1871 की पर्ची लेकर कनाडा से बलिया पहुंची चौथी पीढ़ी:15 दिन की तलाश के बाद मिली पूर्वजों की जानकारी, गिरमिटिया मजदूर बनाकर ले गए थे अंग्रेज
करीब 155 साल पहले एक परिवार की जड़ें बलिया से निकलकर कलकत्ता और वहां से कनाडा की धरती पर जा बसीं। पीढ़ियां बदलती गईं, लेकिन पूर्वजों की जन्मभूमि को देखने की चाह परिवार के दिल में बनी रही। आखिरकार 1871 की एक पुरानी पर्ची पर दर्ज पते ने कनाडा की चौथी पीढ़ी को बलिया तक पहुंचा दिया। पंदह विकासखंड के खड़सरा गांव स्थित बेलौना टोला अपनी पत्नी के साथ पहुंचे असगर अली ने बताया कि 15 दिन की तलाश के बाद पैतृक ठिकाना मिला है। पूर्वजों की जन्मभूमि पर पहुंचने का यह सफर उनके लिए भावुक कर देने वाला रहा। असगर अली के पिता की दादी सुमैया वर्ष 1871 में करीब 14 वर्ष की उम्र में अपने भाई-बहनों के साथ गिरमिटिया मजदूर के रूप में कोलकाता से कनाडा चली गई थीं। उस समय उनके भाई-बहनों की उम्र करीब 10 और आठ वर्ष थी। कनाडा पहुंचने के बाद परिवार की पीढ़ियां वहीं बसती चली गईं। करीब डेढ़ सदी बाद परिवार की चौथी पीढ़ी ने अपनी जड़ों और पूर्वजों की जन्मभूमि तलाशने का निर्णय लिया। असगर अली के पास वर्ष 1871 का पूर्वजों से जुड़ा एक पुराना दस्तावेज था। इसी में दर्ज जानकारी के आधार पर उन्होंने ऑनलाइन खोज शुरू की। खोजबीन करते हुए पहले गाजीपुर पहुंचे और वहां से मिली जानकारी के आधार पर बलिया आए। इसके बाद उन्हें पता चला कि उनके पूर्वजों का संबंध पंदह विकासखंड के खड़सरा गांव के बेलौना टोला से रहा है। बेलौना पहुंचने के बाद असगर अली और उनकी पत्नी ने पंचायत भवन में ग्राम पंचायत सचिव मिथिलेश पांडेय से मुलाकात की। उन्होंने ग्रामीणों और बुजुर्गों से अपने पूर्वजों और गांव के पुराने परिवारों के बारे में जानकारी जुटाई। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि वर्तमान में उनके पूर्वजों का परिवार गांव में किस घर या परिवार से जुड़ा है। असगर अली ने ग्रामीणों से संपर्क कर कई लोगों के मोबाइल नंबर भी लिए, ताकि भविष्य में परिवार की जड़ों की तलाश को आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने भविष्य में परिवार के अन्य सदस्यों के साथ दोबारा खड़सरा आने की इच्छा जताई। करीब 155 साल पुराने दस्तावेज के सहारे कनाडा से पुश्तैनी जमीन और पूर्वजों की जन्मभूमि तक पहुंचने की यह कहानी गांव में चर्चा का विषय बनी रही।
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