आम लोगों के रसोई बजट पर सीधा असर पड़ता है। आखिर साल के इन्हीं महीनों में प्याज महंगा क्यों होने लगता है, आइए समझते हैं।
प्याज की कीमतों में क्यों आया उछाल
प्याज की कीमतों में हाल के दिनों में तेजी देखने को मिली है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 21 सितंबर 2026 को प्याज का थोक भाव 4,615.98 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। एक साल पहले इसी अवधि में थोक भाव 3,299.85 रुपये प्रति क्विंटल था। यानी एक वर्ष के दौरान थोक कीमतों में करीब 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई।खुदरा बाजार में भी प्याज के दाम बढ़े हैं। आंकड़ों के मुताबिक, एक महीने पहले प्याज की औसत कीमत करीब 40.79 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो 21 सितंबर 2026 को बढ़कर 54.23 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। इस बढ़ोतरी का असर सीधे घरेलू रसोई के खर्च पर दिखाई दे रहा है।
सितंबर और अक्टूबर में ही क्यों बढ़ते हैं प्याज के दाम?
प्याज की कीमतों में सितंबर और अक्टूबर के दौरान तेजी आने के पीछे फसल चक्र और मंडियों में आवक का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। मार्च-अप्रैल के दौरान रबी की फसल से बड़ी मात्रा में प्याज बाजार में आती है। इस प्याज के भंडार को अगली खरीफ फसल आने तक चलाना होता है।जैसे-जैसे अगली फसल की आवक का समय नजदीक आता है, पुराने भंडार में रखा प्याज कम होने लगता है। सितंबर और अक्टूबर तक कई बार बाजार में उपलब्ध पुराने स्टॉक पर दबाव बढ़ जाता है। मांग बनी रहने और उपलब्धता घटने की स्थिति में प्याज के दाम बढ़ने लगते हैं।
मौसम भी प्याज की कीमतों को करता है प्रभावित
प्याज की कीमत बढ़ने का एक प्रमुख कारण मौसम में होने वाला बदलाव भी बताया गया है। अत्यधिक गर्मी और बेमौसम बारिश से प्याज की फसल को नुकसान पहुंच सकता है। महाराष्ट्र जैसे प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों का असर उत्पादन और बाजार में आने वाली प्याज की मात्रा पर पड़ सकता है।इसके अलावा, सरकारी भंडार में रखी प्याज भी खराब होने की स्थिति में उपलब्ध आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। स्रोत में बताया गया है कि सरकारी एजेंसियों के स्टॉक में करीब 30 प्रतिशत प्याज खराब हुई है। इससे बाजार में उपलब्ध प्याज की मात्रा पर दबाव पड़ सकता है।
इस बार कीमतों में कितनी बढ़ोतरी हुई
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 21 सितंबर को प्याज का थोक भाव 4,615.98 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जबकि एक वर्ष पहले यह 3,299.85 रुपये प्रति क्विंटल था। इससे पता चलता है कि एक साल के अंतराल में प्याज के थोक भाव में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।खुदरा कीमतों में भी इसी अवधि में तेजी दिखाई दी है। एक महीने में औसत कीमत 40.79 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 54.23 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई। यानी कम समय में ही प्याज की कीमत में बड़ा अंतर देखने को मिला है।
फसल चक्र का कीमतों पर सीधा असर
प्याज की खेती में अलग-अलग मौसम की फसलों की आवक बाजार की उपलब्धता को प्रभावित करती है। रबी की फसल की प्याज मार्च और अप्रैल से बाजार में आना शुरू होती है और इसका भंडार बाद के महीनों में इस्तेमाल किया जाता है। अगली फसल की पर्याप्त आवक होने तक इसी भंडारित प्याज से बाजार की मांग पूरी की जाती है।सितंबर और अक्टूबर तक पहुंचते-पहुंचते पुराने स्टॉक में कमी आने लगती है। इसी दौरान नई फसल की पर्याप्त आवक नहीं होने पर बाजार में उपलब्धता और मांग के बीच अंतर बढ़ सकता है। इसका सीधा असर प्याज की कीमतों पर दिखाई देता है।
आम लोगों की रसोई पर असर
प्याज भारतीय रसोई में रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाली प्रमुख सब्जियों में शामिल है। इसकी कीमत बढ़ने पर केवल प्याज खरीदने का खर्च ही नहीं बढ़ता, बल्कि कई घरेलू खाद्य पदार्थों की लागत भी प्रभावित हो सकती है। लगातार बढ़ती कीमतें परिवारों के मासिक बजट पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं।मौसम, फसल की उपलब्धता, भंडारण और मंडियों में आवक जैसे कई कारण मिलकर प्याज की कीमत तय करते हैं। इसलिए सितंबर और अक्टूबर में प्याज के दाम बढ़ने का संबंध केवल मांग से नहीं, बल्कि पूरे फसल चक्र और बाजार में उपलब्ध स्टॉक से भी है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)