2027 से पहले बंसकार समाज को साधने की कवायद:लखनऊ में आज महासम्मेलन, समाज की एकजुटता और राजनीतिक हिस्सेदारी पर रहेगा जोर
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी के बीच अलग-अलग जातीय समूहों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश तेज हो गई है। इसी कड़ी में बुधवार को लखनऊ में बंसकार समाज महासम्मेलन होने जा रहा है। अखिल भारतीय बंसकार महासंघ की ओर से यह सम्मेलन लखनऊ के विश्वेश्वरैया सभागार में हो रहा है। समाज की ताकत दिखाने की तैयारी महासम्मेलन में बंसकार समाज के लोग और समाज से जुड़े पदाधिकारी शामिल होंगे। कार्यक्रम में समाज की समस्याओं, एकजुटता और राजनीतिक भागीदारी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। चुनाव से पहले लखनऊ में इस तरह का सम्मेलन होना इसलिए भी अहम है, क्योंकि राजनीतिक दल छोटे-छोटे जातीय समूहों के बीच अपना आधार मजबूत करने में जुटे हैं। 2027 में हिस्सेदारी पर नजर बंसकार समाज को अनुसूचित जाति वर्ग का हिस्सा माना जाता है। यूपी की राजनीति में दलित वोट बैंक लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। अब चुनाव से पहले दलित समाज के अलग-अलग समूहों तक पहुंच बनाने की कोशिशें भी तेज हैं। ऐसे में बंसकार समाज का यह सम्मेलन समाज की मांगों और राजनीतिक हिस्सेदारी को लेकर माहौल बनाने का मंच बन सकता है। लखनऊ से लेकर बुंदेलखंड तक असर बंसकार नाम से दर्ज समुदाय की मौजूदगी प्रदेश के कई हिस्सों में है। 2011 की जनगणना के आंकड़ों में यूपी में बंसफोर की आबादी करीब 59.8 हजार दर्ज है। वहीं बसोर नाम से अलग दर्ज समुदाय की आबादी करीब 1.37 लाख है। राजनीतिक नजरिए से देखें तो बंसफोर समुदाय की मौजूदगी लखनऊ, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, हरदोई, फर्रुखाबाद, पीलीभीत, सहारनपुर, प्रतापगढ़ और मिर्जापुर जैसे इलाकों में है। बसोर समुदाय की मौजूदगी जालौन, हमीरपुर, महोबा, झांसी, कानपुर और बांदा क्षेत्र में भी है। लखनऊ में बीकेटी और लखनऊ पूर्व जैसी सीटों पर अनुसूचित जाति की संख्या पहले से बड़ी है। बीकेटी में अनुसूचित जाति की संख्या करीब 1.20 लाख और लखनऊ पूर्व में करीब 80 हजार है।
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