2.21 करोड़ के विकास कार्यों का हिसाब नहीं मिला:उन्नाव में 38 प्रधान और 28 सचिवों पर वसूली की कार्रवाई होगी

Oct 02, 2026 - 13:54
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2.21 करोड़ के विकास कार्यों का हिसाब नहीं मिला:उन्नाव में 38 प्रधान और 28 सचिवों पर वसूली की कार्रवाई होगी
उन्नाव में ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर खर्च हुई 2,21,06,724 रुपये की धनराशि का हिसाब-किताब ऑडिट के सामने नहीं आ सका है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में खर्च की गई इस रकम से संबंधित अभिलेख उपलब्ध न कराने के मामले में अब जिले के 38 ग्राम प्रधान और 28 ग्राम पंचायत सचिवों, यानी कुल 66 जिम्मेदारों पर वसूली की कार्रवाई की तलवार लटक गई है। शुक्रवार को डीपीआरओ श्रीकांत यादव ने बताया कि कई बार रिमाइंडर भेजे जाने के बावजूद रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराने पर शासन ने सख्ती दिखाई है। संबंधित प्रधानों और सचिवों को अंतिम अवसर देते हुए सात दिन के भीतर सभी अभिलेख उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित अवधि में रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराने पर प्रधान और सचिव से बराबर-बराबर धनराशि की वसूली की जाएगी। जिले में कुल 1037 ग्राम पंचायतें हैं। गांवों में विकास कार्य कराने के लिए केंद्र और राज्य वित्त आयोग से ग्राम पंचायतों को हर वर्ष करोड़ों रुपये की धनराशि दी जाती है। इस रकम से सड़क, नाली, खड़ंजा, प्रकाश व्यवस्था समेत अन्य विकास कार्य कराए जाते हैं। धनराशि खर्च करने और विकास कार्य कराने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत स्तर पर होती है। वहीं शासनादेश के अनुसार खर्च से संबंधित बिल, भुगतान व अन्य अभिलेख तैयार रखने और सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों की होती है। पंचायतीराज विभाग को कार्रवाई के निर्देश दिए ग्राम पंचायतों में सरकारी धनराशि से कराए गए विकास कार्यों की नियमानुसार जांच और ऑडिट जिला लेखा परीक्षा अधिकारी की ओर से किया जाता है। इसके लिए संबंधित ग्राम पंचायतों के सचिवों को खर्च से जुड़े बिल, वाउचर, भुगतान संबंधी दस्तावेज और अन्य जरूरी अभिलेख उपलब्ध कराने होते हैं। इसी प्रक्रिया के तहत वित्तीय वर्ष 2017-18 में खर्च हुई 2 करोड़ 21 लाख 6 हजार 724 रुपये की धनराशि से जुड़े अभिलेख मांगे गए थे। हालांकि संबंधित ग्राम पंचायतों की ओर से ऑडिट के लिए अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए। अभिलेख नहीं मिलने के कारण विकास कार्यों पर खर्च की गई धनराशि का नियमानुसार ऑडिट नहीं हो सका। इस मामले में कई बार संबंधित जिम्मेदारों को रिमाइंडर भी भेजे गए, लेकिन इसके बावजूद रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया। मामले की जानकारी शासन स्तर तक पहुंचने के बाद पंचायतीराज विभाग को कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने अब संबंधित 38 ग्राम प्रधानों और 28 सचिवों को अंतिम अवसर दिया है। सभी को सात दिन के भीतर ऑडिट से संबंधित लंबित अभिलेख उपलब्ध कराने होंगे। निर्धारित समय में रिकॉर्ड नहीं दिए जाने पर संबंधित धनराशि की वसूली प्रधान और सचिव से बराबर-बराबर की जाएगी। ऑडिट के लिए रिकॉर्ड देना अनिवार्य ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों पर खर्च सरकारी धनराशि का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना और ऑडिट के दौरान उसे उपलब्ध कराना अनिवार्य है। अभिलेख नहीं मिलने से यह सत्यापित करना मुश्किल हो जाता है कि सरकारी धनराशि किस कार्य में और किस प्रक्रिया के तहत खर्च की गई। इसी को देखते हुए शासन ने मामले में अब वसूली की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सात दिन की अंतिम समयसीमा के बाद रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराने वाले जिम्मेदारों पर वसूली की कार्रवाई की जाएगी।

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