804 पूजा समितियों ने नहीं लिया बिजली का अस्थायी-कनेक्शन:जौनपुर में ज्यादातर पंडालों में फायर सिलेंडर नहीं; लोहे की पाइपों पर भी नहीं बांधी सेफ्टी पॉलीथीन
जौनपुर में दुर्गा पूजा पंडालों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लापरवाही सामने आई है। दुर्गापूजा महासमिति से संबद्ध 804 समितियों ने पंडाल तो सजा दिए, लेकिन किसी ने भी विद्युत विभाग से अस्थायी कनेक्शन नहीं लिया। वहीं, अग्निशमन विभाग से आग से बचाव के इंतजामों की अनुमति लेने के लिए भी केवल 10 से 12 समितियां ही पहुंचीं। शुक्रवार रात 9 बजे दैनिक भास्कर की पड़ताल में अधिकांश पंडालों में अग्निशमन यंत्र नहीं मिले। बिजली के तारों और लोहे की पाइपों से जुड़े सुरक्षा इंतजाम भी अधूरे नजर आए। यह स्थिति तब है, जब नवरात्र के पहले दिन केराकत क्षेत्र में करंट से एक बच्चे की मौत हो चुकी है। बिजली कनेक्शन के लिए बने डेस्क पर पसरा सन्नाटा विद्युत विभाग ने पूजा पंडालों को अस्थायी कनेक्शन देने के लिए अलग से डेस्क बनाई है। इसके बावजूद नवरात्र के सातवें दिन तक वहां कोई आवेदन नहीं पहुंचा। अधीक्षण अभियंता मुकेश कुमार ने बताया कि महासमिति और जिलाधिकारी के साथ हुई बैठकों में आयोजकों को अस्थायी कनेक्शन लेने के निर्देश दिए गए थे। उन्होंने खुद भी पंडालों में जाकर इसके लिए कहा था, लेकिन किसी समिति ने आवेदन नहीं किया। उन्होंने इस स्थिति पर दुख जताया। जिले में छोटी-बड़ी करीब 2,500 समितियों ने दुर्गा पूजा पंडाल सजाए हैं। इनमें से 804 समितियां ही दुर्गापूजा महासमिति से पंजीकृत हैं। अधिकांश समितियों ने प्रकाश व्यवस्था के लिए जनरेटर का विकल्प अपनाया है। हालांकि, जनरेटर का इस्तेमाल करने के बावजूद बिजली के तारों और अन्य उपकरणों से जुड़े सुरक्षा इंतजाम जरूरी हैं। केराकत में बच्चे की मौत के बाद भी लापरवाही नवरात्र के पहले दिन केराकत कोतवाली क्षेत्र में आरती में शामिल होने आए सात वर्षीय बच्चे की टेंट की पाइप में करंट उतरने से मौत हो गई थी। घटना के बाद जिलाधिकारी सैमुअल पाल ने जांच टीम गठित कर संबंधित अधिकारियों को सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद पंडालों में सुरक्षा इंतजामों की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिखा। पड़ताल के दौरान सामने आया कि कुछ समितियों को छोड़कर अधिकांश पंडालों में अग्निशमन सिलेंडर की व्यवस्था नहीं थी। मार्गों पर सजावट के लिए लगाई गई लोहे की पाइपों पर करंट से बचाव के लिए सेफ्टी पॉलीथीन लगाने के निर्देश भी दिए गए थे, लेकिन चंद समितियों को छोड़कर बाकी ने इसका पालन नहीं किया। अगले दो दिन प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती शारदीय नवरात्र में सप्तमी और अष्टमी के दिन दर्शन-पूजन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु निकलते हैं। इनमें महिलाओं और बच्चों की संख्या भी अधिक रहती है। ऐसे में पूजा पंडालों में बिजली और आग से बचाव के इंतजामों की अहमियत बढ़ जाती है। प्रशासन की ओर से पहले दिन से ही रूट डायवर्जन और बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है, लेकिन पंडालों के भीतर सुरक्षा मानकों का पालन कराना भी चुनौती बना हुआ है। अग्निशमन विभाग ने 10 से 12 पंडालों को दी अनुमति अग्निशमन विभाग के एफएसओ नागेंद्र नाथ द्विवेदी ने बताया कि लोगों को आग से बचाव के प्रति जागरूक करने के लिए पोस्टर लगाए जा रहे हैं। बड़े पंडालों में 13 से 14 बिंदुओं पर अग्नि सुरक्षा संबंधी जानकारी दी गई है। उनके मुताबिक, 10 से 12 दुर्गा पूजा पंडालों की ओर से अनुमति के लिए आवेदन आए थे। जांच के बाद उन्हें अनुमति दी गई है। महासमिति का दावा- बड़े पंडालों में बिजली कनेक्शन दुर्गा पूजा महासमिति के अध्यक्ष मनीष देव गुप्ता ने बताया कि महासमिति से 804 समितियां संबद्ध हैं। आयोजकों को बिजली कनेक्शन लेने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि अधिकांश पंडालों में जनरेटर का इस्तेमाल किया जाता है। जिन पंडालों में तार कटे या क्षतिग्रस्त हैं, वहां टेप लगाने और बच्चों की सुरक्षा के लिए लोहे की पाइपों पर चार से पांच फीट तक कागज लगाकर कपड़ा बांधने को कहा गया है। अध्यक्ष ने दावा किया कि बड़े पंडालों में विद्युत कनेक्शन हैं, जबकि विद्युत विभाग के अधीक्षण अभियंता के मुताबिक, अब तक किसी समिति ने अस्थायी कनेक्शन के लिए आवेदन नहीं किया है। दोनों के बयानों में अंतर सामने आया है।
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