अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी:रामलला के दान में दोगुना इजाफा, रोजाना 10 लाख तक पहुंचा समर्पण, छह दान काउंटरों पर बढ़ी राशि, दानपात्रों में भी चढ़ावा बढ़ा
रामनगरी में सितंबर के आखिरी दिनों में बढ़ी श्रद्धालुओं की भीड़ का असर रामलला को मिलने वाले समर्पण पर भी दिखाई दे रहा है। मंदिर के दान काउंटरों पर रोजाना मिलने वाली राशि करीब दोगुनी हो गई है। पहले जहां औसतन 5 लाख रुपए रोज मिलते थे, अब यह राशि करीब 10 लाख रुपए तक पहुंच गई है। एसबीआई से जुड़े सूत्रों के मुताबिक श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ काउंटरों पर समर्पण की राशि में लगातार इजाफा हुआ है। छह काउंटरों पर हो रहा समर्पण राम मंदिर परिसर और आसपास कुल छह दान काउंटर संचालित हैं। इनमें तीन काउंटर राम मंदिर परिसर में हैं। दो यात्री सुविधा केंद्र यानी पीएफसी में और एक रामकोट स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र कार्यालय में है। मंदिर परिसर में वीआईपी प्रवेश द्वार से आगे यज्ञशाला के पास एक काउंटर है। दूसरा आम श्रद्धालुओं के निकास द्वार के पास है। तीसरा पीएफसी के निकास मार्ग पर संचालित हो रहा है। टीवाईएसके के पास सुग्रीव किला क्षेत्र में दो काउंटर हैं। छठा काउंटर रामकोट स्थित तीर्थ क्षेत्र कार्यालय में बनाया गया है। दान काउंटरों पर ट्रस्ट के कर्मचारी दो शिफ्टों में ड्यूटी करते हैं। पहली शिफ्ट सुबह 6 से दोपहर 2 बजे तक रहती है। दूसरी शिफ्ट दोपहर 2 से रात 10 बजे तक चलती है। श्रद्धालुओं को दान देने के बाद कंप्यूटराइज्ड पर्ची भी दी जाती है। एक सप्ताह में 60 से 80 हजार श्रद्धालु रोज पहुंचे 25 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच रोजाना 60 से 80 हजार श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे। 26 और 27 सितंबर को संख्या 75 से 80 हजार रही। इसी अवधि में दान काउंटरों पर मिलने वाली राशि में भी तेजी आई। आंकड़े उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार अनुमानित न्यूनतम और अधिकतम सीमा हैं। सुबह बैंक पहुंचता है कर्मचारी दान काउंटरों पर जमा राशि को बैंक में पहुंचाने की निर्धारित व्यवस्था है। सुबह करीब 8 बजे एसबीआई के कर्मचारी मंदिर पहुंचते हैं। लिखापढ़ी पूरी करने के बाद काउंटरों से राशि प्राप्त की जाती है। इसके बाद रकम बैंक में जमा कराई जाती है। तीन दर्जन से ज्यादा दानपात्र भी काउंटरों के अलावा मंदिर परिसर में तीन दर्जन से अधिक स्थानों पर दानपात्र और हुंडियां लगी हैं। इनमें भी चढ़ावे की राशि बढ़ने की जानकारी है। हालांकि इनसे रोजाना या महीने में मिलने वाली कुल रकम का सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं हो सका है। दानपात्रों की राशि की गिनती भी दो शिफ्टों में होती है। इसके लिए पीएफसी के बेसमेंट में गणना कक्ष बनाया गया है। यहां कड़ी सुरक्षा के बीच राशि गिनी जाती है। गणना कक्ष में प्रवेश से पहले कर्मचारियों की फ्रिस्किंग होती है। इसके बाद ही उन्हें अंदर जाने की अनुमति मिलती है।
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