यूपी में 2.04 करोड़ वोटर कम कैसे हुए?:आराधना मिश्रा ने EC से पूछे सवाल, SIR के बाद हटाए गए नामों ब्योरा मांगा

Oct 07, 2026 - 17:17
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यूपी में 2.04 करोड़ वोटर कम कैसे हुए?:आराधना मिश्रा ने EC से पूछे सवाल, SIR के बाद हटाए गए नामों ब्योरा मांगा
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने SIR को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग से 3 सवाल पूछे। कहा कि यूपी में एसआईआर के बाद 2.04 करोड़ वोटर कम कैसे हुए? कांग्रेस अध्यक्ष ने SIR के बाद हटाए गए नामों ब्योरा भी चुनाव आयोग से मांगा है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष मोना ने आरोप लगाया कि SIR के नाम पर करोड़ों लोगों को उनके मताधिकार से वंचित करने की साजिश की गई है। कांग्रेस ने इसे ‘संविधान पर प्रहार, वोट चोर सरकार’ करार देते हुए मतदाता सूची में हुए बदलावों का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की। पहला सवाल- 16.18 लाख अतिरिक्त वोट कहां से आए? आराधना मिश्रा ने कहा कि यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर उपलब्ध Form-6 अप्लीकेशन में करीब 71 लाख 38 हजार आवेदन दिखाई देते हैं, जबकि अंतिम मतदाता सूची में 84 लाख 28 हजार नाम जोड़े गए। कांग्रेस का दावा है कि दोनों आंकड़ों में करीब 16 लाख 18 हजार का अंतर है। पार्टी ने सवाल किया कि ये अतिरिक्त नाम किस प्रक्रिया के तहत जोड़े गए और इन मतदाताओं के Form-6 आवेदन व संबंधित विवरण सार्वजनिक क्यों नहीं किए गए? दूसरा सवाल- 16.91 और 13.39 करोड़ में इतना अंतर क्यों? कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यूपी की 2026 की त्रिस्तरीय पंचायत मतदाता सूची में करीब 12.58 करोड़ और 2023 की नगरीय निकाय मतदाता सूची में करीब 4.33 करोड़ मतदाता हैं। दोनों आंकड़ों को जोड़ने पर संख्या करीब 16.91 करोड़ होती है। जबकि SIR के बाद विधानसभा की अंतिम मतदाता सूची में 13 करोड़ 39 लाख 84 हजार 792 मतदाता रह गए। पार्टी ने करीब 3.52 करोड़ के अंतर पर चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है। तीसरा सवाल- SIR से पहले के 2.04 करोड़ नाम कहां गए? आराधना मिश्रा ने कहा कि SIR से पहले यूपी की विधानसभा मतदाता सूची में 15 करोड़ 44 लाख 30 हजार 92 मतदाता थे। अंतिम SIR सूची में यह संख्या घटकर 13 करोड़ 39 लाख 84 हजार 792 रह गई। करीब 2 करोड़ 4 लाख मतदाताओं के नाम किन कारणों से हटाए गए। पार्टी ने चुनाव आयोग से जिले और बूथवार आंकड़े जारी करने की मांग की है। कांग्रेस ने पूछा कि इनमें कितने नाम मृत्यु, स्थान परिवर्तन, डुप्लीकेट, मतदाता के उपलब्ध नहीं होने, दस्तावेजों की कमी या अन्य कारणों से हटाए गए। ‘हर हटाए गए नाम का कारण सार्वजनिक करे चुनाव आयोग’ आराधना मिश्रा ने कहा कि लोकतंत्र में मतदाता सिर्फ एक संख्या नहीं, बल्कि संविधान से मिला अधिकार है। किसी नागरिक का नाम मतदाता सूची से हटाना महज प्रशासनिक कार्रवाई नहीं है, बल्कि उसके लोकतांत्रिक अधिकार को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश कांग्रेस मताधिकार और संविधान पर किसी भी तरह का हमला स्वीकार नहीं करेगी। आराधना मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस इन सवालों का जवाब मांगती रहेगी और मतदाता सूची में हुए बदलावों का पूरा जिला और बूथवार डेटा सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

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