मोहन भागवत बोले- केवल सत्ता बदलने से नहीं सुलझेंगी समस्याएं, एकता पर दिया जोर
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विजयादशमी उत्सव में मोहन भागवत ने फ्रांस, अल्बानिया, बांग्लादेश और नेपाल की परिस्थितियों का उदाहरण देते हुए कहा कि केवल सत्ता परिवर्तन से समस्याएं हल नहीं होतीं। उन्होंने भारत की मजबूती, सामाजिक एकता और विरोध प्रदर्शनों के उद्देश्य पर भी अपनी बात रखी।
दि राइजिंग न्यूज़ | नागपुर | 20 अक्टूबर 2026
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर नागपुर में आयोजित विजयादशमी कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने सामाजिक एकता, देश की मजबूती और सत्ता परिवर्तन से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जब-जब समाज बंटा है, तब-तब उसकी शक्ति कमजोर हुई है। उनके संबोधन में देश की एकता, आपसी सद्भाव और संगठित समाज के महत्व पर जोर दिखाई दिया। कार्यक्रम में दिए गए उनके बयानों को वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम में मोहन भागवत का संबोधन
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने सौ वर्ष पूरे होने के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। इसी क्रम में महाराष्ट्र के नागपुर में विजयादशमी के अवसर पर शस्त्र पूजन और संबोधन का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत ने संगठन की यात्रा, सामाजिक परिस्थितियों और देश के भविष्य से जुड़े विषयों पर विचार रखे। उनके संबोधन में समाज को एकजुट रखने और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने का संदेश प्रमुख रहा।
सत्ता परिवर्तन को लेकर क्या बोले मोहन भागवत
कार्यक्रम से जुड़ी खबर के शीर्षक में मोहन भागवत के हवाले से फ्रांस में सत्ता परिवर्तन को लेकर बयान सामने आया है। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि वहां सत्ता परिवर्तन नहीं हुआ और आगे भी नहीं होगा। हालांकि, इस टिप्पणी का पूरा संदर्भ और फ्रांस की राजनीतिक परिस्थितियों से इसका संबंध स्पष्ट करने के लिए उनके संबोधन का विस्तृत विवरण देखना जरूरी है। इस बयान को किसी राजनीतिक निष्कर्ष के रूप में प्रस्तुत करने से पहले उसके संदर्भ और मूल शब्दों की पुष्टि आवश्यक है।
फ्रांस, अल्बानिया, बांग्लादेश और नेपाल का दिया उदाहरण
मोहन भागवत ने अपने संबोधन में फ्रांस, अल्बानिया, बांग्लादेश और नेपाल की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि केवल सत्ता बदलने से किसी देश की समस्याओं का समाधान नहीं हो जाता। उनके अनुसार, किसी भी देश की वास्तविक प्रगति के लिए समाज की स्थिति, संस्थाओं की मजबूती और लोगों की सामूहिक जिम्मेदारी महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने बाहरी शक्तियों के प्रभाव से समाज में अस्थिरता पैदा होने की आशंका भी जताई।
भारत को कमजोर करने की कोशिशों पर जताई चिंता
संघ प्रमुख ने कहा कि भारत को कमजोर करने के प्रयास किए जा रहे हैं और कुछ लोग अपने स्वार्थों के कारण ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा दे सकते हैं। उन्होंने देश की प्रगति में बाधा डालने वाली परिस्थितियों को लेकर चिंता जताई। उनके अनुसार, समाज को ऐसे विषयों को समझना चाहिए और किसी भी चुनौती का सामना एकजुट होकर करना चाहिए। यह बयान उन्होंने देश की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों पर अपनी राय रखते हुए दिया।
विरोध प्रदर्शन को लेकर भी रखी अपनी बात
मोहन भागवत ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करना एक महत्वपूर्ण अधिकार है, लेकिन विरोध का उद्देश्य समस्याओं का समाधान खोजना होना चाहिए। उनके अनुसार, आंदोलनों के माध्यम से यदि समाज में और अधिक मतभेद तथा तनाव पैदा होते हैं, तो इससे परिस्थितियां सुधरने के बजाय बिगड़ सकती हैं। उन्होंने समस्याओं के समाधान के लिए रचनात्मक प्रयासों और सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर दिया। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब देश में निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध की खबरें सामने आ रही हैं।
‘हम जब भी बंटे, कमजोर हुए’ — सामाजिक एकता पर जोर
मोहन भागवत के संबोधन का प्रमुख संदेश समाज की एकता और संगठन की शक्ति से जुड़ा रहा। उन्होंने इस विचार पर जोर दिया कि आपसी विभाजन किसी भी समाज को कमजोर कर सकता है, जबकि एकजुटता कठिन परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता बढ़ाती है। उनके विचारों के अनुसार, देश को मजबूत बनाने के लिए लोगों के बीच सहयोग, आपसी विश्वास और राष्ट्रीय हितों के प्रति जिम्मेदारी आवश्यक है। सामाजिक एकता का यह संदेश संघ के विजयादशमी कार्यक्रम के प्रमुख विषयों में शामिल रहा।
नागपुर में शस्त्र पूजन के साथ शुरू हुआ कार्यक्रम
महाराष्ट्र के नागपुर स्थित रेशिमबाग मैदान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का विजयादशमी उत्सव आयोजित किया गया। इस अवसर पर मोहन भागवत ने पारंपरिक शस्त्र पूजन किया और संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी सहित कई प्रमुख व्यक्तियों की उपस्थिति की खबर सामने आई। यह आयोजन संघ के सौ वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों के समापन वर्ष से भी जुड़ा है।
निष्कर्ष
मोहन भागवत के विजयादशमी संबोधन में सामाजिक एकता, देश की मजबूती, विरोध प्रदर्शनों की भूमिका और सत्ता परिवर्तन से जुड़ी बहस प्रमुख रही। उन्होंने कहा कि केवल सरकार बदलने से समस्याओं का समाधान सुनिश्चित नहीं होता, बल्कि समाज की एकजुटता और रचनात्मक प्रयास भी आवश्यक हैं। उनके वक्तव्य को देश की वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मी उत्सव में मोह
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