3 करोड़ के नहर का पैनल 5 महीने में टूटा:कुशीनगर में 80 मीटर हिस्सा ध्वस्त; जून में पानी छोड़ा तो पड़ी थीं दरारें, अब जांच की बात

Oct 02, 2026 - 09:36
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3 करोड़ के नहर का पैनल 5 महीने में टूटा:कुशीनगर में 80 मीटर हिस्सा ध्वस्त; जून में पानी छोड़ा तो पड़ी थीं दरारें, अब जांच की बात
कुशीनगर में मुख्य पश्चिमी गंडक नहर के किलोमीटर 73 पर करीब 80 मीटर लंबा पैनल मंगलवार रात तक पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इसका निर्माण महज पांच महीने पहले करीब 3 करोड़ रुपए की लागत से कराया गया था। जून में नहर में पानी छोड़े जाने के बाद ही पैनल में कई जगह दरारें पड़ने की बात सामने आई थी। सोमवार रात पैनल का एक हिस्सा पहली बार टूटा था। इसके बाद मंगलवार रात तक करीब 80 मीटर हिस्सा ध्वस्त हो गया। पैनल सेखुई मिश्र के सामने क्षतिग्रस्त हुआ है। पैनल टूटने के बाद नहर से पानी के रिसाव की आशंका को देखते हुए सिंचाई विभाग आनन-फानन में क्षतिग्रस्त हिस्से की जगह नया निर्माण कराने में जुट गया है। मुख्य पश्चिमी गंडक नहर वाल्मीकिनगर बैराज से महाराजगंज होते हुए कुशीनगर आती है। इसी नहर के इस हिस्से में पैनल निर्माण पर करीब 3 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। दो चरणों में 4.2 किमी पैनल बनना था विभागीय योजना के तहत नहर में करीब 4.2 किलोमीटर पैनल का निर्माण दो चरणों में होना था। पहले चरण का काम मानसून से पहले पूरा कराया गया था। इसके बाद जून में नहर में पानी छोड़ा गया था। पानी छोड़े जाने के बाद पैनल में कई जगह दरारें पड़ने की बात सामने आई थी। अब पांच महीने के भीतर करीब 80 मीटर हिस्सा टूटकर क्षतिग्रस्त हो गया। ग्रामीणों ने निर्माण की गुणवत्ता पर उठाए सवाल पैनल टूटने के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि निर्माण के दौरान भी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए गए थे। ग्रामीणों का आरोप है कि पैनल पांच महीने तक पानी का दबाव भी नहीं झेल पाया। ग्रामीणों ने पूरे निर्माण की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पैनल टूटने से नहर के आसपास पानी के रिसाव का खतरा भी बना हुआ है। अधीक्षण अभियंता बोले- विभागीय प्रक्रिया के तहत हुआ निर्माण सिंचाई खंड द्वितीय के अधीक्षण अभियंता बोधई राम ने बताया कि पैनल का निर्माण विभागीय प्रक्रिया के तहत कराया गया था। पहले चरण का काम पूरा होने के बाद नहर में पानी छोड़ा गया था। उन्होंने बताया कि क्षतिग्रस्त पैनल की जगह नया निर्माण कराया जाएगा। प्रोजेक्ट इंजीनियर बोले- जांच के बाद साफ होगा कारण संस्था के प्रोजेक्ट इंजीनियर रमेश सिंह ने बताया कि पैनल के क्षतिग्रस्त होने की जांच कराई जाएगी। जांच के बाद ही निर्माण की गुणवत्ता और पैनल टूटने के कारणों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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