अरुणाचल सीमा पर भारत-चीन में अब भी टकराव? आईटीबीपी प्रमुख का बड़ा बयान

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन के सैनिकों के बीच कई बार आमने-सामने की स्थिति बनने की बात कही है। उन्होंने शौर्य कमांडो दल के प्रदर्शन की सराहना की। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस बयान के बाद केंद्र सरकार की चीन नीति और प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं।

Oct 23, 2026 - 10:19
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अरुणाचल सीमा पर भारत-चीन में अब भी टकराव? आईटीबीपी प्रमुख का बड़ा बयान

दि राइजिंग न्यूज़ | अरुणाचल प्रदेश | 23 अक्टूबर 2026

भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर दोनों देशों के सैनिकों के बीच कई बार आमने-सामने की स्थिति बनने की बात कही है। उनके अनुसार, सीमा पर ऐसी परिस्थितियां अब भी बनी हुई हैं। उनके इस बयान के बाद देश की सुरक्षा और चीन के साथ सीमा विवाद को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर कई बार आमने-सामने आए सैनिक

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने एक कार्यक्रम के दौरान भारत और चीन की सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में कई बार ऐसी परिस्थितियां पैदा हुई हैं, जब भारतीय और चीनी सैनिक आमने-सामने आ गए। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति अब भी बनी हुई है। हालांकि, उपलब्ध बयान में इन घटनाओं की सटीक तारीख, स्थान और परिस्थितियों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।

शौर्य कमांडो दल की भूमिका की तारीफ

शत्रुजीत कपूर ने अरुणाचल प्रदेश में तैनात भारतीय शौर्य कमांडो दल के कामकाज की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस दल ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अच्छा प्रदर्शन किया है। सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात जवानों को कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, कम तापमान और अधिक ऊंचाई पर काम करना पड़ता है। ऐसे क्षेत्रों में सतर्कता बनाए रखना और किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार रहना सुरक्षा बलों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

गुरिल्ला बल से ऊंचाई वाले क्षेत्रों की विशेषज्ञ शक्ति बनने पर जोर

आईटीबीपी प्रमुख ने बल की भूमिका में आए बदलाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की शुरुआत पर्वतीय गुरिल्ला बल के रूप में हुई थी, लेकिन बाद में इसने चीन से लगी सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाली। उनके अनुसार, वर्तमान परिस्थितियों में बल को अधिक ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों में काम करने वाली विशेषज्ञ सुरक्षा शक्ति के रूप में अपनी पहचान मजबूत करनी है। इससे सीमावर्ती इलाकों में निगरानी, सुरक्षा और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कार्रवाई करने की क्षमता को बेहतर बनाने पर जोर मिलता है।

कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर उठाए सवाल

आईटीबीपी प्रमुख के बयान के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सामाजिक माध्यम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार की चीन नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चीन के मामले में पर्याप्त सख्ती नहीं दिखा रही है। कांग्रेस नेता ने सीमा पर हुई हालिया घटनाओं के दौरान भारतीय जवानों के प्रदर्शन की सराहना की, लेकिन साथ ही इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री की चुप्पी को लेकर भी आपत्ति जताई।

चीन के साथ सीमा विवाद फिर चर्चा में

भारत और चीन के बीच सीमा विवाद लंबे समय से दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित करता रहा है। वास्तविक नियंत्रण रेखा के आसपास कई क्षेत्रों में दोनों देशों की सेनाएं तैनात हैं और सीमा पर शांति बनाए रखना दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण है। अरुणाचल प्रदेश को लेकर भी चीन और भारत के बीच मतभेद रहे हैं। ऐसे में सीमा पर सैनिकों के आमने-सामने आने से जुड़ा कोई भी बयान सुरक्षा व्यवस्था और दोनों देशों के आपसी संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।

वर्ष 2017 में डोकलाम में हुआ था लंबा गतिरोध

भारत और चीन के बीच वर्ष 2017 में डोकलाम क्षेत्र में लंबा सैन्य गतिरोध हुआ था। उस समय दोनों देशों के सैनिक कई सप्ताह तक आमने-सामने रहे थे। इस घटना ने दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया था। इसके बाद भी सीमा से जुड़े कई मुद्दों पर दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति बनी रही। डोकलाम की घटना आज भी भारत-चीन संबंधों और सीमा सुरक्षा से जुड़ी चर्चाओं में महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में सामने आती है।

सीमा सुरक्षा और राजनीतिक बयानबाजी पर बढ़ा ध्यान

अरुणाचल प्रदेश में सैनिकों के आमने-सामने आने को लेकर आईटीबीपी प्रमुख के बयान ने सीमा सुरक्षा के साथ-साथ राजनीतिक बहस को भी तेज कर दिया है। एक ओर सुरक्षा बलों की तैयारियों और जवानों के प्रदर्शन की चर्चा हो रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष सरकार की चीन नीति पर सवाल उठा रहा है। हालांकि, सीमा पर हुई घटनाओं के पूरे विवरण और उनके संदर्भ को समझने के लिए आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी। आने वाले समय में इस मुद्दे पर सरकार की प्रतिक्रिया और सीमा पर स्थिति से जुड़ी जानकारी पर नजर रहेगी।

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