10 मांगों को लेकर लेखपालों का आंदोलन:बलरामपुर में 24 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन
बलरामपुर में अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर उत्तर प्रदेश के लेखपाल एक बार फिर आंदोलन की राह पर हैं। लेखपाल संवर्ग का आरोप है कि पिछले कई वर्षों से उनकी न्यायोचित मांगों पर राजस्व परिषद और शासन स्तर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इसी के विरोध में 22 सितंबर से अतिरिक्त हल्कों का बहिष्कार जारी है। अब आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से और तेज करने का ऐलान किया गया है। आंदोलन के अंतिम चरण में 24 अक्टूबर से लेखपाल अनिश्चितकालीन संपूर्ण कार्य बहिष्कार करेंगे। लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष अमित तिवारी की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार 3 अक्टूबर यानि आज से लेखपाल संपूर्ण समाधान दिवस का बहिष्कार कर सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक धरना देंगे और मांगों से संबंधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजेंगे। 8 अक्टूबर को तहसील प्रशासनिक व्हाट्सएप ग्रुप छोड़कर आय, जाति, निवास प्रमाणपत्र, वरासत रिपोर्ट, फार्मर रजिस्ट्रेशन और सत्यापन समेत विभिन्न ऑनलाइन कार्यों का बहिष्कार किया जाएगा। इसके बाद 10 अक्टूबर को काली पट्टी बांधकर थाना दिवस में कार्य, जबकि 12 अक्टूबर को तहसील एवं जिला मुख्यालयों पर रक्तदान शिविर आयोजित किए जाएंगे। रैली निकालकर डीएम को ज्ञापन 14 अक्टूबर को दोपहर एक बजे जिला मुख्यालयों पर मोटरसाइकिल रैली निकालकर डीएम को ज्ञापन सौंपा जाएगा। 17 अक्टूबर को लेखपाल संपूर्ण कार्य बहिष्कार करते हुए तहसील मुख्यालयों पर सुबह 10 से शाम 4 बजे तक धरना-प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद 24 अक्टूबर से अनिश्चितकाल तक जिला मुख्यालयों पर प्रतिदिन सुबह 10 से शाम 4 बजे तक धरना और संपूर्ण कार्य बहिष्कार किया जाएगा। लेखपालों का कहना है कि प्रारंभिक वेतनमान में 2800 ग्रेड पे की मांग करीब 10 वर्षों से लंबित है। 16 वर्षों से भत्ता बढ़ोतरी का मामला वहीं आठ वर्षों से अंतर-मंडलीय स्थानांतरण, दो वर्षों से पदोन्नति सूची और 16 वर्षों से भत्ता बढ़ोतरी का मामला लंबित बताया गया है। संगठन ने नवनियुक्त लेखपालों के परीक्षा परिणाम और स्थायीकरण, पटल सहायक एवं प्रभारी राजस्व निरीक्षक के अतिरिक्त कार्यों से मुक्ति तथा लेखपाल पद को तकनीकी पद घोषित करने की मांग भी उठाई है। शासन को जिम्मेदार ठहराया संगठन का कहना है कि ग्राम सचिवालयों में पर्याप्त आधारभूत सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था और भत्ता बढ़ोतरी के बिना लेखपालों की ड्यूटी लगाई जा रही है। लेखपालों ने चेतावनी दी है कि मांगों पर प्रभावी निर्णय नहीं होने पर आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। संगठन ने आंदोलन के दौरान आमजन को होने वाली संभावित असुविधा के लिए राजस्व परिषद और शासन को जिम्मेदार ठहराया है।
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