यौन उत्पीड़न केस में गिरफ्तार स्कूल प्रबंधक को जमानत:पुलिस ने नियम संगत कार्रवाई बताई, कानून के जानकार बोले- फिर गिरफ्तारी क्यों
कुशीनगर में गुरुवार देर शाम स्कूल प्रबंधक पर यौन उत्पीड़न के आरोप में दर्ज मामले में नया मोड़ आया। पुलिस ने पूछताछ के बाद प्रबंधक को एसडीएम कोर्ट में पेश किया। वहां से उन्हें जमानत मिल गई। पुलिस ने कार्रवाई को कानून के मुताबिक बताया। वहीं प्रबंधक ने आरोपों को साजिश बताया है। महिला वाइस प्रिंसिपल ने दी थी तहरीर जिला मुख्यालय के रविंद्र नगर थाना परिसर के पास सरस्वती चौक पर एक निजी स्कूल संचालित होता है। गुरुवार को इसी स्कूल की महिला वाइस प्रिंसिपल ने प्रबंधक के खिलाफ तहरीर दी थी। इसमें यौन उत्पीड़न से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए थे। महिला ने आरोपों के समर्थन में पुलिस को एक वीडियो भी दिखाया था। बीएनएस की धारा 75 समेत तीन धाराओं में केस तहरीर के आधार पर पुलिस ने बीएनएस की धारा 75 समेत तीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। अगले दिन पुलिस के बुलाने पर प्रबंधक थाने पहुंचे। पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें थाने में रोक लिया। शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजे मेडिकल कॉलेज ले जाकर मेडिकल कराया गया। इसके बाद उन्हें एसडीएम कोर्ट में पेश किया गया। पुलिस बोली- सात साल से कम सजा वाली धाराएं शनिवार शाम करीब 4 बजे थाना प्रभारी अनिल सिंह ने बताया कि तहरीर के आधार पर जो धाराएं लगाई गई थीं, उनमें सात साल से कम की सजा का प्रावधान है। ऐसे मामलों में प्रबंधक को धारा 151 के तहत पाबंद कर एसडीएम कोर्ट भेजा गया था। वहां से जमानत मिलने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। प्रबंधक ने वीडियो को बताया एडिटेड आरोपी प्रबंधक दिनेश राय ने आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा है और उनका गांव भी स्कूल के पास है। उन्होंने सवाल उठाया कि वह ऐसा काम कर अपनी प्रतिष्ठा क्यों खराब करेंगे। प्रबंधक ने महिला वाइस प्रिंसिपल पर साजिश के तहत एडिटेड वीडियो फैलाकर बदनाम करने का आरोप लगाया। उन्होंने पास के एक अन्य स्कूल के संचालकों पर भी साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया। अधिवक्ता ने पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल जिला जज न्यायालय के वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता राकेश पाण्डेय ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सात साल से कम सजा वाले मामलों में गिरफ्तारी को लेकर कानून में अलग प्रावधान हैं और पुलिस को कुछ परिस्थितियों में कार्रवाई के अधिकार दिए गए हैं। उनके अनुसार, यदि पुलिस ने प्रबंधक को गिरफ्तार कर मेडिकल कराया था तो धारा 75 के तहत उन्हें संबंधित न्यायालय में पेश किया जा सकता था। उन्होंने कहा कि धारा 151 के तहत एसडीएम कोर्ट में पेश किए जाने से कानून की मंशा पूरी नहीं हुई। स्कूल की भी हो चुकी है जांच मामले में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के यहां हुई शिकायत के बाद खंड शिक्षा अधिकारी ने स्कूल की जांच की है। स्कूल में लगे सीसीटीवी कैमरों की भी जांच की गई है। अब पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि वायरल वीडियो की वास्तविकता क्या है और उसमें एडिटिंग किए जाने का आरोप सही है या नहीं।
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