65 साल बाद भी नहीं मिला जमीन का पूरा मुआवजा:भुगतान नहीं हुआ तो हाईकोर्ट में अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा होंगे तलब
लखनऊ में वर्ष 1959 में अधिग्रहित जमीन का पूरा मुआवजा छह दशक से अधिक समय बाद भी नहीं मिलने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि यदि 22 अक्टूबर तक याची को पूरी देय राशि का भुगतान नहीं किया गया तो अपर मुख्य सचिव, माध्यमिक शिक्षा को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर जवाब देना होगा। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार की खंडपीठ ने राजकुमार शैलेंद्र सिंह की याचिका पर यह आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई 1959 में पूरी हो गई थी, जबकि मुआवजे की वसूली के लिए वर्ष 2019 से निष्पादन कार्यवाही चल रही है। इसके बावजूद याची को अब तक पूरा भुगतान नहीं किया गया। 15 प्रतिशत ब्याज भी मांगा है अदालत को बताया गया कि याची को अभी तक 11.72 लाख रुपये ही मिले हैं, जबकि अगस्त 2025 तक 38.25 लाख रुपये से अधिक की राशि देय थी। याची के अधिवक्ता के अनुसार बकाया रकम पर 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी बनता है। पीठ ने कहा कि मामले में कई न्यायिक आदेशों का पालन नहीं किया गया। कोर्ट ने चेतावनी दी कि निर्धारित समय में भुगतान नहीं होने पर अपर मुख्य सचिव को यह बताना होगा कि याची को मुआवजे के अतिरिक्त भारी हर्जाना क्यों न दिया जाए? मामले की अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को होगी।
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