यूपी में खुदरा महंगाई राष्ट्रीय औसत से ज्यादा 6.08%:कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बोलीं-प्याज के दाम में सालाना 108% से अधिक की वृद्धि

Oct 13, 2026 - 19:01
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यूपी में खुदरा महंगाई राष्ट्रीय औसत से ज्यादा 6.08%:कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बोलीं-प्याज के दाम में सालाना 108% से अधिक की वृद्धि
दशहरा और दीपावली जैसे त्योहारों के बीच महंगाई को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर हमला बोला है। कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने कहा कि खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी के घरेलू बजट को बिगाड़ दिया है। त्योहारों पर खरीदारी और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “भाजपा ने घर के बजट पर वार किया है, बदलो ये महंगी सरकार।” आराधना मिश्रा ने केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की सितंबर 2026 की उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि देश में खुदरा महंगाई दर 5.54% और खाद्य महंगाई दर 7.74% दर्ज की गई है। वहीं, उत्तर प्रदेश में खुदरा महंगाई 6.08% रही, जो राष्ट्रीय औसत से 0.54 प्रतिशत अंक अधिक है। प्रदेश में ग्रामीण खुदरा महंगाई दर 6.71% दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े आम परिवारों पर बढ़ते आर्थिक दबाव को दिखाते हैं। महंगाई का असर केवल रसोई तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे परिवारों की बचत, बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और दूसरी जरूरी जरूरतों पर होने वाला खर्च भी प्रभावित हो रहा है। प्याज की महंगाई 108% पार, अदरक-लहसुन के दाम भी बढ़े कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी से आम लोगों की मुश्किलें बढ़ रही हैं। MoSPI के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में प्याज की सालाना महंगाई दर 108.09% रही। अगस्त में यह 48.78% थी। इसके अलावा अदरक की महंगाई दर 62.85%, लहसुन की 54.62% और नींबू की 36.41% दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि जरूरी खाद्य पदार्थों की कीमतों में इतनी तेजी से बढ़ोतरी का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ता है। गरीब, मध्यमवर्गीय परिवारों, किसानों, मजदूरों और नौकरीपेशा लोगों के लिए रोजमर्रा का खर्च संभालना कठिन हो रहा है। ग्रामीण परिवारों पर दोहरा दबाव आराधना मिश्रा ने कहा कि ग्रामीण उत्तर प्रदेश में परिवारों को घरेलू खर्च के साथ खेती की लागत, खाद, बीज, डीजल, बिजली और बच्चों की पढ़ाई पर भी खर्च करना पड़ता है। ऐसे में जरूरी वस्तुओं की कीमतें बढ़ने से उनकी आर्थिक मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। उन्होंने कहा कि किसानों, खेतिहर मजदूरों, दिहाड़ी श्रमिकों और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की आय अक्सर अनिश्चित रहती है। ऐसे में महंगाई बढ़ने पर परिवारों को दूसरी जरूरतों पर खर्च कम करना पड़ता है। सरकार बताए, महंगाई से राहत के लिए क्या किया? कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने भाजपा सरकार से सवाल किया कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण रखने, जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने तथा कम आय वाले परिवारों को राहत देने के लिए क्या प्रभावी कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की आर्थिक नीतियों का आकलन केवल विकास के दावों से नहीं, बल्कि आम नागरिक के जीवन पर उनके असर से होना चाहिए। कांग्रेस की मांग है कि जरूरी खाद्य पदार्थों की आपूर्ति और कीमतों की नियमित निगरानी की जाए। जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ कार्रवाई हो, किसानों को उपज का उचित मूल्य मिले और महंगाई से प्रभावित गरीब व मध्यमवर्गीय परिवारों को राहत दी जाए। आराधना मिश्रा ने कहा कि महंगाई का सवाल हर घर की थाली, परिवार की बचत और सम्मानजनक जीवन से जुड़ा है। उन्होंने कहा, “जनता को महंगाई पर भाषण नहीं, राहत चाहिए। भाजपा सरकार को आम परिवारों के बजट पर पड़ रहे दबाव का जवाब देना होगा।”

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